Gold-Silver-Copper Crash: रिकॉर्ड तेजी के बाद कीमती मेटल्स धड़ाम, ये 4 कारण हैं जिम्मेदार
Gold-Silver-Copper Crash: रिकॉर्ड तेजी के बाद सोना, चांदी और कॉपर अचानक धड़ाम हो गए। क्या यह सिर्फ मुनाफावसूली है या बड़ा ट्रेंड बदल रहा है? जियोपॉलिटिक्स, चीन की पॉलिसी और CME के फैसले ने कैसे पलटा गेम, समझिए चार बड़े कारण।
फरवरी एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर करीब 2 फीसदी टूटकर 1,37,646 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
Gold-Silver-Copper Crash: 29 दिसंबर को सोना, चांदी और कॉपर की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। इससे ठीक पहले इन तीनों कमोडिटीज में जोरदार बुल रन था। कीमतें अपने लाइफटाइम हाई के आसपास पहुंच चुकी थीं। जानकारों के मुताबिक, मुनाफावसूली से लेकर जियो-पॉलिटिकल हालात और रेगुलेटरी फैसलों तक, चार बड़े फैक्टर्स ने मिलकर इस गिरावट की जमीन तैयार की।
सोना, चांदी और कॉपर में कितनी गिरावट
फरवरी एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर करीब 2 फीसदी टूटकर 1,37,646 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले यह अपने ऑल-टाइम हाई के बेहद करीब ट्रेड कर रहा था। अप्रैल और जून एक्सपायरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स भी दिन में नया रिकॉर्ड बनाने के बाद करीब 2 फीसदी फिसल गए।
मार्च एक्सपायरी की चांदी में ज्यादा तेज गिरावट दिखी। यह करीब 8 फीसदी टूटकर 2,32,663 रुपये प्रति किलो पर आ गई। वहीं मई और जुलाई एक्सपायरी वाले सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट्स ने दिन की पूरी तेजी गंवा दी और 9 से 10 फीसदी तक गिर गए।
कॉपर में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई। जनवरी एक्सपायरी वाला कॉपर पहले 1,392.95 रुपये प्रति किलो के लाइफटाइम हाई पर पहुंचा, लेकिन बाद में करीब 13 फीसदी टूटकर 1,211.05 रुपये प्रति किलो पर आ गया। फरवरी और मार्च एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स भी नए हाई के बाद नुकसान में चले गए।
मुनाफावसूली बनी सबसे बड़ा कारण
एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2025 में आई असाधारण तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। JM Financial Services में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च से जुड़े प्रणव मेर का कहना है कि 2025 जैसी जबरदस्त रिटर्न 2026 में दोहरने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में ऊंची कीमतों पर प्रॉफिट बुकिंग पूरी तरह स्वाभाविक थी।
2. भू-राजनीतिक तनाव में नरमी से दबाव
सोना और चांदी जैसे सेफ-हेवन एसेट्स पर दबाव तब बढ़ा, जब रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म होने की उम्मीदें मजबूत हुईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की मुलाकात के बाद संकेत मिले कि शांति समझौते के ज्यादातर बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है।
UBS के एनालिस्ट्स का कहना है कि गोल्ड फिलहाल ऊंचे प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। अगर फेड का रुख अचानक सख्त हुआ या ETF से बड़ी निकासी देखने को मिली, तो कीमतों में और कमजोरी आ सकती है।
3. चीन की सप्लाई पॉलिसी से अनिश्चितता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन 2026 से फिजिकल सिल्वर के एक्सपोर्ट पर लाइसेंस सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है, जो 2027 तक जारी रह सकता है। इससे ग्लोबल सप्लाई और टाइट होने की आशंका है। इस खबर पर अमेरिकी अरबपति एलन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि चांदी कई इंडस्ट्रियल प्रोसेसेज के लिए बेहद जरूरी है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि पहले से ही दबाव में चल रही ग्लोबल इन्वेंट्री के बीच यह पॉलिसी पेपर प्राइस और फिजिकल मेटल के बीच का अंतर और बढ़ा सकती है। कंपनी के कमोडिटी रिसर्च हेड नवनीत दमानी के मुताबिक, चांदी अब पारंपरिक बुल साइकल से आगे निकलकर एक स्ट्रक्चरल फेज में पहुंच चुकी है, जहां सप्लाई की कमी कीमतों को तय कर रही है।
4. CME का मार्जिन बढ़ाना भी बना ट्रिगर
चांदी में गिरावट की एक अहम वजह CME ग्रुप का फैसला भी रहा। CME ने मार्च 2026 के सिल्वर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए शुरुआती मार्जिन 20,000 डॉलर से बढ़ाकर 25,000 डॉलर कर दिया है। जिन निवेशकों के पास जरूरी मार्जिन नहीं था, उनकी पोजिशन लिक्विडेट हो सकती है। इससे बाजार पर और दबाव बना।
मेटल स्टॉक्स पर भी दिखा असर
कमोडिटी कीमतों में आई इस तेज गिरावट का असर शेयर बाजार में भी दिखा। हिंदुस्तान जिंक और हिंदुस्तान कॉपर के शेयर अपने-अपने इंट्राडे हाई से तेज फिसलते नजर आए। हिंदुस्तान जिंक हरे निशान में खुलने के बाद आखिर में करीब 3% की गिरावट के साथ 618.15 रुपये पर बंद हुए। हिंदुस्तान कॉपर 2.58% की बढ़त के साथ 487.85 रुपये पर बंद हुए। वहीं, शुरुआती कारोबार में यह 8% तक बढ़ गया था।
कुल मिलाकर, रिकॉर्ड तेजी के बाद यह गिरावट बाजार में ठहराव और संतुलन की ओर इशारा करती है, जहां आगे की चाल अब ग्लोबल पॉलिसी, जियो-पॉलिटिकल हालात और रेगुलेटरी फैसलों पर निर्भर करेगी।