Tiger Global stops investment in China: टाइगर ग्लोबल ने चाइनीज कंपनियों के शेयरों में निवेश पर रोक लगाई, India में बढ़ा सकती है इनवेस्टमेंट

टाइगर ग्लोबल दुनिया की सबसे बड़ी इनवेस्टमेंट कंपनियों में से एक है। वह चीन में कई मसलों को लेकर तस्वीर साफ होने का इंतजार करना चाहती है। इनमें ग्रोथ को लेकर चीन सरकार की रणनीति और ताइवान को लेकर चीन की पॉलिसी शामिल है

अपडेटेड Nov 04, 2022 पर 10:23 AM
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Tiger Global इंडिया और साउथ पैसेफिक में निवेश के मौकों पर अपना फोकस बढ़ा रही है।

Tiger Global stops investment in China: टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट ने चीन की कंपनियों के शेयरों में निवेश पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसकी वजह चीन के राजनीतिक परिदृश्य में आया बदलाव है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पकड़ चीन की सत्ता पर पहले से ज्यादा बढ़ गई है। उनके तीसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने के बाद टाइगर ग्लोबल ने हालात का जायजा लिया। फिर, उसने चीन की कंपनियों के शेयरों में निवेश रोकने का फैसला किया। Wall Street Journal ने गुरुवार को यह खबर दी है।

टाइगर के एग्जिक्यूटिव्स ने कहा है कि जिनपिंग के फिर से राष्ट्रपति बनने और कम्युनिस्ट पार्टी की लीडरशिप में उनके टॉप पॉजिशन का असर पड़ेगा। हाल में पार्टी की हुई कांग्रेस में उनके वफादारों का दबदबा रहा। इससे जियोपॉलिटकल टेंशन बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि चीन की 'जीरो कोविड पॉलिसी' जारी रह सकती है। WSJ ने यह जानकारी दी है।

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टाइगर ग्लोबल दुनिया की सबसे बड़ी इनवेस्टमेंट कंपनियों में से एक है। वह चीन में कई मसलों को लेकर तस्वीर साफ होने का इंतजार करना चाहती है। इनमें ग्रोथ को लेकर चीन सरकार की रणनीति और ताइवान को लेकर चीन की पॉलिसी शामिल है। पिछले कुछ महीनों में चीन और ताइवान के बीच तनाव बहुत बढ़ा है। WSJ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मसलों पर तस्वीर साफ होने के बाद ही टाइगर ग्लोबल चाइनीज कंपनियों के शेयरों में निवेश करेगी।

WSJ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टाइगर ग्लोबल अब चीन की सिर्फ मुट्ठीभर कंपनियों में निवेश के बारे में सोच रही है। ये ऐसी कंपनियां हैं, जिनके बारे में उसे ज्यादा जानकारी है। वह इंडिया और साउथ पैसेफिक में निवेश के मौकों पर अपना फोकस बढ़ा रही है। इस बारे में रायटर्स के पूछे गए सवालों के जवाब टाइगर ग्लोबल ने नहीं दिए।

कम्युनिस्ट पार्टी के कांग्रेस के बाद नई पॉलिसी से संकेत मिलता है कि सरकार का झुकाव वामपंथी विचारधारा की ओर है। इस बात को लेकर तस्वीर साफ नहीं है कि सरकार पहले की तरह पूंजीवाद या फ्री-मार्केट फोर्सेज को बढ़ावा देगी या नहीं।

माना जा रहा है कि चीन की सरकार फिर से इकोनॉमी को लेकर अपनी पुरानी सोच पर अमल कर सकती है। वह कंजम्प्शन आधारित ग्रोथ पर फोकस कर सकती है। इससे इकोनॉमी में सुस्ती देखने को मिलेगी। एनालिस्ट्स का कहना है कि इस साल 5.5 फीसदी ग्रोथ के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल लगता है।

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