Gold Outlook: क्यों गोल्ड में बड़ा निवेश करना का समय अब हाथ से जा चुका है?

डीएसपी म्यूचुअल फंड के एमडी और सीईओ कल्पेश पारेख ने कहा कि गोल्ड और सिल्वर की वैल्यू तय करने का कोई आसान रास्ता नहीं है। इसकी वजह यह है कि दोनों कैश फ्लो जेनरेट नहीं करते। उन्होंने कहा कि गोल्ड का फायदा तब मिलता है, जब दूसरे एसेट्स महंगे हो जाते हैं और गोल्ड में लंबे समय से स्थिरता होती है

अपडेटेड Dec 23, 2025 पर 4:44 PM
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आज करीब सभी उभरते बाजारों में गोल्ड ने शेयरों से ज्यादा रिटर्न दिया है। यह एसेट के मामले में हीरो बन गया है।

गोल्ड तेजी के नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे में एन महालक्ष्मी ने अपने पॉडकास्ट में डीएसपी म्यूचुअल फंड के एमडी और सीईओ कल्पेश पारेख के साथ गोल्ड के बारे में विस्तार से बातचीत की। पारेख ने बताया कि गोल्ड का प्रदर्शन पिछले कुछ सालों में क्यों शानदार रहा है। उन्होंने गोल्ड को लेकर अब अपने न्यूट्रल रुख की वजह भी बताई।

गोल्ड और सिल्वर की सही वैल्यू

पारेख ने कहा कि गोल्ड और सिल्वर की वैल्यू तय करने का कोई आसान रास्ता नहीं है। इसकी वजह यह है कि दोनों कैश फ्लो जेनरेट नहीं करते। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमने एक रेफरेंस फ्रेमवर्क बनाया है। हम मनी सप्लाई खासकर एम2 का इस्तेमाल करते है। हम अमेरिकी एम2 लेते हैं और यूरोजोन एम2 का करीब आधा लेते हैं। बाकी दुनिया का नहीं लेते हैं।


यह ज्यादा निवेश का सही वक्त नहीं

उन्होंने कहा कि अगर आप लंबी अवधि में गोल्ड की कीमतों के मुकाबले इस कंबाइंड मनी सप्लाई को ट्रैक करते हैं तो आप पाते हैं कि गोल्ड की कीमत आज उस फेयर वैल्यू के करीब है, जिसका संकेत फ्रेमवर्क से मिलता है। यही वजह है कि हम कह रहे हैं कि यह गोल्ड में बहुत ज्यादा निवेश का सही वक्त नहीं है। अगर आपके पास गोल्ड नहीं है तो आप पोर्टफोलियो में इसे 5-10 फीसदी तक शामिल कर सकते हैं। ज्यादा निवेश का समय अब जा चुका है।

गोल्ड और सिल्वर में अब मार्जिन ऑफ सेफ्टी नहीं

इस मॉडल के हिसाब से गोल्ड का करीब 3,300 डॉलर प्रति औंस की कीमत फेयर वैल्यू के करीब है। सिल्वर फेयर वैल्यू करीब 63 डॉलर है। अभी इसकी कीमत करीब 55 डॉलर है। दोनों मेटल में अब मार्जिन ऑफ सेफ्टी सीमित रह गया है। उन्होंने कहा कि हमने अपने मल्टी एसेट ऐलोकेशन फंड में गोल्ड और सिल्वर की हिस्सेदारी करीब 22 फीसदी से घटाकर करीब 13-14 फीसदी कर दी है।

गोल्ड डायवर्सिफिकेशन के लिए जरूरी 

पारेख का कहना है कि गोल्ड डायवर्सिफिकेशन के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि इंडिया में स्टॉक मार्केट्स का रिटर्न लंबी अवधि में करीब 12 फीसदी रहा है। इसके मुकाबले गोल्ड ने करीब 11 फीसदी रिटर्न दिया है। अगर आप इक्विटी और गोल्ड को पोर्टफोलियो में 50:0 के रेशियो में रखते हैं और हर साल रिबैलेंस करते हैं तो सिर्फ अकेले इक्विटी के मुकाबले आपको थोड़ा ज्यादा रिटर्न मिलता है। उतारचढ़ाव 35-40 फीसदी तक कम हो जाता है। इक्विटी का स्टैंडर्ड डेविएशन करीब 16 फीसदी है। गोल्ड और सिल्वर का इससे ज्यादा 18-22 फीसदी है। लेकिन, एक साथ देखने पर यह उतारचढ़ाव गिरकर करीब 12 फीसदी रह जाता है।

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दूसरे एसेट्स महंगे होने पर बढ़ती है गोल्ड की चमक

उन्होंने कहा कि गोल्ड का फायदा तब मिलता है, जब दूसरे एसेट्स महंगे हो जाते हैं और गोल्ड में लंबे समय से स्थिरता होती है। आज करीब सभी उभरते बाजारों में गोल्ड ने शेयरों से ज्यादा रिटर्न दिया है। यह एसेट के मामले में हीरो बन गया है। पहले मैं गोल्ड में करीब 15 फीसदी निवेश रखता था। लेकिन, हालिया तेजी के बाद मैंने निवेश थोड़ा घटाया है।

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