इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को अपनी इनकम के बारे में बताना जरूरी है। हाथ में आए कई तरह के इनकम पर भी आप टैक्स चुका रहे होते हैं। दरअसल, इंडिविजुअल और संस्थानों को पेमेंट करते वक्त उस पर टीडीएस काटना जरूरी होता है। एंप्लॉयीज को कंपनी की तरफ से मिलने वाली सैलरी और बैंक की तरफ से आपको एफडी पर मिलने वाला इंटरेस्ट इसके उदाहरण हैं। सैलरी के मामले में एंप्लॉयर्स को टीडीएस काटना जरूरी होता है। इसे एंप्लॉयी के टैक्स स्लैब के हिसाब से काटा जाता है। सैलरी को छोड़ दूसरी तरह के इनकम पर TDS टीडीएस का फिक्स्ड रेट लागू होता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि कुछ मामलों में टीडीएस तभी लागू होता है जब इनकम का अमाउंट एक लिमिट से ज्यादा होता है।
