नौकरी के लिए जर्मनी जाने का प्लान बना रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। जर्मनी ने कहा है कि वह भारतीयों के लंबी अवधि के वीजा को जल्द एप्रूवल देगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी गई है। इनमें बताया गया है कि पहले जर्मनी जाने के लिए वीजा की प्रोसेसिंग में 9 महीनों का समय लगता है। अब यह घटकर सिर्फ दो हफ्ते रह जाएगा। शेनजेन न्यूज के मुताबिक, अब तक जर्मनी में अथॉरिटीज को वर्क वीजा को प्रोसेस करने में करीब 9 महीनों का समय लग जाता था। अब स्किल्ड इंडियन वर्कर्स का वीजा सिर्फ दो महीने में प्रोसेस हो जाएगा।
जर्मनी में काम करने वाले लोगों की कमी
जर्मनी की विदेश मंत्री अन्नालेन बेयरबोक (Annalena Baerbock) ने कहा है कि उनके देश को स्किल्ड वर्कर्स (Skilled Workers) की तुरंत जरूरत है। इस डिमांड को पूरा करने के लिए वीजा के प्रोसेसिंग टाइम को घटा दिया गया है। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट के 2023 के डेटा के मुताबिक, जर्मनी में करीब 6 लाख वैकेंसी है। वर्क वीजा (Work Visa) में ज्यादा समय लगने से स्किल्ड वर्कर्स की ट्रेनिंग पर असर पड़ता है।
वर्कर्स की नियुक्ति नहीं होने से इकोनॉमी को नुकसान
जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट ने यह भी कहा है कि जर्मनी में बड़ा निवेश करने वाली भारतीय कंपनियां क्विक वीजा पर निर्भर करती हैं। इसलिए उन्हें स्पेशियलिस्ट्स को जर्मन लाने की इजाजत दे दी जाती है। इंस्टीट्यूट ने यह भी कहा है कि नौकरी की वैकेंसी पूरा नहीं करने पर जर्मनी इकोनॉमी को 74 अरब यूरो का नुकसान हो सकता है। इस इंस्टीट्यूट के मुताबिक, फेडरल फॉरेन ऑफिस ने जून 2024 तक 80,000 वर्क वीज जारी किए हैं। इनमें से 50 फीसदी स्किल्ड वर्कर्स थे।
यह भी पढ़ें: जिस देश में पड़ोसी मुल्क के लोग नहीं रख सकते कदम, अब वो International Toruists के लिए खोल रहा अपने दरवाजे
विदेश मंत्री ने जर्मनी के सासंदों से मुलाकात की थी
14 अगस्त को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मनी के सासंदों जुरगेन हार्ड और रैल्फ ब्रिंकाउस से मुलाकात की थी। इस बारे में उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया था। उन्होंने इसमें बताया था कि दिल्ली में जुरगेन हार्ड और रैल्फ ब्रिंकाउस से अच्छी बातचीत हुई। संबंधों को मजबूत बनाने के लिए उनके लगातार सहयोग की तारीफ करता हूं। सबंधित क्षेत्रों के घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई।