Get App

अपनी संपत्ति की वसीयत बना रहे हैं? न करें ऐसी गलतिया, ताकि परिवार को न जाना पड़े अदालत

वसीयत लिखना उतना आसान नहीं जितना लगता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि बस कागज पर संपत्ति का बंटवारा लिख देना ही काफी है, लेकिन ऐसा नहीं है। हकीकत में थोड़ी सी लापरवाही जैसे एक सिग्नेचर की कमी, गवाहों की गलती या अस्पष्ट भाषा पूरी वसीयत को विवाद में बदल सकती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 28, 2025 पर 7:08 PM
अपनी संपत्ति की वसीयत बना रहे हैं? न करें ऐसी गलतिया, ताकि परिवार को न जाना पड़े अदालत
अक्सर लोग सोचते हैं कि बस कागज पर संपत्ति का बंटवारा लिख देना ही काफी है, लेकिन ऐसा नहीं है।

वसीयत लिखना उतना आसान नहीं जितना लगता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि बस कागज पर संपत्ति का बंटवारा लिख देना ही काफी है, लेकिन ऐसा नहीं है। हकीकत में थोड़ी सी लापरवाही जैसे एक सिग्नेचर की कमी, गवाहों की गलती या अस्पष्ट भाषा पूरी वसीयत को विवाद में बदल सकती है। नतीजा यह होता है कि परिवार को सालों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसलिए अगर आप अपनी संपत्ति की वसीयत बना रहे हैं, तो हर कानूनी प्रोसेस को समझकर ही कदम उठाएं, ताकि आपके जाने के बाद परिवार को परेशानी न झेलनी पड़े।

वसीयत बनाना अपनी संपत्ति की सही और शांतिपूर्ण बंटवारे की दिशा में अहम कदम होता है, लेकिन अगर इसमें छोटी-छोटी गलतियां हो जाएं, तो वही वसीयत विवाद और कोर्ट केस की वजह बन सकती है।

कानूनी एक्सपर्ट के अनुसार वसीयत को साफ और बिना किसी भ्रम वाले शब्दों में लिखा जाना चाहिए, और यह भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 63 के अनुसार तैयार होनी चाहिए। इसके तहत, वसीयत पर लिखने वाले व्यक्ति (Testator) को दो स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में हस्ताक्षर करने होते हैं और दोनों गवाहों को भी उस पर अपने हस्ताक्षर करने जरूरी हैं। अगर इनमें से कोई प्रक्रिया अधूरी रह जाए, तो वसीयत अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

वसीयत बनाते समय चिकित्सीय फिटनेस सर्टिफिकेट लेना और साइन करते समय एक छोटा वीडियो रिकॉर्ड करना यह साबित करने में मदद करता है कि वसीयत लिखने वाला व्यक्ति पूरी तरह होश में था और किसी दबाव में नहीं था।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें