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बैंक एफडी के इंटरेस्ट पर TDS से बचना चाहते हैं? Form 15H और Form 15G करेंगे आपकी मदद, जानिए कैसे

इंडिविजुअल और संस्थानों को पेमेंट करते वक्त उस पर टीडीएस काटना जरूरी होता है। एंप्लॉयीज को कंपनी की तरफ से मिलने वाली सैलरी और बैंक की तरफ से एफडी पर मिलने वाला इंटरेस्ट इसके उदाहरण हैं। सैलरी के मामले में एंप्लॉयर्स को टीडीएस काटना जरूरी होता है। इसे एंप्लॉयी के टैक्स स्लैब के हिसाब से काटा जाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 26, 2023 पर 5:55 PM
बैंक एफडी के इंटरेस्ट पर TDS से बचना चाहते हैं? Form 15H और Form 15G करेंगे आपकी मदद, जानिए कैसे
Form 15G और Form 15H एक सेल्फ-डेक्लेरेशन फॉर्म हैं। इसका इस्तेमाल गैर-जरूरी टीडीएस डिडक्शन के मामले में होता है।

इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को अपनी इनकम के बारे में बताना जरूरी है। हाथ में आए कई तरह के इनकम पर भी आप टैक्स चुका रहे होते हैं। दरअसल, इंडिविजुअल और संस्थानों को पेमेंट करते वक्त उस पर टीडीएस काटना जरूरी होता है। एंप्लॉयीज को कंपनी की तरफ से मिलने वाली सैलरी और बैंक की तरफ से आपको एफडी पर मिलने वाला इंटरेस्ट इसके उदाहरण हैं। सैलरी के मामले में एंप्लॉयर्स को टीडीएस काटना जरूरी होता है। इसे एंप्लॉयी के टैक्स स्लैब के हिसाब से काटा जाता है। सैलरी को छोड़ दूसरी तरह के इनकम पर TDS टीडीएस का फिक्स्ड रेट लागू होता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि कुछ मामलों में टीडीएस तभी लागू होता है जब इनकम का अमाउंट एक लिमिट से ज्यादा होता है।

कब लागू होता है टीडीएस?

अगर बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला इंटरेस्ट एक फाइनेंशियल ईयर में 40,000 रुपये को पार कर जाता है तो उस पर टीडीएस लागू होता है। सीनियर सिटीजंस के मामले में यह लिमिट 50,000 रुपये है। कॉर्पोरेट बॉन्ड्स के मामले में 5000 रुपये या इससे ज्यादा के इंटरेस्ट पर TDS लागू होता है। कई बार ऐसी इनकम पर भी टीडीएस काट लिया जाता है, जो लिमिट से ज्यादा नहीं होती है। ऐसे मामले में इस गलती को ठीक करने के लिए टैक्सपेयर्स फॉर्म 15G या 15H का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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