Income Tax Saving: 31 मार्च आ रही है करीब, लास्ट मिनट पर टैक्स सेविंग के लिए इन ऑप्शंस की ले सकते हैं मदद

Income Tax Saving: पुरानी टैक्स व्यवस्था में कई तरह के टैक्स डिडक्शन का फायदा लेकर टैक्स देनदारी घटाई जा सकती है। वहीं नई आयकर व्यवस्था में करदाता को केवल गिने-चुने टैक्स डिडक्शंस का ही फायदा मिल रहा है। सेक्शन 80C का फायदा व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली के लिए रहता है।

अपडेटेड Mar 23, 2025 पर 4:43 PM
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अपनी बचत को मैक्सिमाइज करने और टैक्स देनदारी कम से कम रखने की चाहत रखने वाले करदाताओं को जल्द से जल्द कदम उठाने चाहिए।

Tax Saving: 31 मार्च 2025 नजदीक है। मार्च खत्म होने के साथ ही वित्त वर्ष 2024-25 भी खत्म हो जाएगा। ऐसे में अगर आपने इस वित्त वर्ष के लिए अभी तक टैक्स सेविंग नहीं की है तो 31 मार्च तक ऐसा कर सकते हैं। अपनी बचत को मैक्सिमाइज करने और टैक्स देनदारी कम से कम रखने की चाहत रखने वाले करदाताओं को जल्द से जल्द कदम उठाने चाहिए। आयकर कानून के नियमों के तहत पुरानी टैक्स व्यवस्था में कई तरह के टैक्स डिडक्शन (Tax Deduction) का फायदा लेकर टैक्स देनदारी घटाई जा सकती है। वहीं नई आयकर व्यवस्था में करदाता को केवल गिने-चुने टैक्स डिडक्शंस का ही फायदा मिल रहा है। लास्ट मिनट पर टैक्स सेविंग्स के लिए कुछ पॉपुलर विकल्पों को अपनाया जा सकता है।

सेक्शन 80C: PPF, NPS, NSC, टैक्स सेविंग FD जैसे विकल्प

जैसे कि सेक्शन 80C के तहत आने वाली स्कीम्स। ज्यादातर टैक्सपेयर्स सबसे पहले और सबसे ज्यादा इसी सेक्शन के तहत डिडक्शन क्लेम करते हैं। पुरानी आयकर व्यवस्था के तहत सेक्शन 80C के तहत एक टैक्सपेयर मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्‍स डिडक्शन क्‍लेम कर सकता है। इस सेक्शन का फायदा व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUFs) के लिए रहता है।


सेक्शन 80C के अंतर्गत जिन निवेश विकल्पों पर टैक्स डिडक्शन मिलता है, उनमें- जीवन बीमा प्रीमियम, ELSS, EPF कॉन्ट्रीब्‍यूशन, VPF कॉन्ट्रीब्‍यूशन, LIC के एन्युइटी प्लान में कॉन्ट्रीब्यूशन, NPS में निवेश, PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) में जमा, टैक्स सेवर FD में जमा, सुकन्या समृद्धि स्कीम में निवेश, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम में जमा, NSC में डिपॉजिट, Ulip, बच्चों की ट्यूशन फीस, नाबार्ड बॉन्ड, चुनिंदा इक्विटी शेयरों का सब्सक्रिप्शन और होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट का रिपेमेंट शामिल है।

सेक्शन 80CCC

आयकर कानून का यह सेक्शन, LIC या किसी भी बीमा कंपनी के किसी भी एन्युइटी प्लान में इनवेस्टमेंट पर टैक्स डिडक्शन की पेशकश करता है। एन्युइटी का मतलब है पेंशन। इस डिडक्शन को क्लेम करने के लिए प्लान, पेंशन देने वाला होना चाहिए। एन्युइटी प्लान से हासिल होने वाली पेंशन या इस प्लान को सरेंडर किए जाने पर ब्याज सहित मिलने वाला कुल अमाउंट या बोनस इनकम टैक्स के दायरे में आते हैं।

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सेक्शन 80CCD

सेक्शन 80CCD (1): यह सब-सेक्शन केंद्र सरकार की पेंशन स्कीम के तहत पेंशन खाते में जमा पर टैक्स डिडक्शन की पेशकश करता है। सैलरीड एंप्लॉयी अपनी सैलरी का 10 प्रतिशत तक पेंशन अकाउंट में जमा कर डिडक्शन क्लेम कर सकता है, जो अधिकतम 1.5 लाख रुपये है।

