कई बार इनवेस्टर्स को शेयरों और डेरिवेटिव्स में लॉस होता है, जबकि म्यूचुअल फंड्स जैसे दूसरे इनवेस्टमेंट्स पर गेंस होता है। गाजियाबाद के राजेश सिंह का सवाल है कि क्या शेयरों से हुए लॉस को म्यूचुअल फंड्स से हुए गेंस के साथ एडजस्ट या सेट-ऑफ किया जा सकता है? उन्होंने बताया है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में अगर शेयर डेरिवेटिव्स पर उन्हें 5 लाख रुपये का लॉस होता है तो क्या म्यूचुअल फंड्स से हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के साथ इसे एडजस्ट किया जा सकता है? मनीकंट्रोल ने यह सवाल मशहूर टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा।
लॉस को गेंस के साथ एडजस्ट करने के नियम
जैन ने कहा कि Income Tax Act के तहत कुछ खास मामलों में लॉस को उसी (Same) हेड ऑफ इनकम के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है। अगर किसी खास हेड के तहत नेट रिजल्ट लॉस है तो उसे दूसरे हेड से हुए इनकम के साथ भी सेट-ऑफ किया जा सकता है। इसके लिए कुछ शर्तें हैं। एक रेगुलर बिजनेस लॉस को सैलरी से हुई इनकम को छोड़ किसी दूसरी इनकम के साथ उसी फाइनेंशियल ईयर में सेट-ऑफ किया जा सकता है।
स्पेकुलेटिव इनकम दूसरी इनकम के साथ सेट-ऑफ नहीं की जा सकती
उन्होंने कहा कि किसी अनअबजॉर्ब्ड स्पेकुलेटिव लॉस को दूसरी इनकम के साथ एडजस्ट नहीं किया जा सकता। इसे अगले चार एसेसमेंट ईयर तक कैरी-फॉरवर्ड करना होगा, जिस दौरान इसे सिर्फ स्पेकुलेटिव इनकम के साथ एडजस्ट किया जा सकता है। स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शंस उन्हें कहते हैं, जिसमें एक्चुअल डिलीवरी के बगैर कॉन्ट्रैक्ट सेटल होते हैं। हालांकि, डेरिवेटिव ट्रांजेक्शंस डिलीवरी के बगैर स्केवयर-ऑफ होते हैं, लेकिन उन्हें इनकम टैक्स एक्ट के तहत नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है। इस पर 'प्रॉफिट्स एंड गेंस ऑफ बिजनेस या प्रोफेशन' के तहत टैक्स लगता है।
शेयर ट्रांजेक्शंस पर कैपिटल गेंस हेड के तहत टैक्स
जैन ने कहा कि डेरिवेटिव ट्रांजेक्शंस से हुए किसी लॉस को कैपिटल गेंस के तहत हुई इनकम के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है। इसमें शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों कैपिटल गेंस शामिल हैं। शेयर ट्रांजेक्शंस पर आम तौर पर 'कैपिटल गेंस' हेड के तहत टैक्स लगता है। शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस दोनों के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को सिर्फ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है।
शेयरों से हुआ लॉस म्यूचुअल फंड्स के गेंस के साथ एडजस्ट हो सकता है
उन्होंने कहा कि इसलिए राजेश सिंह शेयरों से हुए अपने लॉस को म्यूचुअल फंड्स से हुए शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें यह देखना होगा कि शेयरों पर उन्हें शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस हुआ है या लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस हुआ है।
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