सोने और चांदी की चमक फिर से अचानक बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह इजरायल और ईरान के बीच चल रही लड़ाई है। सोना अब अपने 3,500 डॉलर प्रति औंस के ऑल टाइम की तरफ बढ़ रहा है। 16 जून को देश और विदेश में सोने की कीमतों में तेजी दिखी। हालांकि, इंडिया में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में मुनाफावसूली की वजह से दोपहर में गोल्ड फ्यूचर्स दबाव में आ गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने का असर कई एसेट्स पर पड़ा है।
सोने में तेजी जारी रह सकती है
मायवेल्थग्रोथ डॉट कॉम के को-फाउंडर हर्षद चेतनवाला ने कहा, "अनिश्चित समय खासकर युद्ध जैसी स्थितियों में सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं। ईरान-इजरायल लड़ाई का असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर भी दिख रहा है। सोने की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।" माना जा रहा है कि सोने की चमक बढ़ने की दूसरी वजह अमेरिका में इंटरेस्ट रेट्स में कमी की अनुमान भी है। इंटरेस्ट रेट में कमी से गोल्ड पर पॉजिटिव असर पड़ता है। इधर, चीन और इंडिया में केंद्रीय बैंक गोल्ड में निवेश बढ़ा रहे हैं।
केंद्रीय बैंक गोल्ड में बढ़ा रहे निवेश
गोलटेलर के को-फाउंडर विवेक बांका ने कहा कि गोल्ड अब दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा रिजर्व एसेट बन गया है। इसने यूरो को पीछे छोड़ दिया है। केंद्रीय बैंकों के साथ रिटेल इनवेस्टर्स भी गोल्ड में खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड की कीमतें काफी ज्यादा चढ़ चुकी हैं। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि आगे सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है। सवाल है कि निवेशकों को गोल्ड में किस तरह की स्ट्रेटेजी अपनानी चाहिए?
गोल्ड में कितना करें निवेश
फाइनेंशियल एडवाइजर्स का कहना है कि गोल्ड में 10-15 फीसदी तक निवेश किया जा सकता है। चेतनवाला ने कहा कि निवेशकों को हमेशा इस लेवल का ध्यान रखना चाहिए। पिछले 2-3 सालों में गोल्ड की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। इसलिए अगर कोई इनवेस्टर्स लंबी अवधि के लिए गोल्ड में निवेश करना चाहता है तो उसे मौजूदा कीमतों पर निवेश करने की जगह थोड़ा इंतजार कर लेना चाहिए।
गोल्ड में मुनाफावसूली की राय नहीं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन लोगों ने गोल्ड में निवेश किया है, उन्हें अपना निवेश बनाए रखना चाहिए। इसकी वजह यह है कि गोल्ड हेजिंग के लिए सबसे अच्छा है। अगर इनवेस्टर्स के पोर्टफोलियो में गोल्ड नहीं है या कम है तो वह धीरे-धीरे गोल्ड में निवेश कर सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडिया में ज्यादातर लोगों के इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में इक्विटी और रियल एस्टेट की ज्यादा हिस्सेदारी है।
शॉर्ट टर्म में उतारचढ़ाव पर नहीं दे ध्यान
मनी मंत्रा के फाउंडर विरल भट्ट ने कहा कि जो इनवेस्टर्स गोल्ड में निवेश बढ़ाना चाहते हैं वे गोल्ड म्यूचुअल फंड या गोल्ड ईटीएफ में निवेश कर सकते हैं। हालांकि, रिटेल इनवेस्टर्स को शॉर्ट टर्म में गोल्ड की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। अगर आप सिर्फ इसलिए गोल्ड में निवेश कर रहे हैं यह खबरों में बना हुई है तो आपको निराशा हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर जियोपॉलिटिकल टेंशन घटता है या फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट घटाने में देर करता है तो कीमतों में नरमी आ सकती है।