श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया है। राष्ट्रपति के भागने की खबर है। शनिवार प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन को घेर लिया। वे राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। बाद में वे राष्ट्रपति भवन में घुस गए। बताया जाता है कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में तोड़फोड़ भी की है। इस बीच श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने आपातकालीन बैठक बुलाई है। इसमें सभी दलों के नेताओ को हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे को सुरक्षित निकाल लिया गया है। लेकिन, हालात तनावपूर्ण है। पुलिस के प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की भी खबरें हैं। श्रीलंका के टीवी चैनलों ने प्रदर्शकारियों को राष्ट्रपति भवन में घुसने की क्लिपिंग दिखाई है।
अभी तक यह पता नहीं चला है कि राष्ट्रपति राजपक्षे कहां हैं। उन्हें सुरक्षित जगह पर पहुंचाए जाने की खबर है। लेकिन, अभी इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है कि वह श्रीलंका में है या विदेश चले गए हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि उनके श्रीलंका से बाहर निकलने की खबर है। लेकिन, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
पिछले तीन-चार महीनों से श्रीलंका आर्थिक संकट से गुजर रहा है। लोगों को दूध, ब्रेड, फल-सब्जियों सहित रोजमर्रा की चीजें तक नहीं मिल पा रही हैं। अस्पतालों में दवाओं की कमी से इलाज नहीं हो पा रहा है। देश में ईंधन की भारी कमी है।
पेट्रोल और डीजल नहीं मिलने से लोग एक से दूसरी जगह आने-जाने में असमर्थ हैं। सरकार ने स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। पिछले कई महीनों से खराब हालात से गुजर रहे लोगों का गुस्सा शनिवार को फूट गया। उनका मानना है कि उनकी मौजूदा स्थिति के लिए श्रीलंका की सरकार जिम्मेदार है।
बताया जाता है कि देशभर के प्रदर्शनकारी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुंचे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि देशभर से कार, वैन और बसों से लोग कोलंबो आए हैं। उनके ट्रेनों से भी कोलंबो पहुंचने की खबर है। उन्होंने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए हैं। वे राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
बताया जाता है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति भवन में घुसने से रोकने के लिए गोलियां चलाईं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन में घुसने में कामयाब हो गए। शुक्रवार रात को प्रदर्शनों पर रोक लगाने के लिए कर्फ्यू लगाया गया था। सिविल सोसायटी ग्रुप्स के विरोध के बाद कर्फ्यू हटा लिया गया।
शनिवार के विरोध प्रदर्शन में कम से कम 21 लोगों के घायल होने की खबर है। इसमें दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। श्रीलंका के पास जरूरी सामानों के आयात के लिए विदेशी मुद्रा नहीं बची है। लोगों का मानना है कि इसके लिए राष्ट्रपित गोताबाया राजपक्षे जिम्मेदार हैं। यहीं वजह है कि उनके खिलाफ इस साल मार्च से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
सरकार आर्थिक संकट के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) से बात कर रही है। जानकारों का कहना है कि सरकार ने आर्थिक मदद के लिए आईएमएफ से बातचीत शुरू करने में बहुत देर कर दी। इस बीच, इंडिया ने श्रीलंका की काफी मदद की है। इंडिया ने श्रीलंका को ईंधन भी दिया है। लेकिन, यह हालात को देखते हुए नाकाफी है।