क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों को यूनियन बजट 2026 से काफी उम्मीदें हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2022 में क्रिप्टोकरेंसी में ट्रांजेक्शन पर टैक्स लगाने का ऐलान किया था। सरकार क्रिप्टोकरेंसी से हुए मुनाफे पर 30 फीसदी और ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी टीडीएस लगाया था। इसका असर इंडिया में क्रिप्टोकरेंसी के इनवेस्टर्स पर पड़ा था। कई इनवेस्टर्स ने इस टैक्स की वजह से ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था।
सरकार ने 2022 में क्रिप्टो पर लगाया था टैक्स
क्रिप्टोकरेंसी के इनवेस्टर्स को उम्मीद है कि सरकार टैक्स में राहत देगी। इसका ऐलान यूनियन बजट 2026 में हो सकता है। क्रिप्टो इनवेस्टर्स ने अपनी उम्मीदों के बारे में सरकार को बताया है। उनका मानना है कि अगर सरकार टैक्स के नियमों को आसान बनाती है और क्रिप्टो से हुए गेंस को सेट-ऑफ करने की इजाजत देती है तो इससे काफी राहत मिलेगी। क्रिप्टो इनवेस्टर्स को वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर सरकार की पॉलिसी का भी इंतजार है। इससे क्रिप्टो इनवेस्टर्स फिर से इंडियन एक्सचेंजों का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं। कंप्लायंस बढ़ सकता है। इससे डिजिटल एसेट सेक्टर की ग्रोथ को भी बढ़ावा मिलेगा।
टीडीएस में कमी चाहती है क्रिप्टो इंडस्ट्री
अभी क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े हर ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी TDS लागू होता है। इससे ट्रेडर्स की काफी पूंजी ब्लॉक हो जाती है। क्रिप्टो इंडस्ट्री की मांग है कि क्रिप्टोकरेंसी और वर्चु्अल डिजिटल एसेट्स पर टीडीएस को घटाकर 0.01 फीसदी किया जाए। वजीरएक्स के फाउंडर निश्चल शेट्टी ने कहा, "इंडस्ट्री ने टीडीएस घटाकर 0.01 फीसदी करने की मांग की है। इससे ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग में मदद मिलेगी साथ ही इंडिया में क्रिप्टो मार्केट की ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।"
हर ट्रांजेक्शन पर लगता है टीडीएस
सरकार ने यूनियन बजट 2022 में क्रिप्टो और वीडीए ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी टीडीएस का ऐलान किया था। यह फैसला 1 जुलाई, 2022 से लागू हो गया था। सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 194एस के तहत यह टीडीएस लगाया था। इससे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के हर बायर (खरीदार) को क्रिप्टो एक्सचेंज को 1 फीसदी टीडीएस चुकाना पड़ता है। एक्सचेंज यह पैसा सरकार के पास डिपॉजिट करते हैं।
क्रिप्टो से हुए मुनाफे पर एक समान 30 फीसदी टैक्स
सरकार ने 2022 में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से हुए प्रॉफिट पर एक समान 30 फीसदी टैक्स भी लगाया था। इससे क्रिप्टो से हुई इनकम लॉटरी और गैंबलिंग से हुई इनकम की कैटेगरी में आ गई थी। इसका मतलब है कि इनवेस्टर के क्रिप्टो में निवेश कम समय या ज्यादा समय तक बनाए रखने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। उसे गेंस पर 30 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे वीडीए से नेट रिटर्न घट जाता है। खासकर लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स को इससे नुकसान उठाना पड़ता है। शेयरों और म्यूचुअल फंड्स के लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स को टैक्स में राहत मिलती है।
लॉस-सेट ऑफ करने की इजाजत चाहती है इंडस्ट्री
क्रिप्टो इनवेस्टर्स ने सरकार से एक और मांग की है। उनका कहना है कि क्रिप्टो से हुए लॉस को सेट-ऑफ करने की इजाजत मिलनी चाहिए। इससे एक क्रिप्टो ट्रांजेक्शन से हुए लॉस को दूसरे क्रिप्टो ट्रांजेक्शन से हुए गेंस के साथ सेट-ऑफ किया जा सकेगा। अभी डिजिटल एसेट्स से हुए लॉस को किसी दूसरे एसेट्स से हुए गेंस के साथ सेट-ऑफ करने की इजाजत नहीं है।