Inflation in Turkey: अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोप और इंडिया सहित कई देश इनफ्लेशन (Inflation) बढ़ने से बेहाल हैं। खासकर अमेरिका और इंग्लैंड पर तो मंदी (Recession) का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका में इनफ्लेशन 8 फीसदी से ज्यादा है। इंडिया में यह 7 फीसदी से ज्यादा है। तुर्की में यह 80 फीसदी से ऊपर पहुंच गया है। इससे वहां लोगों की मुश्किलों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
तुर्की में अक्टूबर में कंज्यूमर प्राइसेज में 85.51 फीसदी इजाफा हुआ। यह सितंबर के मुकाबले 3.54 फीसदी ज्यादा है। Turkish Statistical Institute ने यह बताया है। तुर्की में इनफ्लेशन 24 साल में सबसे ज्यादा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि असल इनफ्लेशन ऑफिशियल डेटा से ज्यादा है।
इंडेपेंडेंट इनफ्लेशन रिसर्च ग्रुप ने गुरुवार को कहा कि तुर्की में इनफ्लेशन रेट 185 फीसदी पहुंच गया है। खास बात यह है कि जहां अमेरिका, इंग्लैंड, इंडिया सहित ज्यादातर देशों में इनफ्लेशन बढ़ने की बड़ी वजह रूस-यूक्रेन की लड़ाई है, वही तुर्की में इसकी वजह सरकार की नीतियां हैं।
इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि तुर्की में इनफ्लेशन की मुख्य वजह प्रेसिडेंट Recep Tayyip Erdogans की यह सोच है कि इंटरेस्ट रेट ज्यादा होने से चीजों की कीमतें बढ़ जाती हैं। आम तौर पर इकोनॉमिस्ट्स यह मानते हैं कि इंटरेस्ट रेट बढ़ाने से इनेफ्लेशन को काबू में करने में मदद मिलती है।
यही वजह है कि जब दुनियाभर के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहे हैं, तब तुर्की का केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट घटा रहा है। पिछले महीने तुर्की के सेंट्रल बैंक ने लगातार तीसरी बार इंटरेस्ट रेट घटाया। उसने प्रेसिडेंट की आर्थिक नीति के हिसाब से इसे घटाकर 10.5 फीसदी कर दिया। तुर्की के राष्ट्रपति ने इंटरेस्ट रेट में आगे और कटौती करने का संकेत दिया है। इससे यह माना जा रहा है कि वहां इंटेरस्ट जल्द सिंगल डिजिट में आ सकता है।
तुर्की में कई चीजों की कीमतें पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो गई हैं। इससे वहां के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तुर्की पर सूखे की भी मार पड़ी है। इसका असर सप्लाई पर पड़ा है। कई जरूरी चीजों की सप्लाई काफी घट गई है।
अगले साल तुर्की में चुनाव होने वाले हैं। राष्ट्रपति Erdogan ने बुधवार को अपनी आर्थिक नीतियों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनका इकोनॉमिक मॉडल जो ग्रोथ, इनवेस्टमेंट, इंप्लॉयमेंट को बढ़ावा देता है, उसे दूसरे देश भी अपने यहां लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि में इनफ्लेशन और इंटरेस्ट रेट के बीच का जो संबंध समझ आता है, उसे संयुक्त राष्ट्र सहित दुनिया की कई एजेंसिया और संगठन मानते हैं।