यूनियन बजट 2026 पेश होने में एक हफ्ते से कम समय बचा है। मिडिल क्लास लोगों को यूनियन बजट में राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर वे 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे नए इनकम टैक्स एक्ट के बारे में स्पष्टीकरण चाहते हैं। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में एक बड़ा बदलाव यह है कि इसमें 'टैक्स ईयर' का इस्तेमाल किया गया है। इससे 'प्रिवियस ईयर' और 'एसेसमेंट ईयर' को लेकर अब टैक्सपेयर्स को कनफ्यूजन नहीं होगा।
इनकम टैक्स के नए कानून में डेटा आधारित कंप्लायंस पर होगा फोकस
सुदित के पारेख एंड कंपनी एलएलपी की पार्टनर अनीता बसरुर ने कहा कि रिवाइज्ड रिटर्न फॉर्म्स में अब एचआरए, होम लोन इंटरेस्ट और सेक्शन 80सी और सेक्शन 80डी के तहत डिडक्शंस के लिए स्पष्ट डिसक्लोजर जरूरी होगा। इनका फॉर्म 26एएस और एआईएस के डेटा के साथ मैच करना जरूरी होगा। यह इस बात का संकेत है कि डेटा आधारित कंप्लायंस फ्रेमवर्क पर फोकस बढ़ेगा।
स्टैंडर्ड डिडक्शन और होम लोन पर डिडक्शन लिमिट बढ़नी चाहिए
सैलरीड टैक्सपेयर्स को यूनियन बजट 2026 से कुछ खास उम्मीदें हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट साक्षी जैन ने कहा कि मिडिल क्लास को छोटे-छोटे बदलावों की जगह बड़ी राहत की जरूरत है। स्टैंडर्ड डिडक्शन ऐसी राहत है, जिसका फायदा तुरंत पता चलता है। उन्होंने कहा कि होम लोन के इंटरेस्ट पर डिडक्शन की 2 लाख रुपये की लिमिट में भी कई सालों से बदलाव नहीं हुआ है, जबकि प्रॉपर्टी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।
कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों को भी आसान बनाने की जरूरत
जैन ने कैपिटल गेंस पर टैक्स के नियमों में भी बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इसका करेंट स्ट्रक्चर जटिल है और होल्डिंग पीरियड और रेट्स को आसान बनाने की जरूरत है। उन्होंने टीडीएस की कई कैटेगरी और रेट्स को लेकर भी सवाल उठाए। खासकर उन मामलों में जिनमें ट्रांजेक्शंस पहले से जीएसटी के तहत आते हैं।
नए इनकम टैक्स कानून के बारे में जल्द स्पष्टीकरण आने चाहिए
चार्टर्ड अकाउंटेंट ईशा जायसवाल ने टैक्स सिस्टम पर ऑपरेशनल दबाव के बारे में बताते हुए कहा कि एपेलेट अथॉरिटीज के पास 5.49 लाख से ज्यादा अपली लंबित हैं। उन्होंने कहा कि नए कानून को लेकर चुनौती नहीं है बल्कि फॉर्म्स, फाइलिंग प्रोसिजर और इंप्लिमेंटेशन गाइडलाइंस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है जबकि नए कानून के लागू होने की तारीख नजदीक है।
नई रीजीम में भी कुछ खास डिडक्शन की इजाजत मिलनी चाहिए
सिंघानिया एंड कंपनी में पार्टनर रीतिका नैय्यर ने कहा, "मिडिल क्लास राहत के ठोस उपाय चाहता है। इनमें बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट में इजाफा, टैक्स स्लैब का विस्तार और ज्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल हैं।" उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स की नई रीजीम में कुछ खास डिडक्शन का फायदा देने से लोगों की खर्च करने योग्य इनकम बढ़ेगी। खासकर ऐसे वक्त लोगों को काफी राहत मिलेगी, जब कॉस्ट ऑफ लिविंग बढ़ रही है।
सेक्शन 87ए के तहत रिबेट को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार
मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजरें कैपिटल मार्केट से जुड़े टैक्स के नियमों पर लगी हैं। सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर कुणाल सवानी ने कहा कि टैक्सपेयर्स सेक्शन 87ए के तहत कैपिटल गेंस पर मिलने वाले रिबेट पर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे इनवेस्टर्स पर टैक्स का बोझ घटेगा। इससे कैपिटल मार्केट्स में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी।
नई रीजीम में स्लैब के विस्तार का हो सकता है ऐलान
सैलरीड टैक्सपेयर्स का फोकस टेक-होम सैलरी पर है। एकॉर्ड ज्यूरिस के मैनेजिंग पार्टनर अलय रिजवी ने कहा कि यूनियन बजट 2026 में इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के उपाय हो सकते हैं। इसके लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाया जा सकता है। स्लैब को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाई जा सकती है।