South Korea: राष्ट्रपति ने पत्नी को बचाने के लिए लगाया मार्शल लॉ? विपक्ष ने संसद में दायर किया महाभियोग प्रस्ताव

South Korea Martial Law: यून की घोषणा के बाद गियर पहने सैनिक संसद भवन में घुस गए और सैन्य हेलीकॉप्टरों को छत पर उतरते हुए भी देखा गया। हजारों प्रदर्शनकारी नेशनल असेंबली के बाहर इकट्ठा हो गए। मार्शल लॉ केवल छह घंटे तक लागू रहा, क्योंकि संसद में विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति के आदेश को खारिज करने के लिए मतदान किया। बाद में, यून ने संसद के वोट को स्वीकार कर लिया और मार्शल लॉ हटा लिया

अपडेटेड Dec 04, 2024 पर 6:33 PM
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South Korea: राष्ट्रपति ने पत्नी को बचाने के लिए लगाया मार्शल लॉ? विपक्ष ने संसद में दायर किया महाभियोग प्रस्ताव

दक्षिण कोरिया में मंगलवार रात बड़ा जबरदस्त बवाल मच गया, जब राष्ट्रपति यून सुक येओल ने देश में "इमरजेंसी मार्शल लॉ" की घोषणा कर दी। हालांकि, इसके कुछ ही घंटों बाद उन्होंने यू-टर्न भी ले लिया। मंगलवार (3 दिसंबर) की रात, उन्होंने अचानक मार्शल लॉ की घोषणा की। 1980 के बाद ये पहला मौका था, जब दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ लगाने का ऐलान किया गया। राष्ट्रपति यून ने अपने फैसले के पीछे "राज्य विरोधी ताकतों" और नॉर्थ कोरिया से खतरे का हवाला दिया। उन्होंने विपक्षी दलों पर कम्युनिस्ट नॉर्थ कोरियाई ताकतों का समर्थन करके सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया।

यून की घोषणा के बाद गियर पहने सैनिक संसद भवन में घुस गए और सैन्य हेलीकॉप्टरों को छत पर उतरते हुए भी देखा गया। हजारों प्रदर्शनकारी नेशनल असेंबली के बाहर इकट्ठा हो गए। मार्शल लॉ केवल छह घंटे तक लागू रहा, क्योंकि संसद में विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति के आदेश को खारिज करने के लिए मतदान किया। बाद में, यून ने संसद के वोट को स्वीकार कर लिया और मार्शल लॉ हटा लिया।

अब विपक्षी दल राष्ट्रपति से इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने की मांग कर रहे हैं। बुधवार शाम हजारों प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे की मांग करते हुए, हाथों में तख्तियां लेकर देश की संसद तक मार्च करने के लिए सियोल के केंद्रीय चौराहे से निकले। इसी जगह पर विपक्ष की एक और रैली हो रही है। देश के विपक्षी दलों ने यून पर महाभियोग चलाने के लिए एक प्रस्ताव भी दायर कर दिया।


इस पूरे घटनाक्रम ने यून की राजनीतिक परेशानियां तो बढ़ा ही दी हैं, लेकिन उनकी पत्नी और फर्स्ट लेड किम केओन भी चर्चाओं में हैं, क्योंकि विपक्षी दलों का आरोप है कि राष्ट्रपति ने अपनी पत्नी के विवादों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह से मार्शल लॉ लगाने की घोषणा की थी।

तो चलिए सबसे पहले जानतें हैं कि फर्स्ट लेड किम केओन कौन हैं और फिर एक नजर उन विवादों पर भी डालेंगे, जो राष्ट्रपति की पत्नी से जुड़े हैं।

कौन हैं किम केओन ही?

दक्षिण कोरिया की फर्स्ट लेडी किम केओन ही एक आन्त्रप्रेन्योर हैं, जिन्होंने 2007 में कलचरल कंटेंट कंपनी कोवाना कंटेंट्स शुरू की थी।

किम ने 2015 में डोंगा बिजनेस रिव्यू के साथ अपने कारोबार के बारे में बात करते हुए कहा, “मुझे बचपन से ही कला में रुचि थी। मेरे मन में स्वाभाविक रूप से एक ऐसा बिजनेस शुरू करने की इच्छा पैदा हुई, जो कला के मूल्य को फैला सके।”

द स्ट्रेट्स टाइम्स के अनुसार, उनकी कंपनी आर्ट एग्जीबिशन लगाती है और अल्बर्टो जियाओमेट्टी, मार्क चागल और मार्क रोथको जैसे कई बड़े नामों के लिए एग्जीबिशन की मेजबानी कर चुकी है।

किम ने मार्च 2012 में यून से शादी की। वह मई 2022 में फर्स्ट लेडी बनीं जब उनके पति ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला। पशु अधिकारों की समर्थक, किम ने दक्षिण कोरिया में कुत्ते का मांस खाने पर रोक लगाने पर जोर दिया।

