अडानी ग्रुप अगले 10 सालों में ग्रीन हाइड्रोजन में 50 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करेगा

अगले 10 सालों में अडानी ग्रुप ग्रीन हाइड्रोजन में 50 अरब डॉलर की योजना बना रहा है

अपडेटेड Jun 14, 2022 पर 1:00 PM
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फ्रांस की ऊर्जा सेक्टर की बड़ी कंपनी TotalEnergies से अडानी ग्रुप ने एक बड़ी साझेदारी की है

अडानी ग्रुप और फ्रांस की ऊर्जा सेक्टर की दिग्गज कंपनी टोटल एनर्जीज ने 'दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम' बनाने के लिए एक और साझेदारी की है। अडानी एंटरप्राइजेज ने इस रणनीतिक गठबंधन के बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को बताया कि TotalEnergies अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Ltd(AEL) से अडानी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Adani New Industries Ltd (ANIL) में 25% की हिस्सेदारी खरीदेगी।

अडानी न्यू इंडस्ट्रीज ने अगले दशक में ग्रीन हाइड्रोजन और संबंधित इकोसिस्टम के विकास के लिए $50 अरब से अधिक का निवेश करने की योजना बनाई है।

शुरुआती चरण में ANIL द्वारा 2030 से पहले हर साल दस लाख टन के ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता को विकसित किया जायेगा। ऐसे समय में जब देश अपनी 70 प्रतिशत से अधिक बिजली के लिए कोयले पर निर्भर है उस समय भारत को बिजली के लिए कोयले पर से निर्भरता दूर करने करने के लिए अडानी का प्रयास काफी महत्वपूर्ण है।


बता दें कि अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में लगातार तेजी ने गौतम अडानी को एशिया के सबसे अमीर लोगों की टॉप रैंक में पहुंचा दिया है।

इस डील पर जानकारी देते हुए अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा, "दुनिया में सबसे बड़ी ग्रीन हाइड्रोजन कंपनी बनाने के लिए हमने TotalEnergies के साथ साझेदारी की है। इसमें R&D, मार्केट की समझ और एंड यूजर की जरूरतों को समझते हुए हम आगे बढ़ेंगे।"

डील पर अडानी ने आगे कहा "दुनिया के सबसे कम खर्च में इलेक्ट्रॉन का उत्पादन करने की हमारी क्षमता है। हमारा ये विश्वास ही दुनिया के सबसे कम खर्चीले ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने की हमारी क्षमता का प्रदर्शन करेगा। इस साझेदारी से कारोबारी सेक्टर में कई और विकल्प खुलेंगे।"

बता दें कि इस साल फरवरी में बिजली मंत्रालय ने उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया पर नेशनल हाइड्रोजन मिशन पॉलिसी (National Hydrogen Mission policy) के पहले भाग को अधिसूचित किया था। ग्रीन हाइड्रोजन संभावित रूप से नेट जीरो इमीशंस इकोनॉमिज के लिए स्थायी ऊर्जा की ओर ग्लोबल ट्रांजिशन को बढ़ावा दे सकता सकता है।

वहीं इस पॉलिसी का दूसरा भाग अभी भी केंद्र सरकार द्वारा विचाराधीन है। कई निजी क्षेत्र की कंपनियों और यहां तक ​​कि राज्य द्वारा संचालित कंपनियों ने पहले से ही ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

 

 

 

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