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मुद्रास्फीति का असर

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 03, 2010 पर 3:31 PM
मुद्रास्फीति का असर

हर कोई जानता है कि मुद्रास्फीति बचत खा जाती है और लागत बढ़ा देती है। ज्यादातर लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि मुद्रास्फीति के खिलाफ खुद को कैसे सुरक्षित करें? इस आलेख में हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि क्यों बुद्धिमानी के साथ निवेश करने की जरूरत है अगर आप कड़ी मशक्कत नहीं करना चाहते और अब भी अपने जीवन स्तर को बनाए रखना चाहते हैं।

टैक्स के बाद, प्रतिफल की वास्तविक दर पर गौर करें
जब भी आप निवेश के किसी विकल्प पर विचार करें प्रतिफल की दर को वास्तविक स्वरूप में गणना करना नहीं भूलें। दूसरे शब्दों में, अपनी सम्मिश्र सालाना प्रतिफल दर (जो आपको मिलने की संभावना है) में से मुद्रास्फीति की सालाना दर को घटा दें।

उदाहरण के लिए, यदि आप बैंक के अगले पांच साल तक 11 फीसदी सालाना ब्याज वाले फिक्स्ड डिपाजिट पर विचार कर रहे हैं और इस अवधि में 7 फीसदी मुद्रास्फीति रहने की संभावना है।

इस निवेश के लिए आपकी वास्तविक सालाना सम्मिश्र प्रतिफल दर 4 फीसदी रही। अगर आपकी इस आय पर 30 फीसदी की दर से टैक्स लगा तो आपकी शुद्ध आय घटकर केवल 0.7 फीसदी रह गई। यह प्रतिफल उस 11 फीसदी के कहीं आसपास भी नहीं है, जो निवेश के समय दिखाई जा रही थी। इस हिसाब से आपका निवेश जहां का तहां ही रहा।

देखते हैं कि आपके 0.7 फीसदी प्रतिफल की दर में कैसे सुधार कर सकते हैं। अगर आप कुछ ज्यादा जोखिम लेने को तैयार हों तो इस धन को इनकम म्यूचुअल फंड में लगाएं, जिसमें डिवीडेंड निवेश योजना का विकल्प हो। इस तरह के निवेश से टैक्स के बाद 11 फीसदी यील्ड मिलने की संभावना है। (क्योंकि म्यूचुअल फंडों से डिवीडेंड आय कर योग्य नहीं है।) इससे कर चुकाने के बाद वास्तविक प्रतिफल दर 4 फीसदी रहेगी, जो बैंक के एफडी से मिलने वाली वास्तविक प्रतिफल दर 0.7 फीसदी के मुकाबले काफी ज्यादा होगी।

दस साल के नजरिए से अगर 10,000 रुपए बैंक डिपाजिट में लगाए जाएं तो (टैक्स व प्रतिफल की 0.4 फीसदी की वास्तविक दर से) यह रकम 10,722 रुपए हो जाएगी। दूसरी तरफ इतनी ही रकम इनकम म्यूचुअल फंड में लगाई जाए तो यह 38 फीसदी ज्यादा 14,802 रुपए हो जाती है। आपके निवेश में मामूली जोखिम है लेकिन उसकी क्षतिपूर्ति इस ज्यादा प्रतिफल से हो जाती है।

इस उदाहरण से पता चलता है कि मुद्रास्फीति और टैक्स किसी भी निवेश पर मुनाफे की गणना करते समय महत्वपूर्ण कारक है। आप निवेश के फैसले पर थोड़ा सा गौर करें तो आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार आ सकता है। 

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