इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने फाइनेंस मिनिस्ट्री को यूनियन बजट को लेकर एक खास सलाह दी है। उसने पति-पत्नी को ज्वाइंट रिटर्न फाइल का ऑप्शन देने की सलाह दी है। अभी पति और पत्नी को अलग-अलग इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना पड़ता है। इनकम टैक्स की नई रीजीम में पति और पत्नी में से दोनों 4 लाख रुपये के बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन के हकदार होते हैं। नई रीजीम में दोनों में से प्रत्येक 2.5 लाख रुपये के बेसिक एग्जेम्प्शन के हकदार होते हैं।
ज्वाइंट टैक्सेशन की इजाजत से कई परिवारों पर घटेगा टैक्स
आईसीएआई का मानना है कि मौजूदा नियम उन परिवारों के लिए ठीक है, जिसमें पति और पत्नी दोनों कमाते हैं। लेकिन, इंडिया में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनमें परिवार पति की इनकम पर निर्भर है। इंस्टीट्यूट का कहना है कि मौजूदा नियम की वजह से कई परिवार पेपर पर इनकम दूसरे सदस्यों के नाम से दिखाते हैं। अगर सरकार पति और पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन की शुरुआत करती है तो ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कई देशों में पति और पत्नी को ज्वाइंट रिटर्न फाइलिंग की इजाजत
अमेरिका, जर्मनी और पुर्तगाल में पति और पत्नी को ज्वाइंटी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की इजाजत है। एनए शाह एसोसिएट्स के पार्टनर गोपाल बोहरा ने कहा, "अगर यूनियन बजट 2026 में सरकार ज्वाइंट टैक्सेशन की शुरुआत करती है तो इससे टैक्सपेयर्स को काफी फायदा होगा। पति और पत्नी के सिंगल रिटर्न फाइल करने से कंप्लायंस बढ़ेगा। खासकर ऐसे मामलों में मदद मिलेगी, जिसमें प्रॉपर्टी ज्वाइंट नाम से खरीदी जाती है, जबकि उसकी फंडिंग पति और पत्नी में से कोई एक करता है।"
ज्वाइंट रिटर्न फाइलिंग से ज्यादा इनकम पर भी टैक्स कम
अमेरिका में मैरिड फाइलिंग ज्वाइंटली (MFJ) सिस्टम लागू है। इसमें सिंगल रिटर्न फाइलिंग के मुकाबले ज्वाइंट टैक्स डबल है। इससे पति और पत्नी की ज्वाइंट इनकम की वजह से हायर टैक्स ब्रैकेट लागू नहीं होता है, जबकि सिर्फ पति या पत्नी की इनकम होने पर वह हायर टैक्स ब्रैकेट में आ जाती है। यूरोप के भी कई देशों में ज्वाइंट या फैमिली आधारित टैक्सेशन है। इससे परिवार पर टैक्स का बोझ कम पड़ता है।
टैक्सपेयर्स के लिए दोनों विकल्प खुला रखा जा सकता है
आईसीएआई ने अपने सुझाव में कहा है कि पति और पत्नी को वैलिड पैन के साथ ज्वाइंट रिटर्न फाइलिंग की इजाजत दी जा सकती है। इससे दोनों पर एकसाथ टैक्स लगाया जा सकता है। टैक्सपेयर्स के लिए यह विकल्प होना चाहिए कि अगर वह मौजूदा सिस्टम में रहना चाहता है तो रह सकता है। सुझाव में बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट भी दोगुना करने की बात कही गई है। इससे 8 लाख रुपये तक की सालाना इनकम वाले परिवार को टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं रह जाएगी। इनकम बढ़ने के साथ टैक्स भी बढ़ता जाएगा। ऐसे में 30 फीसदी टैक्स सालाना 48 लाख रुपये से ज्यादा की इनकम पर लगेगा।