घरेलू बाजार में प्याज की खुदरा कीमतें हो रहीं स्थिर, खरीफ सीजन में बुवाई 27% बढ़ने का अनुमान

राज्य सरकारों के साथ कृषि मंत्रालय के आकलन के अनुसार, खरीफ मौसम के लिए प्याज, टमाटर और आलू जैसी प्रमुख सब्जियों की बुआई के रकबे में पिछले साल के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इस साल खरीफ आलू के तहत रकबा पिछले साल के मुकाबले 12% बढ़ाने का लक्ष्य है। आंध्र प्रदेश के चित्तूर और कर्नाटक के कोलार, जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में टमाटर की फसल की स्थिति अच्छी बताई गई है

अपडेटेड Jul 06, 2024 पर 8:58 AM
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पिछले साल के मुकाबले रबी-2024 सीजन में प्याज का उत्पादन थोड़ा कम होने के बावजूद घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता संतोषजनक है।

सरकार का कहना है कि घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता की स्थिति संतोषजनक है और खुदरा कीमतें स्थिर हो रही हैं। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि खरीफ (गर्मियों में बोई गई) मौसम में प्याज की फसलों की बुवाई में 27 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। मंत्रालय ने कहा कि इस साल अच्छी और समय पर हुई मानसूनी बारिश ने प्याज, टमाटर, आलू और अन्य बागवानी फसलों समेत खरीफ फसलों को काफी बढ़ावा दिया है। राज्य सरकारों के साथ कृषि मंत्रालय के आकलन के अनुसार, खरीफ मौसम के लिए प्याज, टमाटर और आलू जैसी प्रमुख सब्जियों की बुआई के रकबे में पिछले साल के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

पिछले साल के मुकाबले रबी-2024 सीजन में प्याज का उत्पादन थोड़ा कम होने के बावजूद घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता संतोषजनक है। प्याज की फसल 3 मौसमों में प्राप्त की जाती है: मार्च-मई में रबी, सितंबर-नवंबर में खरीफ और जनवरी-फरवरी में देर की खरीफ। उत्पादन के मामले में, रबी फसल कुल उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत है। खरीफ और देर की खरीफ मिलकर उत्पादन में 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं। वर्तमान में बाजार में उपलब्ध प्याज रबी-2024 की फसल है, जिसकी कटाई मार्च-मई 2024 के दौरान की गई थी।

खरीफ प्याज के तहत लक्षित क्षेत्र 3.61 लाख हेक्टेयर


इस साल खरीफ प्याज के तहत लक्षित क्षेत्र 3.61 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल की तुलना में 27% अधिक है। सरकार ने कहा कि रबी-2024 का अनुमानित उत्पादन 191 लाख टन है, जो प्रति माह लगभग 17 लाख टन की घरेलू खपत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। प्याज की कीमतें स्थिर हो रही हैं क्योंकि किसानों की ओर से बाजार में भेजी जाने वाली रबी प्याज की मात्रा बढ़ रही है। इसका कारण है- मंडी की कीमतों में वृद्धि और मानसून की बारिश की शुरुआत। बारिश के मौसम में उच्च वायुमंडलीय नमी, भंडारण को नुकसान होने की संभावना को बढ़ा देती है।

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खरीफ आलू का रकबा 12% बढ़ाने का लक्ष्य

आलू के बारे में, सरकार ने कहा कि यह मूल रूप से एक रबी फसल है, लेकिन कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मेघालय, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में कुछ मात्रा में खरीफ आलू का उत्पादन होता है। सितंबर से नवंबर के दौरान काटी जाने वाली खरीफ आलू की फसल बाजार में उपलब्धता बढ़ाती है। इस साल खरीफ आलू के तहत रकबा पिछले साल के मुकाबले 12% बढ़ाने का लक्ष्य है।

टमाटर को लेकर क्या स्थिति

कृषि मंत्रालय की ओर से राज्य सरकार के साथ किए गए आकलन के अनुसार, इस वर्ष लक्षित खरीफ टमाटर रकबा 2.72 लाख हेक्टेयर है, जबकि पिछले वर्ष 2.67 लाख हेक्टेयर में बुवाई की गई थी। आंध्र प्रदेश के चित्तूर और कर्नाटक के कोलार, जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल की स्थिति अच्छी बताई गई है। कोलार में टमाटर की तुड़ाई शुरू हो गई है और अब से कुछ दिनों के अंदर यह बाजार में आ जाएगा। चित्तूर और कोलार में जिला बागवानी अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष टमाटर की फसल पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर है। मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में खरीफ टमाटर के रकबे में पिछले वर्ष की तुलना में काफी वृद्धि होने की संभावना है।

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