क्रेडिट कार्ड होल्डर की डेथ के बाद क्या बैंक परिवार से वसूलते हैं बिल? जानिये RBI की गाइडलाइंस

कई बार समय पर क्रेडिट कार्ड बिल न चुकाने की वजह से भारी ब्याज और पेनल्टी लग जाती है। ऐसे में एक अहम सवाल उठता है कि अगर किसी क्रेडिट कार्ड होल्डर की मौत हो जाए और उसका बिल बाकी हो, तो क्या परिवार को वह रकम चुकानी पड़ेगी..

अपडेटेड Jan 16, 2026 पर 1:05 PM
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अगर किसी क्रेडिट कार्ड होल्डर की मौत हो जाए और उसका बिल बाकी हो, तो क्या परिवार को वह रकम चुकानी पड़ेगी?

Credit Card: आज के टाइम में क्रेडिट कार्ड आम जरूरत बन गया है। लोग इसका इस्तेमाल शॉपिंग, बिल पेमेंट और ऑनलाइन खर्चों के लिए करते हैं। लेकिन कई बार समय पर क्रेडिट कार्ड बिल न चुकाने की वजह से भारी ब्याज और पेनल्टी लग जाती है। ऐसे में एक अहम सवाल उठता है कि अगर किसी क्रेडिट कार्ड होल्डर की मौत हो जाए और उसका बिल बाकी हो, तो क्या परिवार को वह रकम चुकानी पड़ेगी?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि क्रेडिट कार्ड एक अनसिक्योर्ड लोन होता है। यानी इसके बदले कोई गारंटी या संपत्ति गिरवी नहीं रखी जाती। बैंक कार्ड जारी करते समय व्यक्ति की इनकम और क्रेडिट स्कोर देखते हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, इस तरह के लोन की जिम्मेदारी सिर्फ कार्डधारक की होती है। इसलिए कार्ड होल्डर की मौत के बाद बैंक परिवार के सदस्यों या वारिसों से उनकी निजी जेब से पैसा देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बकाया रकम अपने आप खत्म हो जाती है। बैंक मृतक की संपत्ति से पैसा वसूल सकता है। जैसेन बैंक अकाउंट में जमा पैसा, एफडी, शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना या प्रॉपर्टी। कानूनी तौर पर, वारिसों को संपत्ति मिलने से पहले बैंक को अपना बकाया निकालने का अधिकार होता है।


अगर किसी वारिस को संपत्ति मिलती है, तो बैंक उतनी ही रकम वसूल सकता है जितनी संपत्ति की कीमत है। उदाहरण के लिए, अगर किसी को 5 लाख रुपये की संपत्ति मिली है और क्रेडिट कार्ड का बकाया 7 लाख रुपये है, तो बैंक सिर्फ 5 लाख रुपये ही ले सकता है। बाकी 2 लाख रुपये बैंक को माफ करने पड़ते हैं। अगर मृतक के नाम कोई संपत्ति ही नहीं है, तो बैंक के पास वसूली का कोई रास्ता नहीं बचता और रकम को बैड डेब्ट या एनपीए मान लिया जाता है।

कुछ मामलों में नियम अलग होते हैं। अगर क्रेडिट कार्ड जॉइंट कार्ड है, तो जिंदा कार्ड होल्डर को पूरा बकाया चुकाना होगा। अगर कार्ड पर कोई गारंटर है, तो बैंक उससे पैसे मांग सकता है। परिवार को चाहिए कि कार्डधारक की मौत के बाद तुरंत बैंक को जानकारी दें। साथ ही डेथ सर्टिफिकेट जमा करें और कार्ड को ब्लॉक कराने की मांग करें, ताकि आगे ब्याज या चार्ज न बढ़े। अगर कोई रिकवरी एजेंट डराए या पर्सनल संपत्ति से पैसा मांगे, तो पुलिस में शिकायत या RBI ओम्बड्समैन से संपर्क किया जा सकता है। कुछ प्रीमियम क्रेडिट कार्ड में क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस भी होता है। दुर्घटना में मौत होने पर बीमा कंपनी तय सीमा तक बकाया चुका सकती है।

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