Sri Lanka Crisis: रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं श्रीलंका के राजनीतिक दल

Sri Lanka Crisis: श्रीलंका के राजनीतिक दल ऐसे राष्ट्रपति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसके पास समर्थन न हो और संसद में एक भी सांसद न हो

अपडेटेड Jul 10, 2022 पर 10:00 PM
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रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं श्रीलंका के राजनीतिक दल

Sri Lanka Crisis: श्रीलंका (Sri Lanks) 70 सालों में सबसे खराब आर्थिक संकट (Economic Crisis) का सामना कर रहा है। इसके कारण वहां राजनीतिक उथप-पथल भी जारी है। CNN-News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि श्रीलंका में राजनीतिक दल प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे (Ranil Wickremesinghe) को नए राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। इस बीच, शीर्ष सूत्रों ने कहा कि भारत स्थिति को करीब से देख रहा है और चाहता है कि "सिस्टम बरकरार रहे।"

2.2 करोड़ लोगों की आबादी वाला देश सात दशकों में सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की कमी है, जिससे देश ईंधन और दूसरी जरूरी चीजों के जरूरी आयात के लिए भुगतान कर पाने में असमर्थ हो गया है। इन हालात के बीच जनता सड़कों पर है।

राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के नेतृत्व वाली सरकार के इस्तीफे के लिए देश में गंभीर विरोध हुआ। राजपक्षे शुक्रवार को अपने सरकारी आवास से फरार हो गए।


श्रीलंका के संविधान के अनुसार, मौजूदा राष्ट्रपति के इस्तीफा देने के बाद प्रधान मंत्री खुद ब खुद ही राष्ट्रपति बन जाते हैं। सूत्रों ने कहा कि उनके महाभियोग पर गंभीर विचार चल रहा है।

प्रदर्शनकारियों का एक समूह शनिवार को विक्रमसिंघे के निजी आवास में खुस गया और उसमें आग लगा दी। इसके बाद उन्होंने सर्वदलीय सरकार के लिए रास्ता बनाने के लिए इस्तीफा देने की पेशकश की।

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प्रधानमंत्री के मीडिया विभाग ने कहा कि सर्वदलीय सरकार बनने और संसद में बहुमत हासिल होने के बाद विक्रमसिंघे इस्तीफा दे देंगे। उनके कार्यालय ने कहा कि विक्रमसिंघे तब तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे।

सूत्रों ने कहा कि राजनीतिक दल ऐसे राष्ट्रपति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसके पास समर्थन न हो और संसद में एक भी सांसद न हो।

इस बीच, भारत सरकार के शीर्ष सूत्रों ने कहा, "भारत सरकार वही चाहती है, जो उनके देश और श्रीलंका के लोगों के लिए अच्छा हो। भारत सरकार श्रीलंका के लोगों की किसी भी मदद और समर्थन के लिए हमेशा उपलब्ध है।"

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