Pakistan Floods: बाढ़ में 1100 की मौत, पानी में डूबा देश का एक तिहाई हिस्सा, 'मॉन्स्टर मानसून' ने कैसे पाकिस्तान का किया बुरा हाल
Pakistan Floods: देश के योजना मंत्री ने कहा कि शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस घातक बाढ़ ने पाकिस्तान को अब तक 10 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान पहुंचाया है। मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने में पाकिस्तान की मदद करना दुनिया का दायित्व है
'मॉन्स्टर मानसून' ने कैसे पाकिस्तान का किया बुरा हाल
Pakistan Floods: पाकिस्तान (Pakistan) वर्तमान में दशकों में सबसे घातक प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) का सामना कर रहा है। मानसूनी मौसम में आई बाढ़ (Flood) ने 1,100 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। 10 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है और देश का लगभग एक तिहाई हिस्सा पानी में डूब गया है। इस सब के चलते पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद के दरवाजे भी खुल गए हैं। कैश की तंगी से जूझ रही शहबाज शरीफ सरकार संकट से निपटने के लिए लगातार मदद की गुहार लगा रही थी।
देश के योजना मंत्री ने कहा कि शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस घातक बाढ़ ने पाकिस्तान को अब तक 10 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने में पाकिस्तान की मदद करना दुनिया का दायित्व है।
ये बाढ़ रिकॉर्ड तोड़ मानसूनी बारिश के कारण आई है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने इसे "दशक का राक्षस मानसून" बताया है। इस भीषण बाढ़ ने सड़कों, फसलों, बुनियादी ढांचे और पुलों को बहा दिया है।
बाढ़ के चलते हाल के हफ्तों में 1,100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 3.3 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, जो देश की 22 करोड़ की आबादी का 15 प्रतिशत से ज्यादा है।
पाकिस्तान में इतने भयावह मानसून का क्या है कारण?
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण एक साथ कई जलवायु समस्याएं पैदा हो गई हैं। जैसे तापमान में गिरावट, ज्यादा नमी वाली गर्म हवा, मौसम बेहद विकट हो रहा है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं। पाकिस्तान में वर्तमान में जारी भीषण बारिश और बाढ़ के पीछे यही सब कारण हैं।
न्यूज एजेंसी AP ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक और पाकिस्तान की जलवायु परिवर्तन परिषद के सदस्य आबिद कय्यूम सुलेरी के हवाले से कहा, "इस साल पाकिस्तान में कम से कम तीन दशकों में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। इस साल अब तक बारिश औसत स्तर से 780% से ज्यादा चल रही है।"
उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है और पाकिस्तान कोई अपवाद नहीं है।"
बारिश, गर्मी और ग्लेशियर पिघलने की बार-बार चेतावनी
अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान के जलवायु वैज्ञानिक मोशिन हफीज ने कहा, "पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन के लिए आठवां सबसे कमजोर देश माना जाता है।" इसकी बारिश, गर्मी और पिघलने वाले ग्लेशियर सभी जलवायु परिवर्तन के मुख्य कारण हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिकों ने बार-बार चेतावनी दी है।
भारत के भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी की एक रिसर्च डायरेक्टर अंजल प्रकाश ने कहा कि पाकिस्तान में हाल ही में आई बाढ़ वास्तव में जलवायु आपदा का नतीजा है, जो बहुत बड़ी थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह की लगातार बारिश हुई है, वो बेहद गंभीर है।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर ब्रेक होते हैं और उतनी बारिश नहीं होती है। एक दिन में 37.5 सेंटीमीटर (14.8 इंच) बारिश होती है, जो पिछले तीन दशकों के राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना ज्यादा है। उन्होंने कहा, "इतना लंबा भी नहीं है... आठ हफ्ते हो गए हैं और हमें बताया गया है कि सितंबर में एक और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।"
लाहौर स्थित जलवायु वैज्ञानिक हफीज ने कहा कि बलूचिस्तान और सिंध जैसे इलाकों में औसत बारिश में 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे काफी ज्यादा बाढ़ आई है और कम से कम 20 बांध टूट गए हैं।
पाकिस्तान ने भी झेली भीषण गर्मी
अब भीषण बारिश से जूझ रहे पाकिस्तान में भी उतनी ही लगातार गर्मी देखने को मिली है। मई में, पाकिस्तान ने लगातार 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान देखा, जबकि जैकोबाबाद और दादू जैसी जगहों पर 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म तापमान दर्ज किया गया। गर्म हवा में ज्यादा नमी होती है। लगभग 7 प्रतिशत ज्यादा प्रति डिग्री सेल्सियस (4 प्रतिशत प्रति डिग्री फ़ारेनहाइट)।
देश के जलवायु मंत्री ने कहा कि पोलर रीजन के बाहर पाकिस्तान में ग्लेशियरों की सबसे बड़ी संख्या है। यह कहते हुए कि "यह हमें प्रभावित करता है।"
क्या जलवायु परिवर्तन को पूरी तरह से दोष दिया जा सकता है?
जरूरी नहीं। पाकिस्तान ने 2010 में इसी तरह की बाढ़ और तबाही देखी थी, जिसमें लगभग 2,000 लोग मारे गए थे। देश की जलवायु परिवर्तन परिषद के एक भाग आबिद कय्यूम सुलेरी ने कहा कि हालांकि, सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और नदी तलों में निर्माण और घरों को रोककर भविष्य की बाढ़ को रोकने के लिए योजनाओं को लागू नहीं किया।
वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने कहा कि आपदा एक गरीब देश को प्रभावित कर रही है, जिसने दुनिया की जलवायु समस्या में अपेक्षाकृत कम योगदान दिया है।
AP रिपोर्ट में बताए गए, आंकड़ों के अनुसार, 1959 के बाद से, पाकिस्तान ने अमेरिका की तरफ 21.5 प्रतिशत और चीन की तरफ से 16.4 प्रतिशत की तुलना में 0.4 प्रतिशत गर्मी-ट्रैपिंग कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन किया है।
जलवायु मंत्री शेरी रहमान ने कहा कि वे देश जो "जीवाश्म ईंधन के दम पर विकसित या समृद्ध हुए हैं, जो वास्तव में समस्या हैं। उन्हें एक जरूरी निर्णय लेना होगा कि दुनिया एक अहम प्वाइंट पर आ रही है।" उन्होंने कहा कि हम निश्चित रूप से अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं।