अगले 50 सालो में आएगी कोरोना जैसी कई महामारी, भारत और इंडोनेशिया हो सकते हैं केंद्र, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावानी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले 50 सालों में हमारे सामने एक स्तनधारी जीव से दूसरे स्तनधारी जीव में वायरस ट्रासंफर होने के हजारों मामले सामने आ सकते हैं

अपडेटेड Apr 30, 2022 पर 11:10 PM
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वैज्ञानिकों ने कहा कि भविष्य में वायरस के फैलाव के पीछे जलवायु परिवर्तन की अहम भूमिका होगी

अगले 50 सालों में हमारे सामने एक स्तनधारी जीव से दूसरे स्तनधारी जीव में वायरस ट्रासंफर होने के हजारों मामले सामने आ सकते हैं और इसका प्रमुख कारण क्लाइमेंट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन होगा। 'नेचर' नाम की एक साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक हालिया जर्नल में यह दावा किया गया है। एनालिस्टों का कहा है कि जलवायु परिवर्तन से वन्यजीवों के रहने की जगहों में बदलाव आएगा और इससे उनका उन जीवों के साथ मुठेभड़ होने की अधिक संभावना होगी, जिनमें एक दूसरे में वायरस ट्रांसफर हो सकेंगे।

ऐसा माना जाता है कि हाल ही में पूरी दुनिया में तबाही मचाने वाला कोरोना वायरस भी एक जानवार के जरिए इंसानों में आया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्तनधारी जीवों के बीच वायरसों के अधिक आदान प्रदान से इसानों में आगे भी ऐसे वायरस आने का खतरा बना रहेगा, साथ ही ये वायरस जानवरों के स्वास्थ्य को भी काफी नुकसान पहुंचाएंगे।

जलवायु परिवर्तन से नए वायरस पैदा होने का खतरा कैसे बढ़ सकता है, आइए इसे 7 बिंदुओं में समझते हैं-


- जलवायु परिवर्तन से कई जगहों का तापमान काफी बढ़ जाएगा। ऐसे में कई जानवर अपने मूल निवास को छोड़कर दूसरे ठंडे प्रदेशों की तरफ जाएगा, जहां उनकी मुलाकात कई नए जीवों से होगी। यह जानवरों के बीच वायरस के ट्रांसमिशन को बढ़ावा देगा।

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- शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के जरिए बताया कि अगर दुनिया अगले 50 सालों में 2 डिग्री सेल्सियस भी गर्म हो गई तो 3000 स्तनपायी प्रजातियां अपने जगह से विस्थापित होकर ठंडे प्रदेशों की ओर जाएंगी। बढ़ता तापमान वायरस के फैलाव के लिए उपयुक्त होता जाएगा।

- जानवरों के बीच वायरस ट्रांसमिशन का मामला बढ़ने से कोरोना महामारी की तरह इंसानों में भी वायरस आने का खतरा बढ़ेगा और यह इंसान व जानवर दोनों के सेहत के लिए बुरा होगा।

- एक्सपर्ट्स ने कहा कि वायरस फैलने के हॉटस्पॉट केंद्र वो इलाके बनेंगे जहां विभिन्न तरह के जानवरों की काफी संख्या में मौजूदगी है (जैसे अफ्रीका और एशिया के कई इलाके) या फिर वो भारत इंडोनेशिया जैसे वे इलाके जहां जैव विविधता के साथ काफी सघन आबादी है।

- एक्सपर्ट्स ने कहा कि यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और अगर दुनिया कार्बन उत्सर्जन को कम कर जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने की कोशिश करे तो भी यह जारी रहेगी। यह जानवरों और मनुष्यों दोनों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

- चमगादड़ों को वायरस के भंडार माना जाता है और जलवायु परिवर्तन के बिना भी ये वायरस को दूसरे जीवों में ट्रांसफर करते रहेंगे।

- शोधकर्ताओं का कहना है कि सभी वायरस इंसानों में नहीं फैलेंगे या फिर किसी महामारी का रूप नहीं ले लेंगे, लेकिन दूसरी प्रजातियों से वायरस प्रसार होने से इंसानों में वायरस फैलने का जोखिम बढ़ जाएगा।

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