वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम पेश की थी। उन्होंने पुरानी टैक्स रीजीम को भी बनाए रखी। इंडिविजुअल टैक्सपेयर के पास पुरानी रीजीम और नई रीजीम में किसी एक का चुनाव करने का विकल्प है। शुरुआत में नई रीजीम में टैक्सेपयर्स ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। लेकिन, अब बड़ी संख्या में इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी बड़ी वजह नई रीजीम का अट्रैक्शन बढ़ाने की सरकार की लगातार कोशिश है।
नई रीजीम में बढ़ रही टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स की नई रीजीम की शुरुआत से कंप्लायंस बढ़ा है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या बढ़कर 9 करोड़ से ज्यादा हो गई है। एसेसेमेंट ईयर 2024-25 में 5.2 करोड़ से ज्यादा रिटर्न इनकम टैक्स की नई रीजीम में फाइल किए गए। नई रीजीम में टैक्सपेयर्स को ज्यादातर एग्जेम्प्शंस और डिडक्शंस नहीं मिलते हैं। लेकिन, इसमें टैक्स के रेट्स कम हैं। यह उन इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए अच्छा है, जो डिडक्शंस और एग्जेम्प्शन का फायदा नहीं उठाते हैं।
नई रीजीम के टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े ऐलान
नई रीजीम का अट्रैक्शन बढ़ाने के लिए सरकार ने इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया। पुरानी रीजीम में 50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन है। स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों को मिलता है। यूनियन बजट 2025 में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सालाना 12 लााख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी। नौकरी करने वाले लोगों को अब सालाना 12.75 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है।
मिडिल क्लास को राहत से बढ़ेगा कंजमप्शन
एसेसमेंट ईयर 2023-24 में करीब 7.5 करोड़ इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स ने रिटर्न फाइल किए थे। इनमें से करीब 2.04 करोड़ की इनकम 5.5 लाख से 9.5 लाख रुपये के बीच थी। 62 लाख इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स की इनकम 10 लाख से 15 लाख रुपये के बीच थी। 24 लाख इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स की इनकम 15 लाख से 20 लाख के बीच थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सालाना 5.5 लाख से 20 लाख रुपये तक की इनकम वाले टैक्सपेयर्स की मिडिल क्लास में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। इसे राहत मिलने से कंजम्प्शन बढ़ेगा।
इस साल नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होगा
पिछले कुछ सालों से मिडिल क्लास पर खर्च का बोझ बढ़ा है। इसका असर सेविंग्स पर पड़ा है। हाउसहोल्ड सेविंग्स में कमी के संकेत हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार पहले ही सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर चुकी है। इससे बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को फायदा हुआ है। उनकी करीब सालाना 2 लाख करोड़ रुपये की सेविंग्स हो रही है। सरकार को बाकी मिडिलक्लास टैक्सपेयर्स को भी राहत देने की जरूरत है। इस साल से नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू हो जाएगा। इससे कंप्लायंस बढ़ने की उम्मीद है। इसमें इनकम टैक्स कानूनों की लैंग्वेज आसान बनाई गई है।
वित्तमंत्री कर सकती हैं राहत के ऐलान
एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण मिडिल क्लास को राहत देने के लिए कुछ और उपाय कर सकती हैं। वह टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन की इजाजत नई रीजीम में भी दे सकती हैं। इससे बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को फायदा होगा। साथ ही टैक्स स्लैब को इनफ्लेशन से भी लिंक किया जा सकता है। इससे महंगाई ज्यादा बढ़ने पर लोगों पर टैक्स का बोझ कम पड़ेगा। इससे बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स खासकर मिडिलक्लास को फायदा होगा।