इनवेस्टर्स को क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें, बढ़ते इंटरेस्ट रेट्स और व्यापार से जुड़ी बाधाओं के लिए तैयार रहना चाहिए। यह बात Jamie Dimon ने कही है। वह JPMorgan Chase & Company के सीईओ हैं। उनका कहना है कि जियोपॉलिटिकल क्राइसिस का असर दुनिया पर बना हुआ है। CNBC-TV18 से बातचीत में उन्होंने स्टॉक मार्केट और इनवेस्टमेंट सहित कई मसलों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देशों को आज अपने हथियार बढ़ाने, ग्रीन इकोनॉमी और इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए पूंजी की जरूरत है। यह तब है जब ग्रोथ नहीं दिख रही है और स्टैगफ्लेशन की आशंका नजर आ रही है। राहत पैकेज के बारे में उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा कदम था। लेकिन, अब अमेरिकी में मीठी गोली की जरूरत खत्म हो गई है। ग्रोथ के बगैर हम स्टैगफ्लेशन देख रहा हैं और यह अच्छा नहीं है।
सरकार के खर्च बढ़ाने से इनफ्लेशन पर दबाव
अमेरिकी सरकार ने 2022 में CHIPS और साइंस एक्ट पारित कराया था। इसमें अमेरिका में सेमीकंडक्टर के उत्पादन के लिए 58 अरब डॉलर की सब्सिडी देने का प्रस्ताव है। पिछले साल ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इनफ्लेनस रिडक्शन एक्ट पर हस्ताक्षर किया था। इसका कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना और घरेलू उत्पादन बढ़ाना है। Dimon ने कहा कि दुनिया भर में कर्ज का लेवल बहुत बढ़ा है। इसके असर से निपटना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, "सरकार के खर्च करने से इनफ्लेशन पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार ज्यादा पैसे खर्च कर यह नहीं उम्मीद कर सकती है कि इसका असर मुद्रास्फीति पर नहीं पड़ेगा। लोगों को क्रूड ऑयल और गैस की ऊंची कीमतों और हाई इंटरेस्ट रेट्स के लिए तैयार रहना चाहिए।"
जियोपॉलिटिकल सिचुएशंस को लेकर चिंता
उन्होंने कहा कि व्यापार में रुकावट, ऑयल की ऊंची कीमतें और रूस-यूक्रेन में चल रहा युद्ध चिंता बढ़ा रहे हैं। अमेरिका, चीन, इंडिया और यूरोप के लीडर्स इस चिंता को कम करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं खुद को सावधान लोगों की कैटेगरी में रखना चाहता हूं। उन्हें सबसे ज्यादा चिंता मौजूदा जियोपॉलिटिकल सिचुएशंस को लेकर है। इससे पहले जियोपॉलिटिकल क्राइसिस के आर्थिक और वित्तीय हालात पर गंभीर असर देखने को मिले हैं। लेकिन, मौजूदा वैश्विक तनाव का इकोनॉमी पर असर का पता लगाना मुश्किल है। इस तनाव का मानवता पर पड़ने वाले असर ने उन्हें चिंतित किया है।