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प्रॉपर्टी से लेकर ऑनलाइन सेल तक, जानिये कैसे पड़ता है TDS और TCS का आपके पैसे पर असर!

TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स और TCS यानी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स को अक्सर लोग सिर्फ टैक्स नियम मानते हैं। लेकिन अब इनका असर सिर्फ टैक्स भरने तक सीमित नहीं रहा

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 20, 2026 पर 3:17 PM
प्रॉपर्टी से लेकर ऑनलाइन सेल तक, जानिये कैसे पड़ता है TDS और TCS का आपके पैसे पर असर!
TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स और TCS यानी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स को अक्सर लोग सिर्फ टैक्स नियम मानते हैं।

TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स और TCS यानी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स को अक्सर लोग सिर्फ टैक्स नियम मानते हैं। लेकिन अब इनका असर सिर्फ टैक्स भरने तक सीमित नहीं रहा। ये नियम धीरे-धीरे लोगों के खर्च करने, निवेश करने और रिकॉर्ड रखने के तरीके को बदल रहे हैं।

प्रॉपर्टी खरीद में TDS क्यों जरूरी

अगर आप 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो आपको 1% TDS काटना जरूरी होता है। यह पैसा सरकार के पास जमा करना होता है। इससे बड़े लेन-देन पर नजर रखना आसान होता है। अब नियम और सख्त हो गए हैं। TDS अब डील वैल्यू या स्टांप ड्यूटी वैल्यू, जो ज्यादा हो उस पर लगाया जाता है। इससे गलत कीमत दिखाने की गुंजाइश कम हो गई है।

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