रूस (Russia) ने इंडिया को एलएनजी (LNG) की सप्लाई पर डिफॉल्ट (Default) किया है। इसकी वजह यह है कि अमेरिकी प्रतिबंध (US Sanctions) के जवाब में रूस ने जो प्रतिबंध लगाए हैं, उसके दायरे में एक ऐसी कंपनी भी आई है, जो इंडिया को गैस की सप्लाई करती है।
रूस (Russia) ने इंडिया को एलएनजी (LNG) की सप्लाई पर डिफॉल्ट (Default) किया है। इसकी वजह यह है कि अमेरिकी प्रतिबंध (US Sanctions) के जवाब में रूस ने जो प्रतिबंध लगाए हैं, उसके दायरे में एक ऐसी कंपनी भी आई है, जो इंडिया को गैस की सप्लाई करती है।
सूत्रों के मुताबिक, इंडिया को कम से कम 5 कार्गो की सप्लाई करने में रूस नाकाम रहा है। गेल (Gail) ने रूस की गैस उत्पादक कंपनी गैजप्रोम (Gazprom) की सिंगापुर इकाई से एलएनजी की सप्लाई के लिए लॉन्ग टर्म डील की थी। इसके तहत गैजप्रोम को सालाना 28.5 लाख टन एलएनजी की सप्लाई करनी है।
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गैजप्रोम इस साल जून से इंडिया को 5 कार्गो की सप्लाई करने में नाकाम रही है। उसने कहा है कि प्रतिबंध के चलते गैस मिलने में दिक्कत की वजह से वह डिलीवरी नहीं कर सकी है। इस कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया है कि अगर किसी वजह से सप्लाई नहीं हो पाती है तो बाद में उसकी भरपाई कर दी जाएगी।
लेकिन, रूसी कंपनी ने अब तक यह नहीं बताया है कि वह कब तक बाकी एलएनजी की सप्लाई करेगी। सूत्रों ने बताया है कि गैजप्रोम ने गेल को कहा है कि वह अब से एलएनजी को प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई करने की कोशिश करेगा।
रूस से एनएनजी की सप्लाई नहीं होने से गेल को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वह अमेरिका और मध्य-पूर्व के देशों में दूसरे स्रोतों से एलएनजी हासिल करने की कोशिश कर रही है। रूस ने पिछले कुछ महीनों में 31 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है। इनमें यमल पाइपलाइन के पोलिश हिस्से का मालिक भी शामिल है। इस पाइपलाइन से रूस से यूरोप को गैस की सप्लाई होती है। प्रतिबंध वाली कंपनियों की लिस्ट में गैजप्रोम की जर्मन इकाई भी शामिल है।
रूस ने अमेरिका और पश्चिमी देशों की तरफ से उस पर लगाए प्रतिबंध के जवाब में यह प्रतिबंध लगाया है। इसका मकसद प्रतिबंध के तहत आने वाली कंपनियों को गैस की आपूर्ति रोकना है। इनमें से ज्यादातर कंपनियां उन देशों में स्थित हैं, जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं।
रूस ने जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें पोलिश पाइपलाइन की ओनर RuRoPol GaZ और Gazprom Germania शामिल हैं। इनके अलावा इस लिस्ट में ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, फ्रांस, जर्मनी, इटली, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्विट्जरलैंड, इंग्लैंड, अमेरिका और सिंगापुर स्थिति Gazprom की सब्सिडियरी शामिल हैं।
गेल ने कहा है कि वह कॉन्ट्रैक्ट को पूरा कराने के लिए कानूनी रास्तों के बारे में सोच रही है। इससे पहले गैजप्रोम ने डिलीवरी की व्यवस्था में थोड़ा बदलाव किया था। उसने मई में होने वाली डिलीवरी के लिए शिपमेंट्स को हिस्सों में बांट दिया था। लेकिन, अब वह 5 कार्गो की सप्लाई पर डिफॉल्ट कर गया है। इनमें दो की डिलीवरी जुलाई में होने वाली थी।
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