8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च कर दी है। साथ ही स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा है। यानि कि इस वेतन आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया है। हालांकि इसे अपनी सिफारिशें जमा करने में अभी कुछ और महीने लग सकते हैं। लेकिन केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर चाहते हैं कि सिफारिशें जल्द लागू हों। सरकार से इसकी गुजारिश भी की जा रही है। 8वां केंद्रीय वेतन आयोग लागू होने पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन बढ़ जाएगी।
वैसे अभी यह पक्का नहीं है कि 8वां CPC रिवाइज्ड सैलरी तय करने के लिए 7वें पे कमीशन के फिटमेंट फैक्टर-बेस्ड तरीके को दोहराएगा या नहीं। लेकिन अगर 8वां CPC भी उसी फॉर्मूले पर चलता है तो 60% का महंगाई भत्ता, फिटमेंट फैक्टर कैलकुलेशन के लिए बेस बन सकता है।
श्रम ब्यूरो के मुताबिक, दिसंबर 2025 के लिए ऑल इंडिया CPI-IW इंडेक्स 148.2 पॉइंट्स रहा है। इसी आधार पर जनवरी से जून 2026 के लिए DA में 2% की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। इस बढ़ोतरी के बाद 7वें वेतन आयोग के तहत कुल DA 60.34% पर पहुंच जाएगा। DA हाई को यूनियन कैबिनेट से मार्च 2026 में मंजूरी मिलने की संभावना है। 7वें वेतन आयोग ने 1 जनवरी, 2016 को DA रेट को फिटमेंट कैलकुलेट करने के लिए बेस बनाया था।
7th CPC के तहत क्या रहा था फिटमेंट फैक्टर
7th CPC 1 जनवरी, 2016 से लागू किया गया था। फिटमेंट फैक्टर तय करते समय यह माना गया था कि 1 जनवरी, 2016 को DA की दर बेसिक सैलरी का 125% होगी। अगर 8th CPC में भी यही तरीका जारी रहता है तो 60% DA नए फिटमेंट फैक्टर को कैलकुलेट करने का बेस बन सकता है।7th CPC ने नए पे मैट्रिक्स के पहले लेवल के लिए शुरुआती पॉइंट ₹18,000 तय किया था। वहीं 6th CPC के तहत 01.01.2006 को लागू होने वाले पे बैंड क तहत शुरुआती सैलरी पॉइंट ₹7,000 था।
इस तरह 7th CPC द्वारा प्रस्तावित सैलरी का शुरुआती पॉइंट 01.01.2006 को लागू होने वाले रेट से 2.57 गुना ज्यादा था। इसके अलावा, 7th CPC ने सभी कर्मचारियों के लिए 2.57 के इस फिटमेंट फैक्टर को एक जैसा लागू करने की सिफारिश की थी।
कितना रह सकता है फिटमेंट फैक्टर
अगर 7वें वेतन आयोग की शुरुआत में किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 100 थी, तो आज पिछले 10 साल में हुई DA बढ़ोतरी जोड़ने के बाद सैलरी 160 के बराबर हो चुकी है। इस कैलकुलेशन से साफ होता है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर का न्यूनतम स्तर 1.60 होना ही चाहिए। लेकिन कई वजहें हैं जिनसे फाइनल फिटमेंट फैक्टर इससे ज्यादा हो सकता है। एक वजह यह है कि कोविड महामारी के दौरान 2020-21 में सरकार ने 18 महीनों तक तीन DA बढ़ोतरी रोक दी थी। इन बढ़ोतरी को बाद में कर्मचारियों को वापस नहीं दिया गया। अगर ये DA हाइक समय पर मिल जातीं, तो आज DA 60% से कहीं ज्यादा होता। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन और जानकार ऊंचे फिटमेंट फैक्टर की मजबूत मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा अगर मान लें कि 8वां वेतन आयोग जनवरी 2026 से प्रभावी है, तब भी इसकी सिफारिशें तुरंत लागू होना मुश्किल है। पिछले वेतन आयोगों के अनुभव बताते हैं कि रिपोर्ट तैयार होने और लागू होने में करीब 2 साल लगते हैं। 2 साल में DA कम से कम 4 बार और बढ़ सकता है।
फिटमेंट फैक्टर का फैसला और किन बातों पर होगा
महंगाई भत्ता यानी DA फिटमेंट फैक्टर का एक अहम आधार है, लेकिन यह अकेला फैसला नहीं करता। 8वां वेतन आयोग सरकार की वित्तीय स्थिति को भी देखेगा और यह आकलन करेगा कि खजाने पर कितना बोझ पड़ सकता है। इसके साथ ही अलग-अलग सेवाओं में वेतन संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ा फैक्टर होगा। कर्मचारियों की मांग और उनके मनोबल को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। वहीं, देश की आर्थिक ग्रोथ और आने वाले समय में महंगाई का रुझान भी अहम भूमिका निभाएगा। इन सभी पहलुओं को साथ रखकर ही फाइनल फिटमेंट फैक्टर तय किया जाएगा।