Gold Loan: भारत में गोल्ड लोन बाजार की रफ्तार अब ज्यादातर दूसरे रिटेल लोन सेगमेंट से ज्यादा हो गई है। अनसिक्योर्ड लोन पर सख्त नियम हैं। साथ ही, सोने की कीमतों अब काफी ऊंची हैं। इसलिए ज्यादातर लोग अब गिरवी रखने वाले कर्ज का रुख कर रहे हैं।
Gold Loan: भारत में गोल्ड लोन बाजार की रफ्तार अब ज्यादातर दूसरे रिटेल लोन सेगमेंट से ज्यादा हो गई है। अनसिक्योर्ड लोन पर सख्त नियम हैं। साथ ही, सोने की कीमतों अब काफी ऊंची हैं। इसलिए ज्यादातर लोग अब गिरवी रखने वाले कर्ज का रुख कर रहे हैं।
कंज्यूमर क्रेडिट रिपोर्टिंग कंपनी Experian के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में नए गोल्ड लोन की वैल्यू पिछले साल की तुलना में 91% बढ़ी। यानी जितना नया लोन पिछले साल दिया गया था, इस साल उससे लगभग दोगुना हुआ। सिर्फ सालाना ही नहीं, तिमाही आधार पर भी रफ्तार तेज हुई है।
गोल्ड लोन बकाया ₹15.6 लाख करोड़
क्रेडिट ब्यूरो CRIF High Mark के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 तक देश में कुल गोल्ड लोन बकाया ₹15.6 लाख करोड़ पहुंच गया। यह एक साल पहले ₹11 लाख करोड़ था। यानी करीब 41.9% की वृद्धि । अब रिटेल लोन बाजार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 9.7% हो गई है, जबकि पिछले साल यह 8.1% थी। यानी रिटेल कर्ज में गोल्ड लोन की अहमियत लगातार बढ़ रही है।
खातों की संख्या भी बढ़ी है। एक्टिव गोल्ड लोन अकाउंट 902.6 लाख तक पहुंच गए, जो सालाना 10.3% ज्यादा हैं। अच्छी बात यह है कि डिफॉल्ट अभी भी कम है। 31 से 90 दिन की देरी (PAR 31-90) सिर्फ 1.2% है और 180 दिन से ज्यादा की देरी (PAR 180+) मात्र 0.3% है। इसका मतलब है कि ज्यादातर उधार लेने वाले समय पर भुगतान कर रहे हैं।

कैसे तय होता है गोल्ड लोन का ब्याज
Indel Money के सीईओ उमेश मोहनन का कहना है कि गोल्ड लोन में बैंकों और NBFC के बीच ब्याज दर का अंतर उनकी फंडिंग लागत पर निर्भर करता है। बैंक कम लागत पर पैसा जुटा लेते हैं, जबकि NBFC को अक्सर बैंकों या बाजार से ऊंची दर पर फंड लेना पड़ता है। इसलिए उनकी दरें थोड़ी ज्यादा रहती हैं।
उन्होंने बताया कि शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों की दरें एक तय दायरे में रहती हैं। वहीं, NBFC की दरें उनसे कुछ ऊपर होती हैं। फिर भी NBFC की हिस्सेदारी बढ़ रही है। कम रकम के लोन में NBFC ज्यादा सक्रिय हैं और उनका डिफॉल्ट स्तर भी कम है।
गोल्ड लोन की मांग बढ़ने की वजह
पहली वजह है सोच में बदलाव। अब सोना गिरवी रखना आम बात हो गई है, इसे लोग किसी भी दूसरे लोन की तरह देखते हैं। पहले सोने के जेवरात गिरवी रखना परंपरा के खिलाफ समझा जाता था।
पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में तगड़ा उछाल आया है। यह गोल्ड लोन लेने वालों के लिए काफी अच्छा है। अब कम मात्रा के गहने गिरवी रखकर भी पहले से ज्यादा लोन मिल पा रहा है।

