Budget 2025: मोदी सरकार बजट में लेबर कोड के नियम लागू करन का ऐलान कर सकती है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आने वाले बजट में लेबर कोड्स को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना की घोषणा कर सकती हैं। सूत्रों के अनुसार इन नए लेबर कोड्स को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। कर्मचारियों के काम घंटे बढ़ जाएंगे। साथ ही हफ्ते में 4 दिन काम करने का ऑप्शन मिलेगा। पीएफ में कटने वाला पैसा बढ़ जाएगा, तो हर महीने हाथ आने वाली सैलरी कम हो सकती है।
तीन चरणों में लागू हो सकता है लेबर कोड
लेबर कोड से छोटे और बड़े सभी कारोबार और कारोबारियों को नई नीतियों को लागू करने का समय मिलेगा। अगर सरकार बजट 2025 में इन कोड्स का ऐलान करती है, तो आने वाले फाइनेंशियल ईयर में इसे लागू किया जाएगा। इन कोड्स से न केवल कारोबारियों और कंपनियों को आसानी होगी, बल्कि कर्मचारियों को भी बेहतर सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।
पहले चरण में 500 से अधिक कर्मचारियों वाली बड़ी कंपनियों को इन कोड्स का पालन करना अनिवार्य होगा।
दूसरे चरण में 100-500 कर्मचारियों वाली मझोली कंपनियों को इसके दायरे में लाया जाएगा।
तीसरे चरण में 100 से कम कर्मचारियों वाली छोटी कंपनियों पर इन कोड्स को लागू किया जाएगा।
छोटे कारोबारियों को लागू करने के लिए कितना समय मिलेगा?
लेबर कोड के नए नियोमों और योजना के तहत, छोटे कारोबारियों को इन नियमों को लागू करने में लगभग दो साल का समय लगेगा। बता दें कि MSME यानी छोटी इंडस्ट्री भारत के कारोबारी स्ट्रक्चर का 85% से अधिक हिस्सा हैं।
राज्यों से लेबर कोड को लेकर हो रही है बातचीत
लेबर मंत्रालय इन कोड्स को लागू करने के लिए राज्यों से बातचीत कर रहा है। फिलहाल, मंत्रालय पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे राज्यों के साथ ड्राफ्ट रेगुलेशन को अंतिम रूप देने में जुटा है। सरकार पहले चरण में कोड ऑन वेजेस और सोशल सिक्योरिटी कोड को लागू करना चाहती है। मार्च 2025 तक सभी राज्यों के साथ ड्राफ्ट नियम तैयार होने की उम्मीद है।
भारत सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार लेबर कोड्स में कंसोलिडेट किया है। इनकाम मकसद कारोबारियों को अधिक मजबूत करना और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है।
ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड
हफ्ते में चार दिन काम और तीन दिन आराम – लेबर कोड के नियम
लेबर कोड्स में हफ्ते में चार दिन काम और तीन दिन आराम की नीति भी शामिल हो सकती है। इस नियम का मकसद कर्मचारियों के काम और जीवन में बैलेंस बनाना है। हालांकि, हफ्ते में चार दिन काम करने के नियम से काम के घंटे बढ़ जाएंगे। साथ ही प्रॉविडेंड फंड में कटने वाला पैसा बढ़ जाएगा। ऐसे में हाथ आने वाली सैलरी कम हो सकती है।