रूस और श्रीलंका लोन का पेमेंट नहीं कर पा रहे हैं। इससे इंडिया में भी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में डर है। बैंकों में ट्रेड से जुड़े ट्राजेंक्शन में देरी हो रही है। इधर, भारत और रूस रुपया-रूबल में पेमेंट के लिए नए समझौते की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, इस समझौते पर हस्ताक्षर होने बाकी हैं। दरअसल, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे कई इंडियन बैंकों को भी दिक्कत आ रही है। इंडिया के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व में इन दिक्कतों को दूर करे की कोशिश हो रही है।
SBI ने मार्च में ग्राहकों को कहा था, "अमेरिका, यूरोपीय संघ या संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल संस्थाओं, बैंकों, बंदरगाहों या जहाजों से जुड़ा कोई भी लेनदेन, चाहे वह किसी भी मुद्रा में हो, उसे प्रोसेस नहीं किया जाएगा।"
कुछ बैंकरों का मानना है कि अगर पश्चिमी देश रूस के सभी ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ प्रतिबंध लगाते हैं तो स्थिति और खराब हो सकती है। भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिन्होंने रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को पूरी तरह से नहीं तोड़ा है।
Dhanlaxmi Bank के ट्रेजरी हेड RK Gurumurthy ने कहा, “अमेरिका और यूरोपीय प्रतिबंधों के कारण रूसी एसेट फ्रीज हो गए हैं। इससे भारत के ट्रेड से जुड़े ट्रांजेक्शन में देरी होगी। नॉन-डॉलर सेटलमेंट में ट्रेड को शिफ्ट करना आसान नहीं होगा। रूस में अमेरिकी और यूरोपीय बैंकों ने अपना कामकाज बंद कर दिया है। इसका मतलब है कि भारतीय आयातकों को अपने एलसी (letters of credit) ओपन करने या इसका कन्फर्मेशन प्राप्त करने में कठिनाई होगी।"
श्रीलंका संकट पर भी नजर बनाये हुए हैं बैंक (Eye on Lanka)
गुरुमूर्ति ने कहा कि श्रीलंका में हालात पर भी बैंकों की नजरें बनी हुई हैं। श्रीलंका अपने लोन चुकाने में असफल हो रहा है। उसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) और अन्य multilateral lending institutions से बेलआउट पैकेज मिलने का इंतजार है । हालांकि किसी भी आर्थिक मदद के साथ सख्त शर्तों जुड़ी होंगी।
Silicon Valley स्थित डिजिटल बैंकिंग एंड इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Aeldra के फाउंडर सुक्रीत शंकर ने कहा कि श्रीलंका के साथ भारत का व्यापार निकट भविष्य में प्रभावित होगा। लेकिन कुछ समय के बाद इसमें सुधार आ सकता है।
सीमा पार लेन-देन (Cross-border transactions)
बैंकरों ने कहा है कि सरकार और रेग्युलेटर को सीमा पार लेन-देन (cross-border transactions) में आसानी लाने के लिए रूस के साथ एक समझौता करना चाहिए।
बैंकरों ने कहा है कि सरकार और रेगुलेटर को सीमा पार लेन-देन (cross-border transactions) में आसानी के लिए रूस के साथ एक समझौता करना चाहिए। रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन (SWIFT) सिस्टम से रूस के बैंकों को बाहर करना भी शामिल है। स्विफ्ट इंटरनेशनल पेमेंट सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के बैंक आपसी लेनदेन के लिए करते हैं।
Aeldra के फाउंडर सुक्रीत शंकर ने कहा “SWIFT system इंटरनेशनल फंड ट्रांसफर्स का बैकबोन (आधार) बना हुआ है। किसी देश के लिए SWIFT नेटवर्क से बाहर होना बहुत नुकसानदायक है।