याद रहे कि सेक्शन 80C, 80CCC और 80CCD (1) के तहत कुल मिलाकर 1.5 लाख रुपये से ज्यादा का ​टैक्स डिडक्शन क्लेम नहीं किया जा सकता है।

सेक्शन 80CCD (1B): इसके जरिए सैलरीड एंप्लॉयी अपनी तरफ से NPS अकाउंट में डिपॉजिट कर अतिरिक्त 50000 रुपये तक के टैक्स डिडक्शन का फायदा ले सकता है। NPS के मैच्योरिटी अमाउंट में से जो 60 प्रतिशत तक एकमुश्त मिलता है, वह टैक्स फ्री है लेकिन मंथली एन्युइटी इनकम टैक्सबेल है।

सेक्शन 80CCD (2): NPS में एंप्लॉयर के कॉन्ट्रीब्यूशन पर भी कर्मचारी सेक्शन 80CCD (2) के तहत टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता है। यह सैलरी के 10 प्रतिशत के बराबर होता है। 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी नई आयकर व्यवस्था के तहत सैलरीड कर्मचारी, अपने NPS खाते में एंप्लॉयर की ओर से किए जाने वाले योगदान पर सेक्शन 80CCD(2) के तहत टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता है।

सेक्शन 80D: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी

आयकर कानून के सेक्‍शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। टैक्सपेयर या HUF, सेक्‍शन 80D के तहत खुद के लिए, पति/पत्नी और निर्भर बच्चों के मेडिकल इंश्योरेंस समेत माता-पिता के मेडिकल इंश्योरेंस के लिए भरे जा रहे प्रीमियम पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। 60 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति या HUF खुद के लिए, पति/पत्नी और निर्भर बच्चों के हेल्थ इंश्योरेंस के लिए चुकाए गए प्रीमियम पर मैक्सिमम 25 हजार रुपये तक का डिडक्शन क्लेम कर सकता है। अगर टैक्सपेयर 60 साल या इससे ज्यादा का है, यानि सीनियर सिटीजन है तो डिडक्शन की लिमिट 50 हजार रुपये रहती है।

अगर 60 वर्ष से कम उम्र का टैक्सपेयर, अपने, जीवनसाथी व बच्चों के साथ 60 वर्ष से कम उम्र के माता-पिता के लिए भी मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम भर रहा है और/या मेडिकल खर्चों को उठा रहा है तो उसे 25 हजार रुपये के अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन का फायदा सेक्शन 80D में मिलता है। अगर माता-पिता 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं तो 50000 रुपये का अतिरिक्त डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।

अगर टैक्सपेयर और उसके माता-पिता दोनों की उम्र 60 वर्ष या उससे ज्यादा है और टैक्सपेयर एक पॉलिसी अपने, जीवनसाथी व बच्चों और दूसरी पॉलिसी अपने पेरेंट्स के लिए खरीदता है तो दोनों ही पॉलिसीज पर वह 50-50 हजार रुपये तक का डिडक्शन क्लेम कर सकता है। इसका मतलब हुआ कुल मिलाकर मैक्सिमम 1 लाख रुपये तक की टैक्स सेविंग। लेकिन हर मामले में शर्त यह है कि प्रीमियम का भुगतान कैश में न किया गया हो।

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लास्ट मिनट पर टैक्स सेविंग्स से जुड़े अहम टिप्स

  • जल्दी हो सकने वाले निवेशों को वरीयता दें।
  • इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल- ज्यादातर निवेश डिजिटली किए जा सकते हैं। इससे अंतिम समय में कागजी कार्रवाई से बचा जा सकता है।
  • एंप्लॉयर की ओर से मिल रहे बेनिफिट्स की जांच करें- पेरोल प्रोसेसिंग की डेडलाइन से पहले EPF, VPF और सैलरी ​रीस्ट्रक्चरिंग विकल्पों का अधिकतम फायदा उठाएं।
  • सुनिश्चित करें कि प्रीमियम पेमेंट अप टू डेट हैं- अगर सेक्शन 80D के तहत डिडक्शन क्लेम कर रहे हैं, तो वेरिफाइ करें कि हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान 31 मार्च से पहले किया गया हो।
  • जहां जरूरी हो, इनवेस्टमेंट प्रूफ जमा करें।

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