Budget 2026: नई रीजीम को और अट्रैक्टिव बनाने के लिए बजट में होंगे बड़े ऐलान
कौन सी रीजीम ज्यादा फायदेमंद है, पूरी तरह से करदाता की व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है। यदि करदाता के पास बहुत कम कटौतियां हैं या वह सरल और बिना दस्तावेजों वाली टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया पसंद करते हैं, तो नई रीजीम अधिक फायदेमंद हो सकती है
नई टैक्स रीजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की कर योग्य आय पर टैक्स शून्य है।
सरकार लगातार नई टैक्स रीजीम को पुरानी रीजीम के मुकाबले आकर्षक बनाने की कोशिश कर रही है। इसे सरल, कंप्लायंस में आसान और टैक्सपेयर्स के लिए डिफॉल्ट विकल्प के रूप में पेश किया गया है। केंद्रीय बजट 2025 में किए गए बदलावों से यह व्यवस्था खास तौर पर मध्यम वर्ग के लिए अधिक लाभकारी हो गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मध्यम वर्ग को देश निर्माण में उनके योगदान, ऊर्जा और भूमिका के लिए सराहा है। सीबीडीटी द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जारी जानकारी के अनुसार, अब तक प्रत्यक्ष कर संग्रह में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह व्यक्तिगत करदाताओं के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
बजट के दौरान जिन प्रमुख उद्देश्यों पर जोर दिया गया, उनमें ‘व्यक्तिगत आयकर सुधार, विशेष रूप से मध्यम वर्ग पर फोकस’ शामिल था। इसी दिशा में सरकार समय-समय पर नई टैक्स रीजीम के तहत टैक्स स्लैब में प्रगतिशील बदलाव कर मध्यम वर्ग पर टैक्स बोझ कम करती रही है।
नई टैक्स रीजीम और पुरानी रीजीम की तुलना
• अधिक टैक्स-फ्री सीमा: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नई टैक्स रीजीम के तहत धारा 87 ए के तहत बढ़ी हुई रिबेट के कारण 12 लाख रुपये तक की कर योग्य आय पर प्रभावी रूप से कोई टैक्स नहीं लगेगा। जबकि पुरानी रीजीम में यह सीमा केवल 5 लाख रुपये है।
• स्टैंडर्ड डिडक्शन: वेतनभोगी और पेंशनभोगी कर्मचारी 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन ले सकते हैं (जो पहले 50,000 रुपये था)। इससे उनकी आय नई टैक्स रीजीम में 12.75 लाख रुपये तक टैक्स-फ्री हो सकती है, जबकि पुरानी टैक्स रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन केवल 50,000 रुपये है।
• सरल स्लैब और कम दरें: नई रीजीम में पुरानी रीजीम की तुलना में अधिक रियायती टैक्स स्लैब और कम टैक्स दरें हैं, साथ ही अनुपालन के लिए कम कागजी कार्यवाही की जरूरत होती है।
• डिफॉल्ट विकल्प: नई टैक्स रीजीम करदाताओं के लिए डिफॉल्ट विकल्प है। यदि करदाता स्वयं आयकर रिटर्न भरते समय पुरानी रीजीम को नहीं चुनते हैं, तो स्वतः नई रीजीम लागू हो जाएगी।
कौन सी रीजीम ज्यादा फायदेमंद है?
यह सवाल कि कौन सी रीजीम ज्यादा फायदेमंद है, पूरी तरह से करदाता की व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है। यदि करदाता के पास बहुत कम कटौतियां हैं या वह सरल और बिना दस्तावेजों वाली टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया पसंद करते हैं, तो नई रीजीम अधिक फायदेमंद हो सकती है। वहीं, यदि किसी व्यक्ति के पास ऐसी योग्य कटौतियां हैं, जो कर योग्य आय को काफी हद तक कम कर सकती हैं, तो पुरानी रीजीम बेहतर हो सकती है। पुराने रीजीम में करदाता धारा 80 सी (निवेश), धारा 80 डी (स्वास्थ्य बीमा), एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) छूट, स्वयं-आवासित मकान पर होम लोन के ब्याज जैसी कई प्रकार की कटौतियों का लाभ ले सकते हैं। इसलिए सही फैसला लेने के लिए दोनों रीजीम के तहत अपनी आय और कटौतियों की तुलना करना जरूरी है।
नई टैक्स रीजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की कर योग्य आय पर टैक्स शून्य है। दूसरे शब्दों में, 10 लाख रुपये वार्षिक आय कमाने वाले व्यक्ति को पुरानी रेजीम के तहत लगभग 1.17 लाख रुपये टैक्स देना पड़ता, जबकि नई रीजीम में जाने पर उसकी मासिक टेक-होम सैलरी लगभग 10,000 रुपये तक बढ़ सकती है, बशर्ते कि कोई बड़ी कटौतियां (डिडक्शन) उपलब्ध न हों। 15,00,000 रुपये की कर योग्य आय पर नई रेजीम के तहत टैक्स देयता 1,09,200 रुपये आती है। पुरानी रीजीम में समान स्तर की टैक्स देयता प्राप्त करने के लिए कुल मिलाकर (स्टैंडर्ड डिडक्शन सहित) लगभग 5,37,500 रुपये तक की छूट/कटौतियों की जरूरत होगी।
यदि आपकी कुल छूट/कटौतियां 5,37,500 रुपये से कम हैं, तो नई टैक्स रीजीम अधिक लाभकारी होगा। लेकिन यदि छूट/कटौतियां 5,37,500 रुपये से अधिक हैं, तो पुरानी टैक्स रीजीम ज्यादा फायदेमंद रहेगी। नई टैक्स रेजीम ने मध्यम वर्ग के करों में काफी कमी की है और उनके हाथ में खपत, बचत और निवेश के लिए अधिक पैसा छोड़ा है। हालांकि, सबसे ज्यादा फायदेमंद रेजीम व्यक्ति की अपनी वित्तीय स्थिति और उपलब्ध कटौतियों पर ही निर्भर करता है।