प्राइवेट नौकरी करने वाले लोगों की सैलरी से कुछ पैसा हर महीने ईपीएफ में जमा होता है। करीब इतना ही पैसा एंप्लॉयर भी एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में कंट्रिब्यूट करता है। यह बेसिक सैलरी (प्लस डीए) का 12 फीसदी होता है। इस तरह से तैयार फंड का बड़ा हिस्सा एंप्लॉयी के रिटायर करने पर उसे एकमुश्त मिल जाता है। एंप्लॉयर के 12 फीसदी कंट्रिब्यूशन में 8.33 फीसदी एंप्लॉयी के पेंशन फंड (ईपीएस) में जाता है। इस पेंशन फंड में जमा पैसे से ही रिटायरमेंट के बाद एंप्लॉयी को हर महीने पेंशन मिलती है।
