वेस्ट एशिया में युद्ध के चलते कई NRIs वर्क फ्रॉम इंडिया विकल्प के साथ भारत लौट रहे हैं। ऐसे में उन्हें भारत में रहने के इंतजाम के साथ-साथ अपनी टैक्स प्लानिंग सावधानी से करनी पड़ेगी ताकि वो भारतीय इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस से बच सकें।

वेस्ट एशिया में युद्ध के चलते कई NRIs वर्क फ्रॉम इंडिया विकल्प के साथ भारत लौट रहे हैं। ऐसे में उन्हें भारत में रहने के इंतजाम के साथ-साथ अपनी टैक्स प्लानिंग सावधानी से करनी पड़ेगी ताकि वो भारतीय इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस से बच सकें।
मिडिल ईस्ट से लेकर अमेरिका तक ग्लोबल अनिश्चितता के चलते बड़े पैमाने पर नॉन रेजिजेंट इंडियन यानि NRIs भारत लौट रहे हैं ताकि वो यहां सुकून से वर्क फ्रॉम होम कर सकें। टैक्स एक्पर्ट की सलाह है कि उन्हें भारत में रहते हुए अपने टैक्स स्टेट्स का ख़ास ध्यान रखने की जरूरत है, ताकि उनका Non Resident Indian स्टेट्स बरकरार रहे। नहीं तो भारतीय टैक्स कानून के मुताबिक उन्हें ग्लोबल इनकम पर टैक्स चुकाना पड़ सकता है।
दरअसल इनकम टैक्स कानून के मुताबिक टैक्स देनदारी तय होती है । आपके रेजिडेंशियल स्टेटस से (यानी आप साल में कितने दिन भारत में रहे और कितने दिन विदेश में)अगर आप 182 दिन या उससे ज्यादा भारत में रहते हैं तो Resident Indian माना जाएगा और आपको भारत में टैक्स चुकाना होगा। इसके अलावा अगर आप 60 दिन भारत में रहते हैं और पिछले 4 सालों में कुल मिलाकर 365 दिन भारत में रहे हैं तो भी Resident Indian माना जाएगा। यानि इन दोनों कंडीशन के अलावा या इससे कम दिन भारत में रहते हैं तभी आपको Non Resident माना जाएगा।
भारत का कई देशों के साथ DTAA यानि टैक्स ट्रीटी है। जिसकी वजह से टैक्स स्टेट्स के मुताबिक तय समय से ज्यादा भी भारत में रहने पर NRIs को टैक्स छूट मिल सकती है, लेकिन टैक्स एक्पर्ट के मुताबिक टैक्स छूट के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरना जरूरी होगा। तभी उनके ग्लोबल इनकम पर एक्जेम्पशन मिल सकेगा।
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