किम केओन ही का कई विवादों से नाता

किम के कई विवाद और घोटाले उनके और उनके पति की परेशान का सबब बनते आएं हैं। फर्स्ट लेडी को अक्सर "Kim Keon-hee risk" के नाम से भी जाना जाता है, जिसका मतलब है कि वह अपने पति की राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

उनसे जुड़ा एक बड़ा विवाद ऐसा था, जिसने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतराष्ट्रीय सुर्खियां भी बटोरीं... ये विवाद एक लग्जरी हैंडबैग को लेकर था। सितंबर 2022 में, कोरियाई-अमेरिकी पादरी चोई जे-यंग ने गुपचुप तरीके से किम की एक वीडियो बना ली थी, जिसमें उन्हें 3 मिलियन वोन यानी करीब एक लाख 80 हजार रुपए का क्रिश्चियन डायर बैग लेते हुए दिखाया था, वो भी गिफ्ट के तौर पर।

पिछले नवंबर में एक वामपंथी यूट्यूब चैनल वॉयस ऑफ सियोल ने इस सीक्रेट फुटेज को वायरल कर दिया, जिसके बाद जनता के बीच आक्रोश फैलाया था।

"डायर बैग स्कैंडल" ने किम को सुर्खियों में ला दिया, क्योंकि दक्षिण कोरिया के भ्रष्टाचार विरोधी कानून के तहत पब्लिक ऑफिसर और उनके जीवनसाथी 750 डॉलर यानि 63,000 रुपए से ज्यादा कीमत के गिफ्ट्स नहीं ले सकते हैं।

कोरिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिकस किम पर अपनी PhD के लिए थीसिस चुराने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, उनके अल्मा मेटर, कूकमिन यूनिवर्सिटी ने आठ महीने की जांच के बाद उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया।

किम के विवाद यहीं खत्म नहीं होते। ऐसे भी आरोप हैं कि उन्होंने और राष्ट्रपति यून ने 2022 में संसदीय उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों को चुनने के लिए सत्तारूढ़ पीपुल्स पावर पार्टी (PPP) पर गलत तरीके से प्रभाव डाला।

मेन स्ट्रीम मीडिया की एक जांच से पता चला कि किम ने एक राजनीतिक दलाल और एक मतदान एजेंसी के फाउंडर मायुंग ताए-क्युन के अनुरोध पर उम्मीदवारों की नामांकन प्रक्रिया में भी दखल दिया।

किम पर दक्षिण कोरियाई इंपोर्ट कंपनी डॉयचे मोटर्स से जुड़े स्टॉक मैनिपुलेशन यानी हेराफेरी का भी आरोप है। 2022 में यून के चुनाव से पहले, संसद ने इस मामले की स्पेशल प्रोसिक्यूटर से जांच कराने के लिए एक विधेयक भी पारित किया था, लेकिन यून ने वीटो कर दिया था।

7 नवंबर को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए, राष्ट्रपति यून ने स्वीकार किया था, "न तो मेरी पत्नी और न ही मैंने कोई गलत काम किया है"। फर्स्ट लेडी से जुड़े इन घोटालों के बीच, राष्ट्रपति यून की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 17 प्रतिशत से भी कम हो गई है।

फर्स्ट लेडी के कारण लगा मार्शल लॉ?

अब सवाल ये उठता है कि क्या दक्षिण कोरिया में लगाए कुछ घंटों के इस मार्शल लॉ के पीछे फर्स्ट लेडी थीं?

द चोसुन डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष ने यून पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि मार्शल लॉ लगाने का उनका फैसला राजनीति से प्रेरित था। उन्होंने राष्ट्रपति पर आरोप लगाया कि उन्होंने फर्स्ट लेडी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की स्पेशल प्रॉसिक्यूटर से जांच कराने की मांग से ध्यान हटाने के लिए ऐसा किया।

पिछले हफ्ते, यून ने तीसरी बार अपनी पत्नी से जुड़े स्टॉक-वैल्यू में हेराफेरी के आरोपों की स्पेशल प्रॉसिक्यूटर से जांच कराने की मांग करने वाले विधेयक को वीटो कर दिया।

संसद 10 दिसंबर को स्पेशल प्रॉसिक्यूटर बिल पर फिर से विचार करने वाली थी। दक्षिण कोरिया की संसद में विपक्ष का प्रभुत्व है। द चोसुन डेली की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रस्ताव दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सिफारिश करें कि मामले की जांच किस स्पेशल प्रॉसिक्यूटर से कराई जाए।

अगले हफ्ते दोबारा वोटिंग होनी है। विधेयक को लेकर सत्तारूढ़ PPP के भीतर भी असहमति है और ऐसी अटकलें हैं कि कुछ सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद प्रस्तावित कानून के पक्ष में मतदान कर सकते हैं।

एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने द चोसुन डेली को बताया, "रीवोटिंग से ठीक एक हफ्ते पहले अचानक मार्शल लॉ की घोषणा करना, निश्चित रूप से जनता का ध्यान फर्स्ट लेडी और उनके विवादों से भटकाने की कोशिश है।"

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