SIP Calculator: म्यूचुअल फंड में किस तारीख को कर रहे SIP, क्या रिटर्न पर इसका पड़ेगा असर?
SIP Calculator: क्या SIP की तारीख सच में आपका रिटर्न तय करती है? महीने की शुरुआत या अंत... कौन सा समय बेहतर है? इस सवाल का जवाब उतना सीधा नहीं है जितना लगता है, और इसमें छिपा है एक अहम निवेश सबक। जानिए पूरी डिटेल।
आप SIP किस तारीख को करते हैं, इससे लॉन्ग टर्म के रिटर्न पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
SIP Calculator: म्यूचुअल फंड में SIP (Systematic Investment Plan) को लेकर एक आम सवाल बार-बार सामने आता है। अगर आपने महीने की 1 तारीख को निवेश शुरू किया या 15 तारीख को, तो क्या इससे आपके रिटर्न में कोई बड़ा फर्क पड़ता है? सुनने में यह बात काफी अहम लगती है।
आइए जानते हैं कि क्या इसका रिटर्न पर क्या असर होता है और कौन सी चीज रिटर्न को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।
SIP तारीख का रिटर्न पर असर होता है?
अगर साफ शब्दों में जवाब दें, तो हां, लेकिन बेहद मामूली। एक म्यूचुअल फंड ने इसे समझने के लिए 10 साल के रिटर्न का एनालिसिस किया। इसमें एक लार्ज कैप म्यूचुअल फंड के SIP रिटर्न को जांचा गया, मार्च 2015 से मार्च 2025 तक। इसमें हर तारीख शामिल थी।
SIP रिटर्न कमोबेश एक जैसा ही रहा- 13.07% से 13.26% के बीच। यानी अब अगर आप हर महीने ₹2,000 निवेश करते, तो 10 साल में आपको ₹4.70 लाख से ₹4.76 लाख मिलते। यानी रिटर्न में करीब 6 हजार का अंतर दिखा।
फिर रिटर्न कम या ज्यादा कैसे होता है?
आप SIP किस तारीख को करते हैं, इससे लॉन्ग टर्म के रिटर्न पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। असली फर्क कुछ खास बातों से पड़ता है। जैसे :
किस म्यूचुअल फंड और स्कीम में निवेश कर रहे हैं।
कितने समय तक अपनी SIP को जारी रखते हैं।
हर साल SIP की रकम को कितना बढ़ाते हैं।
आपकी जोखिम लेने की क्षमता कैसी है।
सबसे ज्यादा मायने रखती है निरंतरता
SIP का असली फायदा 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' से आता है। इसका मतलब है कि आप हर महीने अलग-अलग भाव पर निवेश करते हैं- कभी बाजार ऊपर होता है तो कभी नीचे। इससे आपके निवेश का औसत खर्च अपने आप संतुलित हो जाता है।
इसलिए अगर आप नियमित रूप से हर महीने निवेश कर रहे हैं, तो यह ज्यादा मायने नहीं रखता कि आपने 1 तारीख चुनी या 20 तारीख। लंबे समय में ये छोटे फर्क खुद ही खत्म हो जाते हैं। जैसे कि अगर आप हर महीने 1 तारीख को निवेश करते हैं। अब हो सकता है कि 1 साल में 3-4 महीने उस वक्त बाजार नीचे रहे। लेकिन, बाकी महीने निवेश के दौरान ऊंचा भी रह सकता है।
कम समय में थोड़ा असर दिख सकता है
अगर आप बहुत कम समय के लिए SIP करते हैं, जैसे 6 महीने या 1 साल, तो तारीख का थोड़ा असर दिख सकता है। मान लीजिए कि किसी समय बाजार ऐसा ट्रेंड दिखा रहा है कि महीने की शुरुआत में भाव ज्यादा रहते हैं और अंत में थोड़े गिर जाते हैं।
ऐसे में महीने के आखिर में निवेश करने वाला निवेशक थोड़े कम दाम पर यूनिट खरीद सकता है। इससे उसे थोड़ा बेहतर रिटर्न दिख सकता है। लेकिन यह कोई तय पैटर्न नहीं है, इसलिए इसे प्लान बनाकर फॉलो करना सही नहीं होता। जब आप SIP को 10-15 साल या उससे ज्यादा समय तक जारी रखते हैं, तो अलग-अलग तारीखों का असर लगभग खत्म हो जाता है।
SIP की सही तारीख कैसे चुनें
SIP की तारीख तय करते समय सबसे जरूरी बात है आपका कैश फ्लो। अगर आपकी सैलरी महीने की शुरुआत में आती है, तो उसी समय SIP सेट करना ज्यादा सही रहेगा। इससे आपके खाते में पैसे रहते हैं और SIP मिस होने का खतरा कम हो जाता है।
इसका मतलब है कि ऐसी तारीख चुनें जो आपके लिए सुविधाजनक हो, न कि बाजार को देखकर। क्योंकि सही समय पर मार्केट की तेजी या गिरावट को पकड़ना तकरीबन नाममुकिन ही है।
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