मंकीपॉक्स वायरस (Monkeypox Virus) के मामले अब अफ्रीकी महाद्वीप के बाहर भी फैल रहे हैं। यूरोप, अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों में भी अब इस वायरस के मामले मिले हैं, जहां अभी तक यह बीमारी कभी नहीं पहुंची थी। इस बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने सोमवार को कहा है कि उसे नहीं लगता यह बीमारी अफ्रीका के बाहर भी एक महामारी का रूप लेगी, लेकिन इसके बारे में अभी बहुत कुछ जानना बाकी है। मंकीपॉक्स बीमारी को स्मॉल पॉक्स यानी चेचक का ही एक रूप बताया जा रहा है।
WHO की डॉक्टर रोजमंड लुईस ने सोमवार को कहा कि अभी यह पक्का नहीं हुआ है कि अगर किसी संक्रमित व्यक्ति में बीमारी का कोई लक्षण नहीं दिखता है तो क्या वह भी इसे फैला सकता है। इसके अलावा भी इसके फैलने के तरीके को लेकर एक्सपर्ट कई सवालों के जवाब खोज रहे हैं।
अधिकतर समलैंगिक पुरुष हो रहे संक्रमित?
डब्ल्यूएचओ की डॉक्टर रोजमंड लुईस ने इस तथ्य पर भी जोर दिया कि दुनिया भर के दर्जनों देशों में मंकीपॉक्स वायरस से अधिकतर समलैंगिक, बाइसेक्सुअल या पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने वाले पुरुष व्यक्ति संक्रमित हुए हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को इसके बारे में और अध्ययन करने की जरूरत है ताकि जो लोग इसका शिकार हो सकते हैं, उन्हें ऐहतियात बरतने की सलाह दे सकें।
उन्होंने कहा कि कोई भी इस बीमारी की चपेट में आ सकता है, भले ही उसकी लैंगिक पहचान कुछ भी हो। उन्होंने कहा कि इस बात की आशंका नहीं है कि यह बीमारी अफ्रीकी महाद्वीप के बाहर भी महामारी का रूप ले लेगी।
1970 में आया था पहला मामला
मंकीपॉक्स मानव चेचक के समान एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है। यह पहली बार 1958 में वैज्ञानिक रिसर्च के लिए रखे गए बंदरों में पाया गया था। मंकीपॉक्स से इंसानों में संक्रमण का पहला मामला 1970 में दर्ज किया गया था। यह रोग मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में होता है और कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में पहुंच जाता है।