क्या आप समय-समय पर अपने क्रेडिट स्कोर को चेक करते हैं? जानिए यह क्यों बहुत जरूरी है

लोन के लिए अप्लाई करने पर बैंक या एनबीएफसी आपके क्रेडिट स्कोर (Credit Score) की जांच करती हैं। इसमें आपके क्रेडिट कार्ड्स की डिटेल, लोन, बैंक अकाउंट्स सहित कई तरह की फाइनेंशियल जानकारियां शामिल होती हैं। इसमें आपकी क्रेडिट हिस्ट्री, डिफॉल्ट और लेट पेमेंट की डिटेल भी शामिल होती है। आपसे जुड़ी ये जानकारियां देखने के बाद बैंक यह तय करता है कि आपको लोन देना है या नहीं

अपडेटेड Jun 06, 2023 पर 6:12 PM
Story continues below Advertisement
पेमेंट हिस्ट्री में आपके लोन की चुकाई गई EMI या क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट शामिल होता है। क्रेडिट रिपोर्ट में आपके सभी लोन की डिटेल शामिल होंगी। लेंडिंग इंस्टीट्यूशंस कंज्यूमर का क्रेडिट इंफॉर्मेशन हर महीने क्रेडिट ब्यूरो को शेयर करते हैं।

आप जब लोन या क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के लिए अप्लाई करते हैं तो बैंक या एनबीएफसी आपके क्रेडिट स्कोर (Credit Score) की जांच करती हैं। इसमें आपके क्रेडिट कार्ड्स की डिटेल, लोन, बैंक अकाउंट्स सहित कई तरह की फाइनेंशियल जानकारियां शामिल होती हैं। इसमें आपकी क्रेडिट हिस्ट्री, डिफॉल्ट और लेट पेमेंट की डिटेल भी शामिल होती है। आपसे जुड़ी ये जानकारियां देखने के बाद बैंक यह तय करता है कि आपको लोन देना है या नहीं। अगर बैंक लोन देने को तैयार हो जाता है तो फिर सवाल यह होता है कि आपके लिए इंटरेस्ट रेट कितना होगा। बैंक आपके क्रेडिट स्कोर से यह भी तय करता है कि आपको कितने अमाउंट का लोन दिया जा सकता है।

क्यों जरूरी है क्रेडिट स्कोर चेक करना?

इसलिए आपके लिए अपने क्रेडिट स्कोर की समय-समय पर जांच करते रहना जरूरी है। इसमें आपसे जुड़ी कोई गलत जानकारी आपको नुकसान पहुंचा सकती है। बैंक लोन का आपका अप्लिकेशन खारिज कर सकता है। एनबीएफसी क्रेडिट कार्ड के आपके आवेदन को रिजेक्ट कर सकती है। सवाल है कि आपको अपने क्रेडिट स्कोर में किन बातों का ख्याल रखने की जरूरत है।


यह भी पढ़ें : ऑडिटर्स और सरकारी बैंक मिलकर शुरू करेंगे बैलेंस कनफर्मेशन पोर्टल, जानिए क्या होगा फायदा

आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में कोई गलती तो नहीं है?

आपके लिए अपने सैंक्शंड या डिस्बर्स्ड लोन का ट्रैक रखना बहुत जरूरी है। इसके अलावा आपको अपनी पेमेंट हिस्ट्री का ध्यान रखना होगा। अगर इनमें किसी तरह की गलती आपको दिखती है तो आपको उसे जल्द ठीक कराना होगा। उदाहरण के लिए अगर आपने कोई पेमेंट किया है लेकिन आपकी क्रेडिट हिस्ट्री में आपको डिफॉल्टर दिखाया जाता है तो इससे आपको काफी नुकसान हो सकता है। कई बार गलत एंट्री की वजह से ऐसी दिक्कत हो जाती है।

गलती मिलने पर आपको क्या करना होगा?

किसी तरह की गलती मिलने पर आपको इसकी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को देनी होगी। बैंकबाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा कि रिपोर्ट में क्रेडिट इनक्वायरी चेक करना भी जरूरी है। अगर ऐसी कोई इनक्वायरी है, जिसके बारे में आपको पता नहीं हो तो यह आइडेंटिटी थेफ्ट की कोशिश हो सकती है। इसलिए इसके बारे में जितना जल्द हो सके क्रेडिट ब्यूरो को बताना सही रहेगा।

पेमेंट हिस्ट्री में आपके लोन की चुकाई गई EMI या क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट शामिल होता है। क्रेडिट रिपोर्ट में आपके सभी लोन की डिटेल शामिल होंगी। लेंडिंग इंस्टीट्यूशंस कंज्यूमर का क्रेडिट इंफॉर्मेशन हर महीने क्रेडिट ब्यूरो को शेयर करते हैं। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद क्रेडिट स्कोर को अपडेट किया जाता है। आम तौर पर आपकी रिपोर्ट में 7 साल तक की आपकी क्रेडिट हिस्ट्री शामिल होती है।

क्रेडिट यूटिलाइजेशन का भी ध्यान रखें

क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले कई लोग क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो की ज्यादा परवाह नहीं करते हैं। इसका मतलब क्रेडिट के उस रेशियो से है जो आपको उपलब्ध होता है और जिसका हिस्सा आप इस्तेमाल करते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि अपनी पूरी क्रेडिट लिमिट का इस्तेमाल करना सही नहीं है। अपनी क्रेडिट लिमिट का लगातार पूरा इस्तेमाल करना आपके क्रेडिट स्कोर पर खराब असर डाल सकता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।