Income tax return: अगर 31 दिसंबर तक बिलेटेड और रिवाइज्ड रिटर्न फाइल नहीं किया तो क्या होगा?

Income tax return: एक्सपर्ट्स का कहना है कि 31 दिसंबर की डेडलाइन बीत जाने के बाद टैक्सपेयर्स के पास बिलेटेड रिटर्न फाइल करने का मौका नहीं होगा। इसका मतलब है कि उनकी कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ जाएगी। बिलेटेड रिटर्न फाइल नहीं करने पर ऑरिजिनल रिटर्न में गलती को ठीक करने का मौका हाथ से निकल जाएगा

अपडेटेड Dec 29, 2025 पर 4:56 PM
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रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने पर पेनाल्टी नहीं लगती है।

बिलेटेड रिटर्न और रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने के लिए सिर्फ 2 दिन बचे हैं। जो टैक्सपेयर्स किसी वजह से 16 सितंबर तक रिटर्न फाइल नहीं कर सके थे, वे 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। जिन टैक्सपेयर्स के ऑरिजिनल रिटर्न में कोई गलती थी, वे 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर उसे सुधार सकते हैं। सवाल है कि 31 दिसंबर तक बिलेटड रिटर्न और रिवाइज्ड रिटर्न फाइल नहीं करने पर क्या होगा?

31 दिसंबर के बाद क्या विकल्प होगा?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 31 दिसंबर की डेडलाइन बीत जाने के बाद टैक्सपेयर्स के पास Belated Return फाइल करने का मौका नहीं होगा। इसका मतलब है कि उनकी कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ जाएगी। इसी तरह टैक्सपेयर्स के पास अपने ऑरिजिनल रिटर्न में गलती को ठीक करने का मौका भी हाथ से निकल जाएगा। उसके बाद टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139(8ए) के तहत अपडेटेड रिटर्न फाइल करने का विकल्प बचेगा।


अपडेटेड रिटर्न का क्या मतलब है?

Income Tax Act के सेक्शन 139(8ए) के तहत अपडेटेड रिटर्न एसेसमेंट ईयर खत्म होने के 48 महीनों के अंदर फाइल किया जा सकता है। लेकिन, इसमें टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ सकता है। रिफंड में कमी आ सकती है या यह खत्म हो सकता है। कुछ अन्य बेनेफिट्स भी उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई टैक्सपेयर्स के लिए अपडेटेड रिटर्न फाइल करना काफी महंगा पड़ता है।

रिवाइज्ड रिटर्न किसे फाइल करना जरूरी है?

रिवाइज्ड रिटर्न उन टैक्सपेयर्स के लिए फाइल करना जरूरी है, जिन्हें पिछले महीनों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का इंटिमेशन मिला है। इसकी वजह टैक्सपेयर्स के आईटीआर और फॉर्म 16 के डेटा में मिसमैच है। कुछ मामलों में फॉर्म 16 में जो जो इनकम बताई गई है, वह एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट्स से अलग है। कुछ मामलों में टैक्सपेयर्स के ज्यादा डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस क्लेम करने के मामले मिले हैं। ऐसे सभी मामलों में टैक्सपेयर्स के पास 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर इन गलतियों को ठीक करने का मौका है।

रिवाइज्ड रिटर्न के फायदे

रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने पर पेनाल्टी नहीं लगती है। पेनाल्टी तभी लगती है जब टैक्सपेयर ने जानबूझकर गड़बड़ की है या फ्रॉड किया है। रिवाइज्ड रिटर्न में टैक्सपेयर ने ऑरिजिनल रिटर्न में जो लॉस डिक्लेयर किया होता है तो उसे कैरी फॉरवर्ड कर सकता है। रिफंड भी क्लेम या रेक्टिफाइ किया जा सकता है। हालांकि, यह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के वेरिफिकेशन और एसेसमेंट पर निर्भर करेगा।

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बिलेटेड रिटर्न कौन फाइल कर सकता है?

बिलेटेड रिटर्न ऐसे टैक्सपेयर्स फाइल कर सकते हैं, जो किसी वजह से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की तय तारीख तक रिटर्न फाइल करने से चूक गए। बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर तक फाइल किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए टैक्सपेयर को पेनाल्टी चुकानी पड़ती है। टैक्सपेयर की कुल इनकम 5 लाख से कम होने पर पेनाल्टी 1,000 रुपये लगती है। टोटल इनकम लाख से ज्यादा होने पर पेनाल्टी 5,000 रुपये लगती है। टैक्स पर इंटरेस्ट भी देना पड़ता है।

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