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EPFO ने प्राइवेट एंप्लॉयीज को ज्यादा पेंशन हासिल करने का मौका दिया है, क्या आपको इसका फायदा उठाना चाहिए?

EPFO ने ज्यादा पेंशन पाने का एक और मौका एंप्लॉयीज को दिया है। इसके लिए उसने 20 फरवरी को सर्कुलर जारी किया है। इसके बाद से इस बात की खूब चर्चा हो रही है कि ज्यादा पेंशन की स्कीम को सेलेक्ट करने से एंप्लॉयी को कितना फायदा होगा। यह मामला कुछ जटिल है। इसे ठीक से समझने के बाद ही आप इस स्कीम के बारे में सही फैसला ले सकेंगे

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Feb 22, 2023 पर 7:09 PM
EPFO ने प्राइवेट एंप्लॉयीज को ज्यादा पेंशन हासिल करने का मौका दिया है, क्या आपको इसका फायदा उठाना चाहिए?
1 सितंबर, 2014 को EPS के सदस्य रहे एंप्लॉयीज को EPFO ज्यादा पेंशन वाली स्कीम का फायदा उठाने के लिए एक मौका दे रहा है। इसके लिए आपको 3 मार्च तक अप्लाई करना होगा।

अगर 1 सितंबर, 2014 को आप एंप्लाई थे तो आपको कंपनी की तरफ से एक मेल आया होगा। इसमें कहा गया होगा कि अगर चाहें तो EPS के तहत आप ज्यादा पेंशन वाली स्कीम के लिए अप्लाई कर सकते हैं। दरअसल, 1 सितंबर, 2014 को EPS के सदस्य रहे एंप्लॉयीज को EPFO ज्यादा पेंशन वाली स्कीम का फायदा उठाने के लिए एक मौका दे रहा है। इसके लिए आपको 3 मार्च तक अप्लाई करना होगा। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखकर EPFO कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पिछले साल नवंबर में एक फैसला दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2022 में कहा था कि जो एंप्लॉयी 1 सितंबर, 2024 को EPFO के सदस्य थे, वे ज्यादा पेंशन का लाभा उठा सकते हैं। इसके लिए उनकी वास्तविक बेसिक सैलरी से EPS में कंट्रिब्यूशन जरूरी होगा। अभी EPS में कंट्रिब्यूशन के लिए प्रति माह 15,000 रुपये सैलरी की सीमा तय है। इसका मतलब यह है कि अगर आपकी वास्तविक बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है तो भी EPS में होने वाला कंट्रिब्यूशन 15,000 रुपये के आधार पर ही होता है। इससे वजह से EPS में काफी कम पैसा जमा होता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रख EPFO ने 20 फरवरी को एक सर्कुलर जारी किया है।

EPS क्या है?

EPFO प्राइवेट नौकरी करने वाले एंप्लॉयीज के रिटायरमेंट अमाउंट का प्रंबधन करता है। इसकी दो स्कीमें हैं-एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) और एंप्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS)। आपकी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हर महीने EPF अकाउंट में डिपॉजिट होता है। आपका एंप्लायर (कंपनी) भी 12 फीसदी (बेसिक सैलरी का) कंट्रिब्यूशन करता है। लेकिन, एंप्लॉयर का पूरा कंट्रिब्यूशन EPF में नहीं जाता है। सरकार की तरफ से तय सैलरी की सीमा के आधार पर 8.33 फीसदी हिस्सा EPS में चला जाता है। एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन का बाकी हिस्सा EPF में जाता है। 58 साल की उम्र पूरी होने पर जब आप रिटायर करते हैं तो आपके EPF अकाउंट में जमा पूरा पैसा आपको एकमुश्त दे दिया जाता है।

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