सरकार ने बजट 2026 में स्मॉल टैक्सपेयर्स के लिए कंप्लायंस को आसान बनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत लोअर या निल टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) सर्टिफिकेट्स हासिल करने के प्रोसेस को आसान और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने का प्रस्ताव है।
सरकार ने बजट 2026 में स्मॉल टैक्सपेयर्स के लिए कंप्लायंस को आसान बनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत लोअर या निल टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) सर्टिफिकेट्स हासिल करने के प्रोसेस को आसान और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने का प्रस्ताव है।
इस प्रस्ताव से ऐसे फ्रीलासंर्स, प्रोफेशनल्स, कंसल्टेंट्स और दूसरे टैक्सपेयर्स को फायदा होगा, जिन्हें कम टैक्स लायबिलिटी होने के बावजूद ज्यादा टीडीएस डिडक्शंस का सामना करना पड़ता है। बाद में उन्हें अपने प्रोफेशनल या बिजनेस रिसीट्स से काटे गए ज्यादा टीडीएस के रिफंड के लिए क्लेम करना पड़ता है।
इनकम टैक्स के मौजूदा नियम में जब कभी कोई व्यक्ति प्रोफेशनल फीस या कंसल्टेंसी चार्जेज जैसे खास पेमेंट करता है तो 10 फीसदी तय रेट से टीडीएस कटता है। हालांकि, कई मामलों में पैसा पाने वाले (recipient) की असल टैक्स लायबिलिटी काफी कम होती है। कई बार तो यह टोटल रिसीट्स का सिर्फ 2-3 फीसदी होती है। इससे ज्यादा टैक्स काट लिया जाता है और टैक्सपेयर को रिफंड के लिए इंतजार करना पड़ता है। इनकम टैक्स रिफंड फाइल करने के बाद रिफंड मिलता है। इस बीच उसके कैस फ्लो पर असर पड़ता है।
इस प्रॉब्लम के समाधान के लिए इनकम टैक्स कानून में टैक्सपेयर्स को लोअर या निल टीडीएस सर्टिफिकेट्स के लिए अप्लाई करने की इजाजत दी गई है। इससे पेमेंट करने वाले व्यक्ति कम रेट से टैक्स काटता है। अभी इस अप्लिकेशन को एसेसिंगक अफसर के पास सब्मिट करना पड़ता है। इसके लिए मैनुअल और ऑफिस आधारित प्रोसेस है। यह छोटे और बड़े टैक्सपेयर्स के लिए एक जैसा है। इस प्रोसेस में काफी समय लग जाता है और प्रोफेशनल मदद की भी जरूरत पड़ती है।
बजट 2026 में क्या प्रस्ताव पेश किया गया है?
छोटे टैक्सपेयर्स को आने वाली दिक्कत को ध्यान में रख वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में एक बड़े रिफॉर्म का ऐलान किया:
"मैं स्मॉल टैक्सपेयर्स के लिए एक स्कीम का प्रस्ताव पेश करती हूं, जिसमें लो्अर या निल डिडक्शन सर्टिफिकेट हासिल करने के वास्ते एसेसिंग अफसर के पास अप्लिकेशन फाइल करने की जगह नियम-आधारित ऑटोमेटेड प्रोसेस शुरू होगा।"
इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत:
-स्मॉल टैक्सपेयर्स इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अप्लाई कर सकेंगे
-अप्लिकेशन की प्रोसेसिंग नियम-आधारित और ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए होगी
-एक नई निर्धारित इनकम टैक्स अथॉरिटी इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन के आधार पर सर्टिफिकेट्स इश्यू करेगी या रिजेक्ट करेगी
फाइनेंस बिल, 2026 में इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 395 में संशोधन का प्रस्ताव है। इससे लोअर या निल टीडीएस सर्टिफिकेट्स के लिए निर्धारित इनकम टैक्स अथॉरिटी के पास अप्लाई करने की इजाजत मिल जाएगी। इसे बाद में नोटिफाय किया जाएगा।
एक बार सर्टिफिकेट इश्यू हो जाने के बाद पेमेंट करने वाले व्यक्ति को सर्टिफिकेट में निर्धारित रेट से कोई टैक्स डिडक्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
टैक्स डिपार्टमेंट का स्पष्टीकरण
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज की तरफ से इश्यू किए गए एफएक्यू के मुताबिक, सिस्टम को आसान बनाने का मकसद खासकर स्मॉल टैक्सपेयर्स पर कंप्लायंस का बोझ कम करना है। बोर्ड निम्निलिखित को नोटिफाय करेगा:
-टैक्सपेयर्स की एलिजिबल कैटेगरीज
-निर्धारित अथॉरिटी
-लागू होने वाली शर्तें और प्रोसिजर्स
टैक्सपेयर्स के पास एसेसिंग अफसर के पास अप्लाई करने या इलेक्ट्रॉनिक रूट से अप्लाई करने का ऑप्शन होगा--लेकिन दोनों ऑप्शन नहीं होगा।
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फाइनेंस बिल पारित होने के बाद प्रस्तावित संशोधन 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो जाएंगे और जरूरी फॉर्म्स और नियम नोटिफाय किए जाएंगे। इस रिफॉर्म से उम्मीद है:
-स्मॉल टैक्सपेयर्स का कैश फ्लो बढ़ेगा
-रिफंड्स पर निर्भरता घटेगी
-मानवीय हस्तक्षेप और डिस्क्रेशनरी एप्रूवल में कमी आएगी
-ट्रस्ट आधारित और टेक्नोलॉजी आधार टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को मजबूती मिलेगी
(लेखक सीए हैं। वह पर्सनल फाइनेंस खास तौर पर इनकम टैक्स से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हैं )
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