EPFO की ज्यादा पेंशन की स्कीम क्या है, इसके लिए आपको कैसे अप्लाई करना होगा?

EPFO ने ज्यादा पेंशन की स्कीम का फायदा उठाने के लिए एक और मौका दिया है। प्राइवेट नौकरी करने वाले लोग 3 मार्च तक इसके लिए आवेदन दे सकते हैं। EPFO ने 20 फरवरी को इस बारे में सर्कुलर जारी किया है। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रख EPFO ने सर्कुलर जारी किए हैं

अपडेटेड Feb 25, 2023 पर 11:29 AM
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EPFO की तरफ से सर्कुलर का इंतजार काफी समय से हो रहा था। इसकी वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में दिए अपने फैसले में इसके लिए 3 मार्च की समयसीमा तय की थी।

अगर आप प्राइवेट नौकरी करते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। EPFO ने ज्यादा पेंशन (Higher Pension) पाने का एक मौका उन लोगों को दिया है, जो पिछली बार इस मौके का लाभ उठाने से चूक गए थे। इस बारे में ईपीएफओ ने 20 फरवरी को सर्कुलर जारी किया है। यह सर्कुलर पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रख जारी किया गया है। ईपीएफओ ने अपने सभी रीजनल और जोनल ऑफिसेज को निर्देश जारी कर बताया है कि एंप्लॉयीज को किस तरह ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई करना होगा। इस बारे में EPFO की तरफ से सर्कुलर का इंतजार काफी समय से हो रहा था। इसकी वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में दिए अपने फैसले में इसके लिए 3 मार्च की समयसीमा तय की थी।

EPFO की पेंशन स्कीम क्या है?

आपके लिए सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि EPFO प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों के पेंशन फंड (EPF) और पेंशन स्कीम (EPS) का प्रबंधन करता है। एंप्लॉयी की उम्र 58 साल पूरे होने पर उसे EPFO की तरफ से पेंशन मिलती है। उसे प्रोविडेंट फंड में जमा पैसा भी रिटायरमेंट पर मिलता है। आपके लिए यह जान लेना भी जरूरी है कि जहां सरकारी नौकरी में रिटायरमेंट की उम्र 60 साल है, प्राइवेट नौकरी में यह 58 साल है।


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अभी क्या है व्यवस्था?

अभी एंप्लॉयी और एंप्लॉयर (कंपनी) एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउन्स (DA) का 12 फीसदी EPF में कंट्रिब्यूट (डिपॉजिट) करते हैं। एंप्लॉयी का पूरा कंट्रिब्यूशन EPF (प्रोविडेंट फंड) में चला जाता है। लेकिन, एंप्लॉयर (कंपनी) का 12 फीसदी का पूरा कंट्रिब्यूशन ईपीएफ में नहीं जाता है। इसे 3.67 फीसदी और 8.33 फीसदी ( 3.67+ 8.33 =12 फीसदी) के दो हिस्सों में बांट दिया जाता है। 3.67 फीसदी EPF में चला जाता है। 8.33 फीसदी EPS में जाता है। हर महीने इस सिस्टम का पालन होता है। इसके अलावा केंद्र सरकार 1.16 फीसदी एंप्लॉयी के EPS में कंट्रिब्यूट करती है। इसका मतलब यह है कि एंप्लॉयी EPS में कोई कंट्रिब्यूशन नहीं करता है।

कैसे बढ़ेंगी आपकी पेंशन?

अभी पेंशन के लिए सैलरी की प्रति माह 15,000 रुपये की सीमा तय थी। यानी एंप्लॉयी के EPS में होने वाला हर महीने का कंट्रिब्यूशन इसी 15,000 रुपये में से होता है। इसका मतलब यह है कि प्राइवेट नौकरी करने वाले किसी व्यक्ति की सैलरी चाहे जितनी बढ़ जाए, उसके EPS में जमा होने वाला पैसा नहीं बढ़ता है। इसकी वजह है पेंशन के लिए सैलरी की प्रति माह 15,000 रुपये की सीमा।

EPFO ने 20 फरवरी को जो सर्कुलर जारी किया है, उसके बाद अब 8.33 का डिडक्शन अब प्रति माह 15,000 रुपये की सैलरी की जगह एंप्लायी की वास्तविक बेसिक सैलरी के आधार पर होगा। चूंकि आम तौर पर प्राइवेट नौकरी करने वाले कई लोगों की बेसिक सैलरी 15000 रुपये से ज्यादा होती है, जिससे हर महीने EPS में जमा होने वाला अमाउंट बढ़ जाएगा। इससे लंबी अवधि में उसके पेंशन फंड में जमा होने वाला अमाउंट भी बढ़ जाएगा। इससे रिटायरमेंट के बाद उसे ज्यादा पेंशन मिलेगी।

आपको कैसे करना होगा अप्लाई?

EPFO के 20 फरवरी को जारी सर्कुलर के बाद EPFO के ऐसे सब्सक्राइबर जो 31 अगस्त, 2014 को ईपीएफओ के सदस्य थे, लेकिन EPS के तहत ज्यादा पेंशन की स्कीम का चुनाव नहीं किया है, वे 3 मार्च, 2023 से पहले इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं। ईपीएफओ ने कहा है कि इसके लिए एंप्लॉयी और एंप्लॉयर (कंपनी) को संयुक्त रूप से ईपीएफओ के पास अप्लाई करना होगा। इसके लिए EPFO की तरफ से जल्द सुविधा दी जाएगी। EPFO इसका URL जल्द जारी करेगा।

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