चौथी तिमाही तक मंदी की चपेट में आ सकती है ब्रिटेन की इकोनॉमी, Goldman Sachs ने जताई आशंका

गोल्डमैन ने सोमवार को एक रिसर्च नोट में कहा कि ब्रिटेन के ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट में 2023 तक लगभग 1 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है। अगले साल तक सालाना आउटपुट में 0.6 फीसदी की कमी आने की आशंका है

अपडेटेड Aug 29, 2022 पर 12:07 PM
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पिछले सप्ताह अमेरिका से यूरोप और एशिया तक आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी के संकेत मिलने के बाद गोल्डमैन ने अपना अनुमान जारी किया है

Goldman Sachs Group Inc : गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक को ब्रिटेन की इकोनॉमी (UK economy) के इस साल के अंत तक मंदी की चपेट में आ जाएगी। साथ ही, एनर्जी की कॉस्ट बढ़ने से इकोनॉमी के सिकुड़ने का जोखिम भी पैदा हो सकता है।

गोल्डमैन ने सोमवार को एक रिसर्च नोट में कहा कि ब्रिटेन के ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट में 2023 तक लगभग 1 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है। अगले साल तक सालाना आउटपुट में 0.6 फीसदी की कमी आने की आशंका है, जो गोल्डमैन के पिछले अनुमान में बड़ा बदलाव है। इससे पहले गोल्डमैन ने 1.1 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान जाहिर किया था।

यूके में बढ़ेगी कॉस्ट ऑफ लिविंग


ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वेन जरी स्टेन की अगुआई में इकोनॉमिस्ट्स ने कहा, एनर्जी संकट बढ़ने से यूके में कॉस्ट ऑफ लिविंग पर दबाव की चिंता गहराती जा रही है। वास्तविक कंजम्प्शन में भारी गिरावट आने की आशंका है।

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पिछले सप्ताह अमेरिका से यूरोप और एशिया तक आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी के संकेत मिलने के बाद गोल्डमैन ने अपना अनुमान जारी किया है। इससे यह चिंताएं बढ़ गई हैं कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी और महंगाई में उछाल से दुनिया में मंदी की चपेट में फंस सकती है।

एक साल से ज्यादा समय तक रहेगी मंदी

इस महीने की शुरुआत में, बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) ने 27 साल में ब्याज दरों में पहली सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की और महंगाई में बढ़ोतरी के चलते यूके के एक साल से ज्यादा समय तक मंदी की चपेट में फंसने की चेतावनी दी।

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गोल्डमैन का अनुमान है कि 2023 की दूसरी तिमाही में हाउसहोल्ड सेविंग रेट उसकी “इक्विलिरियम रेट” से रिकॉर्ड लो तक गिरकर 3.5 फीसदी रह जाएगी। साथ ही 2023 तक वास्तविक डिस्पोजेबिल इनकम 2.9 फीसदी और वास्तविक खपत 1.4 फीसदी घटने का अनुमान जाहिर किया गया है।

जारी रहेगी बैंक ऑफ इंग्लैंड की सख्ती

गोल्डमैन ने कहा कि मंदी की संभावनाओं के बावजूद बैंक ऑफ इंग्लैंड के मॉनेट्री पॉलिसी में सख्ती की अपनी योजनाओं से पीछे हटने की उम्मीद नहीं है। उसने सितंबर में ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की उम्मीद जाहिर की है।

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