तीसरी बड़ी वजह अनसिक्योर्ड लोन पर RBI की सख्ती है। पर्सनल लोन, माइक्रोफाइनेंस और क्रेडिट कार्ड से जुड़े कर्ज के नियम कड़े होने से उधार लेना मुश्किल हुआ है। इसलिए लोग अब सिक्योर्ड विकल्प, खासकर गोल्ड लोन, की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।
भारत में घरों के पास करीब 34,000 टन सोना होने का अनुमान है, लेकिन सिर्फ 15% ही गिरवी बाजार में आया है। उसमें भी संगठित खिलाड़ियों की हिस्सेदारी केवल 37% है। यानी इस क्षेत्र में अभी काफी संभावनाएं हैं।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलता बाजार
पहले बैंक गोल्ड लोन कारोबार को प्राथमिकता नहीं देते थे, लेकिन सोने की ऊंची कीमतों और बेहतर मार्जिन के कारण अब वे भी इस सेगमेंट में सक्रिय हो गए हैं। दूसरी ओर, NBFC के लिए गोल्ड लोन मुख्य व्यवसाय है, इसलिए वे प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए नए फीचर जोड़ रहे हैं और फिनटेक कंपनियों के साथ साझेदारी कर ग्राहक अनुभव को बेहतर बना रहे हैं।
हाल में लोन टू वैल्यू रेशियो, सोने के सुरक्षित भंडारण, शुद्धता जांच और नीलामी प्रक्रिया से जुड़े नियम सख्त किए गए हैं। इससे इस क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ी है और निगरानी व्यवस्था अधिक मजबूत हुई है।

पर्सनल लोन से बेहतर गोल्ड लोन?
कई मामलों में गोल्ड लोन पर्सनल लोन से सस्ता पड़ सकता है। इसमें आपका सोना गिरवी रहता है, इसलिए ब्याज दर आमतौर पर कम होती है। लोन जल्दी मिल जाता है और क्रेडिट स्कोर की शर्तें भी थोड़ी आसान रहती हैं।
लेकिन एक जोखिम भी है। अगर समय पर पैसा नहीं चुकाया तो सोना नीलाम हो सकता है। पर्सनल लोन में ऐसी गिरवी नहीं होती, लेकिन ब्याज दर ज्यादा होती है। इसलिए कौन सा विकल्प बेहतर है, यह आपकी जरूरत और चुकाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
गोल्ड लोन अभी लें या इंतजार करें
Indel Money के सीईओ उमेश मोहनन का कहना है कि लोन लेने का कोई तय सही समय नहीं होता। यह जरूरत पर निर्भर करता है। पहले गोल्ड लोन संकट के समय लिया जाता था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल कंज्मप्शन और लाइफस्टाइल जरूरतों के लिए भी हो रहा है।
सोने की कीमतें भू राजनीतिक हालात, डॉलर की मजबूती, फेडरल रिजर्व की नीति और शेयर बाजार के रुझान से प्रभावित होती हैं। फिलहाल सुरक्षित निवेश की मांग के कारण कीमतें ऊंची रह सकती हैं।
ऐसे लेना चाहिए गोल्ड लोन
ब्याज दर और कुल लागत समझें: सिर्फ कम ब्याज दर न देखें, प्रोसेसिंग फीस, पेनल चार्ज, प्रीपेमेंट चार्ज और अन्य छिपी लागत भी देखना जरूरी है।
लोन टू वैल्यू (LTV) अनुपात देखें: सोने के मूल्य के मुकाबले कितना लोन मिल रहा है, यह समझें। ज्यादा LTV आकर्षक लग सकता है, लेकिन जोखिम भी बढ़ाता है।
भुगतान शर्तें साफ रखें: ईएमआई, बुलेट पेमेंट या सिर्फ ब्याज चुकाने का विकल्प क्या है, और समय पर भुगतान न करने पर क्या पेनल्टी लगेगी, यह पहले जान लें।
सोने की सुरक्षा और नीलामी नियम: आपका गिरवी रखा सोना कैसे सुरक्षित रखा जाएगा और डिफॉल्ट की स्थिति में नीलामी की प्रक्रिया क्या होगी, यह भी समझ लें।
Gold Loan Default: गोल्ड लोन नहीं चुकाने पर नीलाम हो सकता है आपका सोना, क्या हैं आपके कानूनी अधिकार?
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