Middle East Crisis: महंगे क्रूड की वजह से क्या जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने वाली हैं?

मार्च में क्रूड ऑयल का इंडियन बास्केट 123.15 डॉलर प्रति बैरल रहा। यह फरवरी के 69.01 डॉलर के मुकाबले काफी ज्यादा है। फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स का कहना है कि अब तक कंपनियां बढ़ी हुई कॉस्ट का बोझ खुद उठा रही हैं

अपडेटेड Mar 26, 2026 पर 7:54 PM
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क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से माल ढुलाई यानी फ्रेट कॉस्ट बढ़ी है।

महंगे क्रूड ने फूड प्रोसेसिंग कंपनियों की मुश्किल बढ़ा दी है। कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। फिलहाल क्रूड की कीमतों में नरमी नहीं दिख रही। कुछ समय के लिए ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आया था। फिर, वह 100 डॉलर के पार हो गया। सवाल है कि क्या इससे जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने जा रही हैं?

अभी कंपनियां खुद बढ़ी हुई कॉस्ट का बोझ उठा रहीं

फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स का कहना है कि अब तक कंपनियां बढ़ी हुई कॉस्ट का बोझ खुद उठा रही हैं, लेकिन अगर मध्यपूर्व में संकट लंबे समय तक बना रहता है उन्हें प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना होगा। क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से माल ढुलाई यानी फ्रेट कॉस्ट बढ़ी है।


पश्चिम एशिया में लड़ाई से कमोडिटी की कीमतों मे उछाल

AWL Agri Business के सीईओ श्रीकांत कनहेरे ने कहा कि पश्चिम एशिया में क्राइसिस की वजह से कमोडिटी की कीमतों में उछाल आया है। पैकेजिंग मैटेरियल की कॉस्ट 20-25 फीसदी तक बढ़ गई है। सप्लाई चेन में संभावित अवरोध की वजह से खाद्य तेल की सीएनएफ कीमतें भी हाई चल रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बहुत ज्यादा असर नहीं दिख रहा। लेकिन अगर क्राइसिस एक महीने से ज्यादा समय तक जारी रहती है तो खाद्य तेलों की रिटेल कीमतें बढ़ सकती हैं।

क्रूड ऑयल का इंडियन बास्केट 123 डॉलर प्रति बैरल के पार

मार्च में क्रूड ऑयल का इंडियन बास्केट 123.15 डॉलर प्रति बैरल रहा। यह फरवरी के 69.01 डॉलर के मुकाबले काफी ज्यादा है। डेयरी प्रोडक्ट बनाने वाली mooMark भी इनपुट कॉस्ट बढ़ने से दिक्कत का सामना कर रही है। mooMark की पेरेंट कंपनी Stellapps Technologies के को-फाउंडर और सीईओ रंजती मुकुंदा ने कहा, "हमारा मानना है कि अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो कॉस्ट का कुछ बोझ रिटेलर्स पर डालना होगा। इसका मतलब है कि इसका असर ग्राहकों पर पड़ेगा।"

मैन्युफैक्चरिंग के साथ पैकेजिंग कॉस्ट भी बढ़ी

पारले के मयंक शाह ने कहा कि कंपनी बढ़ी हुई कॉस्ट का कुछ बोझ ग्राहकों पर डालने का फैसला ले सकती है। उन्होंने कहा कि क्रूड में उछाल से मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट पर असर पड़ा है। सिंपली फ्रेश और न्यूट्रिक ब्रांड्स की ओनर बीएन ग्रुप ने कहा कि हमने फाइनेंशियल बर्डेन कम करने की कोशिश की है, जिसका असर हमारे ऑपरेशंस पर पड़ता है। हमारा फोकस प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने की जगह कंज्यूमर का भरोसा हासिल करने पर है।

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लड़ाई शुरू हुए एक महीने पूरे होने जा रहे

अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी। इस लड़ाई के एक महीने पूरे होने जा रहे हैं। तब से क्रूड की कीमतें हाई बनी हुई है। लड़ाई से पहले क्रूड का भाव 71-72 डॉलर प्रति बैरल था। पिछले काफी समय से कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। इसका असर लॉजिस्टिक्स सहित दूसरी सर्विसेज पर पड़ा है।

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