Afghanistan: तालिबान ने महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगाई रोक, ड्राइविंग लाइसेंस न बनाने का जारी किया फरमान

Taliban ने एक नया फरमान जारी कर ड्राइविंग इंस्ट्रक्टर को कहा है कि वे महिलाओं के लिए लाइसेंस जारी न करें

अपडेटेड May 05, 2022 पर 12:05 PM
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अफगानिस्तान के कुछ बड़े शहरों में महिलाओं का गाड़ी चलाना पहले सामान्‍य बात हुआ करती थी

अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान (Taliban) के सत्ता में आने के बाद से ही महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। तालिबान ने एक बार फिर महिलाओं को लेकर एक नया फरमान जारी किया है। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, तालिबानी अधिकारियों ने अफगानिस्तान में महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस देने से इनकार कर दिया है। नए फरमान में उसने ड्राइविंग इंस्ट्रक्टर को कहा है कि वे महिलाओं के लिए लाइसेंस जारी न करें।

बता दें कि अफगानिस्तान बेहद रूढ़िवादी पुरुष प्रधान देश है। हालांकि, अफगानिस्तान के कुछ बड़े शहरों में महिलाओं का गाड़ी चलाना अब से पहले सामान्‍य बात हुआ करती थी। तालिबानी राज आने से पहले काबुल सहित अफगानिस्तान के कई बड़े शहरों में महिलाएं कार चलाती नजर आती थीं, लेकिन तालिबानी राज में इस पर पूरी तरह रोक लग गई है।

तालिबान अधिकारियों ने दिए निर्देश


हेरात के ट्रैफिक मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट के हेड जान आगा अचाकजइ ने एजेंसी को बताया कि हमें जबानी निर्देश दिए गए हैं कि महिलाओं के लिए लाइसेंस जारी करना बंद कर दिया जाए। एक मोटर ट्रेनिंग स्कूल चलाने वाली अदीला अदील ने कहा कि तालिबान चाहता है कि यहां कि अगली पीढ़ी को वो सारी सुविधाएं न मिलें जो कि उनके मां-बाप आज ले रहे हैं।

पिछले साल अफगानिस्तान पर कर लिया था कब्जा

उन्होंने कहा कि फरमान में कहा गया है कि महिलाओं को कार चलाना न सिखाएं और उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस भी न दिलवाएं। बता दें कि पिछले साल अगस्त में तालिबानियों ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। इससे पहले वे 1996 से 2001 तक भी अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज थे। तालिबानी शासन में मानवाधिकार उल्लंघन की खबरें आम बात हैं।

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तालिबानियों ने महिलाओं के शिक्षा और रोजगार के अधिकार पर भी हमला बोला है। ईद के मौके पर अपनी कार से बच्चों के लिए गिफ्ट लेने गईं शायमा वफा नाम की महिला ने कहा कि मैंने खुद तालिबानी गार्ड से कहा कि मुझे अपनी गाड़ी से जाना ज्यादा अच्छा लगता है और टैक्सी में ड्राइवर के बगल में बैठकर जाना ठीक नहीं लगता।

मानवाधिकार की स्थिति बेहद खराब

हालांकि, इस मामले में आंचलिक सूचना एवं संस्कृति विभाग के हेड नईम अल हक हक्कानी ने कहा कि इस बारे में कोई भी आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से अफगानिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति और खराब हो गई है।

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