दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल ने महज 6 घंटे के अंदर मार्शल लॉ लागू करने के अपने आदेश को वापस ले लिया है। देश में भारी विरोध और लोगों के आक्रोश को देखते हुए राष्ट्रपति ने बुधवार सुबह (4 दिसंबर 2024) अपने आदेश को वापस ले लिया। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी ओर से अचानक की गई मार्शल लॉ की घोषणा अल्पकालिक थी। यह फैसला संसद के भारी विरोध और मतदान के बाद लिया गया। मतदान के दौरान 300 में से 190 सांसदों ने सर्वसम्मति से मार्शल लॉ को स्वीकार करने के लिए मना कर दिया।
दक्षिण कोरिया यह कई दशकों बाद सबसे बड़ा राजनीतिक संकट रहा। देश के नाराज सांसदों ने इस आदेश को सर्वसम्मति से संसद में खारिज कर दिया। न्यूज एजेंसी योनहाप ने कहा कि कैबिनेट ने मार्शल लॉ को खत्म करने के लिए बुधवार सुबह समहति जताई थी। नेशनल असेंबली के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए गए थे।
राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की तैयारी
इस कदम का पक्ष और विपक्ष दोनों के राजनेताओं ने विरोध जताया है, जिसमें यून की अपनी रूढ़िवादी पार्टी के नेता हान डोंग-हून भी शामिल हैं। हून ने इस निर्णय को ‘गलत’ बताया और ‘लोगों के साथ मिलकर इसे रोकने’ का संकल्प लिया। विपक्षी नेता ली जे-म्यांग ने यून की घोषणा को ‘अवैध और असंवैधानिक’ करार दिया। मार्शल लॉ के खिलाफ सरकार के ही मंत्रियों और विपक्ष की एकजुटता का असर यून पर भारी पड़ा। ऐसे में राष्ट्रपति ने मार्शल लॉ लगाने के 6 घंटे बाद ही इसे वापस ले लिया। हालांकि, इस बीच संसद के बाहर सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी भी इकट्ठा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति की गिरफ्तारी की मांग उठा दी। वहीं कुछ लोगों ने महाभियोग चलाने की मांग की है।
अमेरिका ने किया राष्ठ्रपति यून के फैसले का स्वागत
पूरे घटनाक्रम में अमेरिका भी नजर बनाए रहा। मार्शल लॉ लागू होने के बाद देश में हुए विरोध प्रदर्शनों को देखकर अमेरिका ने चिंता जताई थी। लेकिन राष्ट्रपति ने जैसे ही इसे वापस लिया तो यूएस ने इसका स्वागत किया। अमेरिका की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, “संयुक्त राज्य अमेरिका ने कोरिया गणराज्य में पिछले 24 घंटों में हुए घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। हम राष्ट्रपति यून के इस कदम का स्वागत करते हैं जिसमें उन्होंने मार्शल लॉ वापस लेने की बात कही है।
मार्शल लॉ किसी भी देश में सरकार की ओर से घोषित एक न्यायिक व्यवस्था होती है। इसमें सैन्य बलों को एक क्षेत्र पर शासन और नियंत्रण करने का अधिकार दिया जाता है। यह जरूरी नहीं होता कि मार्शल लॉ पूरे देश में ही लागू हो। इसे देश के किसी भी छोटे हिस्से में लगाया जा सकता है और इसे ही सैनिक कानून कहा जाता है।
कब लगाया जाता है मार्शल लॉ?
मार्शल लॉ आमतौर पर तब घोषित किया जाता है जब सरकार बड़े पैमाने पर अशांति, प्राकृतिक आपदाओं या आक्रमण के खतरों का सामना करती है। दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ को आखिरी बार 1980 में राजनीतिक उथल-पुथल के समय लागू किया गया था। उस समय ग्वांगजू विद्रोह हुआ था, जब सरकार को विरोध का सामना करना पड़ा था। देश के पास एक मजबूत कानूनी ढांचा और सैन्य तत्परता तो है ही, लेकिन मार्शल लॉ को हमेशा लास्ट ऑप्शन माना जाता है।