ईपीएफ का मकसद बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना है। एंप्लॉयी के रिटायर करने पर ईपीएफ में जमा पैसा उसे एकमुश्त मिल जाता है। नौकरी 10 साल से ज्यादा लंबी होने पर एंप्लॉयी पेंशन का भी हकदार होता है। प्राइवेट नौकरी करने वाले एंप्लॉयीज को ईपीएफ की सुविधा मिलती है। ईपीएफ से जुड़े टैक्स के नियम इसे काफी अट्रैक्टिव बनाते हैं। रिटायरमेंट पर मिलने वाला एकमुश्त पैसा टैक्स के दायरे में नहीं आता है। सवाल है कि क्या एंप्लॉयी खास स्थितियों में रिटायरमेंट से पहले पैसे निकालता है तो उस पर टैक्स लगेगा?
ईपीएफ में तीन तरह से जमा होते हैं पैसे
एक्सपर्ट्स का कहना है कि EPF में तीन तरह से पैसे जमा होते हैं। पहला, हर महीना एंप्लॉयी की सैलरी (बेसिक प्लस डीए का 12 फीसदी) का एक हिस्सा इसमें जमा होता है। दूसरा, एंप्लॉयर भी हर महीने एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में उतना ही पैसा जमा करता है। तीसरा, ईपीएफ अकाउंट में जमा पैसे पर सालाना इंटरेस्ट मिलता है। सरकार हर साल इंटरेस्ट तय करती है। FY25 में यह इंटरेस्ट रेट 8.25 फीसदी था।
नौकरी 5 साल से कम होने पर विड्रॉल पर टैक्स
अगर कोई एंप्लॉयीज लगातार 5 साल नौकरी से पहले ईपीएफ से पैसे निकालता है तो उसे उस पैसे पर टैक्स चुकाना होगा। लेकिन, अगर यह अमाउंट 50,000 रुपये से कम है तो उस पर टीडीएस नहीं कटेगा। अगर कोई व्यक्ति पिछले एंप्लॉयर से नए एप्लॉयर के पास ईपीएफ में जमा पैसा ट्रांसफर करता है और कुल सर्विस 5 साल या इससे ज्यादा है तो टीडीएस नहीं कटेगा। कई बार एंप्लॉयी नौकरी बदलने पर पिछले एंप्लॉयर के साथ अपने ईपीएफ बैलेंस को नए एंप्लायर के पास ट्रांसफर नहीं कराते हैं। वे ईपीएफ में जमा पैसे को निकाल लेते हैं। चूंकि यह रिटायरमेंट फंड है, इसलिए इससे विड्रॉल करना एंप्लॉयी के हित में नहीं है।
एंप्लॉयी की नौकरी 5 साल पूरी नहीं हुई है और ईपीएफ का अमाउंट 50,000 रुपये से ज्यादा है तो उस पर 10 फीसदी के रेट से टीडीएस कटता है। एंप्लॉयी को विड्रॉल के प्रोसेस के दौरान अपने पैन की जानकारी देनी होगी। पैन की जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर ईपीएफ अमाउंट पर 20 फीसदी के रेट से टीडीएस कटता है। अगर एंप्लॉयी की इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आती है तो वह फॉर्म 15जी/फॉर्मएच सब्मिट कर सकता है। इससे ईपीएफ अमाउंट पर टीडीएस नहीं कटेगा।