Budget 2026 Expectations: बजट 2026 से पहले देश के अलग-अलग सेक्टरों ने सरकार से अपनी मांगें साफ तौर पर रख दी हैं। बढ़ती उम्र की आबादी, हेल्थकेयर खर्च, प्रदूषण, रोजगार और टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था के बीच इंडस्ट्री चाहती है कि यह बजट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने वाले फैसले करे। आयुष, ई-मोबिलिटी, बैटरी, स्टार्टअप, HR और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे सेक्टरों ने सरकार से नीतिगत सुधारों की उम्मीद की है।
आयुष और आयुर्वेद सेक्टर का मानना है कि देश में इलाज से ज्यादा जरूरी बीमारी की रोकथाम है। जीवा आयुर्वेद के फाउंडर डॉ प्रताप चौहान ने कहा कि देश में हेल्थकेयर पर सरकारी खर्च सीमित है। आयुष और आयुर्वेद जैसी प्रणालियां किफायती प्रिवेंटिव हेल्थकेयर दे सकती हैं। अगर बजट 2026 में AYUSH मंत्रालय के लिए रिसर्च, डिजिटल हेल्थ, टेली-आयुष और स्टार्टअप्स पर निवेश बढ़ाया जाता है, तो लंबे समय में हेल्थकेयर खर्च 30–40% तक कम किया जा सकता है।
ई-मोबिलिटी और क्लीन ट्रांसपोर्ट
शहरों में बढ़ता प्रदूषण और ट्रैफिक बड़ी समस्या बन चुका है। Yulu के इकोसिस्टम पार्टनरशीप के को-फाउंडर आरके मिश्रा ने कहा कि अब तक EV पॉलिसी का फोकस पर्सनल गाड़ियों पर रहा है। जबकि शेयर्ड और लो-स्पीड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स प्रदूषण और जाम दोनों को कम कर सकते हैं। बजट 2026 में GST को सरल किया जाए और इन व्हीकल्स को सब्सिडी के दायरे में लाया जाए, ताकि क्लीन मोबिलिटी आम लोगों तक पहुंचे।
बैटरी, स्वैपिंग और एनर्जी स्टोरेज
EV को सस्ता बनाने में बैटरी सबसे बड़ा फैक्टर है। Yuma Energy के एमडी मुथु सुब्रमण्यम ने कहा कि बैटरी की लागत और उपलब्धता EV अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट है। बजट 2026 में घरेलू बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग, GST रेशनलाइजेशन और बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट मिलना चाहिए। इससे दोपहिया और तिपहिया EV तेजी से अपनाए जा सकेंगे।
एडवांस बैटरी और मेक इन इंडिया
Trontek Electronics Ltd के सीईओ सम्रथ एस कोचर ने कहा कि बजट 2026 में एडवांस बैटरी टेक्नोलॉजी, R&D और रीसाइक्लिंग पर फोकस जरूरी है। अगर लोकल मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत किया गया, तो भारत ग्लोबल बैटरी हब बन सकता है।
स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी और स्किल्स
Wissen Technology के सीईओ और फाउंडर रघु पारेड्डी ने कहा कि AI, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए टैक्स और ESOP सुधार जरूरी हैं। बजट 2026 में टेक्नोलॉजी को कोर इकनॉमिक ड्राइवर की तरह ट्रीट किया जाना चाहिए।
AscentHR Technologies के सीईओ सुब्रमण्यम एस के मुताबिक भारत में समस्या नौकरियों की नहीं, बल्कि मुश्किल कम्प्लायंस की है। अगर बजट में लेबर कोड्स को डिजिटल और सरल बनाया जाता है, तो हायरिंग अपने-आप बढ़ेगी।
क्रिटिकल मिनरल्स और माइनिंग
Deccan Gold Mines Ltd के एमडी और सीईओ डॉ हनुमा प्रसाद मोदाली के मुताबिक अगर भारत को आत्मनिर्भर बनना है, तो माइनिंग प्रोजेक्ट्स के लिए तेज मंजूरी, डिजिटल लैंड बैंक और आयात शुल्क में राहत जरूरी है। बजट 2026 में नीतियों को कागज से जमीन पर लाने की जरूरत है। कुल मिलाकर अलग-अलग इंडस्ट्री के लोग यही चाहते हैं कि बजट 2026 लंबे पीरियड की सोच के साथ आए।