होम लोन लेने का प्लान बना रहे हैं? जानिए क्यों बैंक घटा सकता है आपका लोन अमाउंट

बैंक होम लोन देने के लिए ग्राहक की मंथली सैलरी सहित कई बातों पर ध्यान देते हैं। इंटरेस्ट रेट बढ़ने की वजह से अगर EMI बहुत बढ़ जाती है तो इससे बैंक आपको कम अमाउंट का लोन ऑफर करेगा। ऐसी स्थिति में आपको डाउनपेमेंट बढ़ाना होगा

अपडेटेड Feb 09, 2023 पर 4:21 PM
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मई 2022 से अब तक RBI ने रेपो रेट 2.50 फीसदी बढ़ा दिया है।

क्या आप होम लोन लेकर घर खरीदना चाहते हैं? आपको ज्यादा इंटरेस्ट पर होम लोन मिलेगा। RBI ने 8 फरवरी को रेपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ा दिया। इससे यह बढ़कर 6.5 फीसदी हो गया है। अगस्त 2018 के बाद रेपो रेट सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया है। मई 2022 से अब तक RBI ने रेपो रेट 2.50 फीसदी बढ़ा दिया है। होम लोन बढ़ने के अलावा एक दूसरी प्रॉब्लम भी है। अब आपको कितना लोन मिल सकता है? इसकी वजह यह है कि बैंक आपकी मंथली सैलरी के आधार पर लोन देते हैं। EMI बढ़ने से आपकी इनकम का एक बड़ा हिस्सा लोन चुकाने में खर्च हो जाता है।

बेसिक होम लोन के सीईओ और फाउंडर अतुल मोंगा ने कहा, "इंटरेस्ट रेट बढ़ने से EMI बढ़ जाता है। इससे व्यक्ति के लोन लेने की क्षमता घट जाती है।" अगर एक लाख रुपये मंथली सैलरी पर आप 57.82 लाख रुपये लोन ले सकते हैं तो इंटरेस्ट रेट 0.25 फीसदी बढ़ने पर आपको 55.57 लाख रुपये का होम लोन ही मिलेगा।

लोन का अमाउंट घटने की क्या वजह है?

मॉर्टगेजवर्ल्ड के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर विपुल पटेल ने कहा, "इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने से लोन लेने की क्षमता पर असर पड़ता है। अगर पहले आपको अपनी इनकम की 60 फीसदी वैल्यू जितनी EMI के लिए लोन मिल सकता था तो इंटरेस्ट रेट बढ़ने के बाद यह घट जाएगा। इसकी वजह यह है कि पहले प्रति लाख रुपये पर 650 रुपये की EMI आती थी। अब प्रति एक लाख रुपये पर 850 रुपये की EMI आएगी।"


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एलिजिबिलिटी रेशियो क्या है?

अगर होम लोन का इंटरेस्ट रेट 6.7 फीसदी से बढ़कर 9 फीसदी पर आ गया है तो होम लोन लेने की आपकी क्षमता पर इसका असर पड़ेगा। एंड्रोमेडा सेल्स एंड डिस्ट्रिब्यूशन के डायरेक्टर अरुण राममूर्ति ने कहा, "बैंक यह देखते हैं कि ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो एक सीमा से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए एक बैंक कह सकता है कि अगर सैलरी 40,000 रुपये है तो EMI 10,000 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसकी वजह यह है कि रेट बढ़ने से EMI बढ़ जाती है। इससे लोन का अमाउंट घट जाता है।"

आपके लिए क्या है रास्ता?

अगर आप लोन के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो आप डाउनपेमेंट 15 फीसदी की जगह 20 फीसदी कर सकते हैं। इससे आपकी EMI ज्यादा नहीं होगी। सैंक्टम वेल्थ के इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स के हेड अलख यादव ने कहा कि ग्राहक को ज्यादा अमाउंट का लोन लेने की जगह अपने इनवेस्टमेंट के कुछ हिस्से का इस्तेमाल करना चाहिए। दूसरा विकल्प यह है कि लोन के लिए ज्यादा अवधि का चुनाव किया जाए। इसे दो या चार साल बढ़ाया जा सकता है। पहले मैक्सिमम 25 साल के लिए बैंक लोन देते थे। अब वे 30 साल के लिए दे रहे हैं।

अपने क्रेडिट स्कोर का ध्यान रखें

न सिर्फ आपका होम लोन बल्कि जिस लोन का आप गारेंटर बनते हैं उसे भी आपकी लायबिलिटी मानी जाती है। राममूर्ति ने कहा कि अगर आप लोन के गारेंटर हैं तो डिफॉल्ट की स्थिति में लोन का बाकी पैसा चुकाने की जिम्मेदारी आपकी हो जाती है। इसलिए आपको किसी के लोन का गारेंटर बनने से पहले कई बार सोच लेना चाहिए।

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