7वें वेतन आयोग में का कार्यकाल खत्म, इन 7 बदलावों का सैलरी-पेंशन पर हुआ सबसे अधिक असर

7वें वेतन आयोग का कार्यकाल खत्म हो गया है। पिछले 10 साल में बेसिक सैलरी, भत्तों, पेंशन, NPS और ग्रेच्युटी में बड़े बदलाव हुए। अब कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर 8वें वेतन आयोग पर टिकी है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Jan 03, 2026 पर 2:58 PM
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7वें वेतन आयोग में सबसे ज्यादा चर्चा 2.57 के फिटमेंट फैक्टर की हुई।

31 दिसंबर यानी आज 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के 10 साल पूरे हो गए। करीब 1.2 करोड़ केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए यह एक अहम मोड़ है। अब लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि पिछले 10 साल में उनकी सैलरी और पेंशन कैसे बदली और आगे 8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद की जा सकती है।

7वां वेतन आयोग जनवरी 2016 से लागू हुआ था। इन 10 सालों में इसी आयोग ने कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और रिटायरमेंट से जुड़े फायदे तय किए। आइए जानते हैं कि 7वें वेतन आयोग में हुए 7 सबसे अहम बदलाव।

1. बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल


7वें वेतन आयोग का सबसे साफ असर बेसिक सैलरी में दिखा। लेवल 1 के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई। यानी करीब 157 प्रतिशत की बढ़ोतरी। यह बढ़ोतरी 2.57 के फिटमेंट फैक्टर की वजह से हुई। वहीं सबसे ऊंचे लेवल 18 पर बेसिक सैलरी 90,000 रुपये से बढ़कर 2.5 लाख रुपये प्रति माह हो गई, यानी करीब 178 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

परंपरा के अनुसार, शुरुआत में महंगाई भत्ता यानी DA को शून्य कर दिया गया था। 10 साल बाद अब DA 58 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। हाल ही में इसमें 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो 7वें वेतन आयोग के तहत आखिरी DA बढ़ोतरी थी।

2. 2.57 का फिटमेंट फैक्टर क्यों इतना अहम रहा

7वें वेतन आयोग में सबसे ज्यादा चर्चा 2.57 के फिटमेंट फैक्टर की हुई। इसी फैक्टर से पुरानी सैलरी को नई पे मैट्रिक्स में बदला गया। आसान शब्दों में, पुरानी बेसिक सैलरी को 2.57 से गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की गई। इसी एक फैसले से हर लेवल पर सैलरी और पेंशन में बड़ा फर्क पड़ा।

भत्तों को जोड़ने के बाद कई कर्मचारियों की कुल आय में 10 साल में करीब 55 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई, खासकर नए और जूनियर कर्मचारियों के लिए।

3. भत्तों में सिर्फ बढ़ोतरी नहीं, बदलाव भी

7वें वेतन आयोग ने सिर्फ बेसिक सैलरी नहीं बढ़ाई। हाउस रेंट अलाउंस, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और कई खास भत्तों की पूरी समीक्षा की गई। कुछ भत्तों को जोड़ दिया गया, कुछ में बदलाव किया गया और कुछ पर सीमा तय कर दी गई।

इस वजह से कई कर्मचारियों की टेक होम सैलरी पोस्टिंग, विभाग और कैटेगरी के हिसाब से अलग अलग हो गई। यही कारण है कि कुछ लोगों को नई सैलरी स्ट्रक्चर पहले से काफी अलग लगी।

4. टैक्स फ्री ग्रेच्युटी बढ़कर 25 लाख रुपये

पिछले साल जब DA बेसिक सैलरी के 50 प्रतिशत तक पहुंचा, तो केंद्र सरकार ने टैक्स फ्री ग्रेच्युटी की सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी। यह बदलाव 1 जनवरी 2024 से लागू हुआ।

नियमों के मुताबिक, जब DA 50 प्रतिशत तक पहुंचता है, तो सभी भत्तों में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है।

5. नई पेंशन योजना UPS की शुरुआत

1 अप्रैल 2025 से केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS शुरू की। यह राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत एक वैकल्पिक रिटायरमेंट योजना है, जो करीब 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लाई गई। सशस्त्र बलों के कर्मचारी इसमें शामिल नहीं हैं।

UPS में NPS और पुरानी पेंशन योजना, दोनों की खूबियां जोड़ी गई हैं। इसमें महंगाई के हिसाब से तय मासिक पेंशन की गारंटी दी जाती है। उदाहरण के तौर पर, 10 साल की सेवा पर कम से कम 10,000 रुपये प्रति माह पेंशन की गारंटी है।

6. NPS में सरकार का योगदान बढ़ा

7वें वेतन आयोग के बाद 2019 से सरकार ने कर्मचारियों के NPS में अपना योगदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा कर्मचारियों को फंड मैनेजर और निवेश विकल्प चुनने की ज्यादा आजादी मिली।

सेक्शन 80C के तहत टियर II अकाउंट पर टैक्स बेनिफिट दिया गया और उम्र के हिसाब से निवेश बदलने वाले लाइफ साइकिल फंड्स भी शुरू किए गए। इन बदलावों से NPS ज्यादा आकर्षक बना।

7. अब आगे क्या: 8वां वेतन आयोग

7वें वेतन आयोग का कार्यकाल खत्म हो चुका है और अब ध्यान 8वें वेतन आयोग पर है, जिसका गठन हो चुका है। हालांकि, सैलरी में तुरंत बदलाव की उम्मीद नहीं है।

नए वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है। आमतौर पर किसी वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में 18 से 24 महीने लगते हैं। रिपोर्ट आने के बाद फैसला सरकार और बजट पर निर्भर करेगा। कई बार कर्मचारियों को फायदा पिछली तारीख से दिया जाता है।

सेवा में मौजूद कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग ने पूरे एक दशक तक सैलरी, भत्तों और प्रमोशन से जुड़ा ढांचा तय किया। पेंशनर्स के लिए इसने रिटायरमेंट के बाद की आमदनी और भविष्य की योजना को दिशा दी। भले ही इसका कार्यकाल आज खत्म हो गया हो, लेकिन इसका असर आगे आने वाले वेतन आयोगों में भी साफ दिखेगा।

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