केंद्र सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च अगले वित्त वर्ष में 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रह सकता है। यह साल दर साल आधार पर 10 फीसदी ज्यादा होगा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी। इसमें वह बताएंगी कि सरकार अगले वित्त वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना खर्च करना चाहती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और लंबी अवधि की ग्रोथ पर सरकार का फोकस
एसबीआई की रिपोर्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के लगातार बढ़ते खर्च के बारे में बताया गया है। इससे पता चलता है कि सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर बनाने और लंबी अवधि में ग्रोथ को बढ़ावा देने पर बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है, "सरकार का पूंजीगत खर्च FY27 में 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रह सकता है। यह साल दर साल आधार पर करीब 10 फीसदी ज्यादा होगा।"
बीते एक दशक में काफी बढ़ा है सरकार का पूंजीगत खर्च
बीते एक दशक में सरकार का पूंजीगत खर्च काफी बढ़ा है। FY16 में यह 2.5 लाख करोड़ रुपये था। FY26 में यह 11.2 लाख करोड़ रुपये (बजट अनुमान) हो गया। कैपिटल एसेट्स क्रिएशन के लिए ग्रांट्स में भी इजाफा देखने को मिला है। यह FY16 के 1.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 4.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इससे सरकार में कई स्तर पर एसेट क्रिएशन के लिए ज्यादा सपोर्ट का संकेत मिलता है।
सीपीईएस का पूंजीगत खर्च 4.3 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान
सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (सीपीईएस) का पूंजीगत खर्च FY26 में 4.3 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसमें इनटर्नल और एक्स्ट्रा-बजटरी रिसोर्सेज शामिल हैं। बजटरी पूंजीगत खर्च और ग्रांट्स को कंबाइन करने पर FY26 में कैपिटल एक्सपेंडिचर 15.5 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाता है। FY26 में जीडीपी में कैपिटल एक्सपेंडिचर की हिस्सेदारी करीब 5.5 फीसदी है।
FY27 में सरकार की बॉरोइंग 11.7 लाख करोड़ रहने की उम्मीद
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 में केंद्र सरकार की बॉरोइंग करीब 11.7 लाख करोड़ रुपये रह सकती है। यह फिस्कल डेफिसिट का करीब 70 फीसदी है। रीपेमेंट्स करीब 4.6 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। इसमें 1 लाख करोड़ रुपये का संभावित बायबैक और 1.5 लाख करोड़ रुपये का बॉन्ड स्विचेज शामिल हैं।
रिफॉर्म्स से स्टेट डेवलपमेंट लोन को कम किया जा सकता है
राज्य के स्तर पर करीब 4.2 लाख करोड़ रुपये रीपेमेंट्स के साथ ग्रॉस बॉरोइंग 12.6 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि रिफॉर्म्स के जरिए स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs) को कम किया जा सकता है, जिससे नेट स्टेट बॉरोइंग में कमी आएगी। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूनियन बजट ऐसे वक्त पेश हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर काफी अनिश्चितता है। शेयर बाजार में भी काफी उतारचढ़ाव दिख रहा है।