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Budget 2026: लॉन्ग-टर्म सेविंग्स के लिए टैक्स छूट को नए सिरे से शुरू करने का वक्त, सेक्शन 80C के तहत बढ़े डिडक्शन लिमिट

Budget 2026: डिडक्शंस के अलावा एक्सपर्ट्स, निवेशकों का विश्वास फिर से जगाने के लिए कैपिटल गेन्स और ब्याज आय से जुड़े टैक्सेशन में सुधारों पर भी जोर दे रहे हैं। गोल्ड डिपॉजिट स्कीम्स जैसे नए सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट लाने की जरूरत बताई जा रही है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jan 30, 2026 पर 1:21 PM
Budget 2026: लॉन्ग-टर्म सेविंग्स के लिए टैक्स छूट को नए सिरे से शुरू करने का वक्त, सेक्शन 80C के तहत बढ़े डिडक्शन लिमिट
इस बात की काफी उम्मीद है कि बजट 2026 में सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन की लिमिट को बढ़ाया जा सकता है।

टैक्स एक्सपर्ट्स भारत के बजट से लॉन्ग-टर्म सेविंग्स इंसेंटिव्स को रीसेट करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि मौजूदा प्रावधान महंगाई, जीवन जीने की बढ़ती जीवन और रोजगार के बदलते पैटर्न के साथ तालमेल बिठाने में नाकाम रहे हैं। इसके अलावा यह भी मांग है कि इनकम-टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन की लिमिट को बढ़ाया जाए। अभी पुरानी आयकर ​व्यवस्था में इस सेक्शन के तहत एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक का टैक्स डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। यह लिमिट पिछले एक दशक से ज्यादा समय से अपरिवर्तित है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब यह सीमा मध्यम वर्ग के परिवारों की वित्तीय जरूरतों के अनुसार नहीं रह गई है।

इस बात की काफी उम्मीद है कि बजट 2026 में सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन की लिमिट को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही इसका फायदा नए टैक्स सिस्टम में भी दिया जा सकता है। टैक्स एक्सपर्ट एसआर पटनायक का मानना है कि लॉन्ग-टर्म सेविंग्स को ध्यान में रखते हुए सेक्शन 80C के लिए डिडक्शन बढ़ाया जाता है तो सभी आय समूहों में रिटायरमेंट की तैयारी को मजबूत किया जा सकता है।

कैपिटल गेन्स और ब्याज आय से जुड़े टैक्सेशन में सुधारों की भी जरूरत 

डिडक्शंस के अलावा एक्सपर्ट्स, निवेशकों का विश्वास फिर से जगाने के लिए कैपिटल गेन्स और ब्याज आय से जुड़े टैक्सेशन में सुधारों पर भी जोर दे रहे हैं। हरि रहेजा का तर्क है कि लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत, लंबी अवधि की एफडी के लिए तरजीही टैक्स ट्रीटमेंट, और टैक्स-मुक्त डिविडेंड को फिर से शुरू करने से वित्तीय बाजारों में भागीदारी को बढ़ावा मिल सकता है। गोल्ड डिपॉजिट स्कीम्स जैसे नए सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट लाने चाहिए। साथ ही घरेलू वेल्थ को प्रोडक्टिव एसेट्स में लगाने के लिए हाउसिंग में अधिक उदार रीइनवेस्टमेंट लिमिट्स की भी जरूरत है।

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